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Explainer: भारत से जुड़े गैंगस्टरों पर अमेरिका में क्यों हो रही कार्रवाई, किन घटनाओं के बाद सक्रिय हुई एफबीआई?

Wed, 08 Jul 2026 05:43 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 08 Jul 2026 05:43 PM IST
सार

अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने अलग-अलग देशों के पुलिस बल और जांच एजेंसियों के साथ संयुक्त अभियान चलाकर लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांडा गैंग के खिलाफ कार्रवाई की और ड्रग्स-हथियारों की बड़ी खेप को कब्जे में ले लिया। इसके साथ ही अमेरिका की एक संघीय अदालत में नौ बिंदुओं वाला आरोपपत्र दाखिल किया गया है, जिसमें इन गैंगस्टरों और इनके गुर्गों पर आरोप तय किए गए हैं। आइये जानते हैं कि अमेरिका ने अचानक यह कार्रवाई क्यों की और किस पर-क्या आरोप हैं...

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US Operation Hard Ball FBI DoJ against India related Gangsters Gangs Crime Lords Lawrence Bishnoi Goldi Brar
अमेरिका का ऑपरेशन हार्डबॉल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत से लेकर विदेश तक बीते कई वर्षों से अलग-अलग आपराधिक घटनाओं के लिए जिम्मेदार लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ समेत कई गैंगस्टरों और उनके संगठनों पर अब अमेरिका में कार्रवाई शुरू हो गई है। अमेरिका की जांच एजेंसी- फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने कनाडा से लेकर यूरोप तक अलग-अलग एजेंसियों के साथ संयुक्त कार्रवाई में इन संगठनों के गुर्गों को गिरफ्तार किया। एफबीआई ने अपने इस अभियान को 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' नाम दिया है। 
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इतना ही नहीं अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने भी इन आपराधिक संगठनों के खिलाफ अदालतों में मामले शुरू कराए हैं। अमेरिकी जांचकर्ताओं के मुताबिक, इन आपराधिक संगठनों का दायरा भारत से आगे कई देशों में फैला है और यह अलग-अलग देशों में भारतीयों को भी निशाना बनाने के काम में जुड़े रहे हैं। 
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अमेरिका की तरफ से अभियान चलाए जाने के बाद यह जानना अहम है कि आखिर भारत से जुड़े रहे किन-किन आपराधिक संगठनों और उनके सरगनाओं पर वॉशिंगटन की तरफ से कार्रवाई की गई है? अमेरिका की तरफ से यह कदम उठाए जाने की वजह क्या है? जांच एजेंसियों ने इस दौरान आपराधिक संगठनों के खिलाफ क्या साक्ष्य जुटाए? कनाडा में मारे गए आतंकी हरदीप सिंह निज्जर और अभिनेता सलमान खान के घर पर फायरिंग के मामले का अमेरिकी एजेंसियों ने क्यों जिक्र किया है? इस पूरे मामले में जांच और तेजी से एक्शन लिए जाने की शुरुआत कहां से हुई? आइये जानते हैं...
 

पहले जानें- भारत से जुड़े किन संगठनों-सरगनाओं पर हुई कार्रवाई?

अमेरिका, कनाडा और यूरोप की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत भारत से जुड़े तीन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों (सिंडिकेट्स) और उनके सरगनाओं पर बड़ी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई में कुल 37 लोगों पर आरोप तय किए गए हैं, जिनमें से 24 को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

1. लॉरेंस बिश्नोई गैंग

सरगना: लॉरेंस बिश्नोई, आरोप हैं कि यह भारत की जेल में बंद होने के बावजूद अपना अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क चला रहा है।

प्रमुख सहयोगी: उत्तरी अमेरिका में गैंग का प्रमुख- सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़, यूरोप का प्रमुख- रोहित गोदारा और सुखराज सिंह कंग। 



 

US Operation Hard Ball FBI DoJ against India related Gangsters Gangs Crime Lords Lawrence Bishnoi Goldi Brar
ऑपरेशन हार्ड बॉल। - फोटो : FBI/DoJ

2. जग्गू भगवानपुरिया गैंग

सरगना: जग्गू भगवानपुरिया, जो बिश्नोई का पूर्व सहयोगी और अब प्रतिद्वंद्वी गैंगस्टर है। यह भी भारतीय जेल से ही अपना अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क संचालित कर रहा है।

प्रमुख सहयोगी: इस नेटवर्क में पंजाब पुलिस के एक इंस्पेक्टर (टांडा के तत्कालीन एसएचओ) गुरिंदरजीत सिंह नागरा का नाम भी सामने आया है। नागरा पर आरोप है कि उसने गैंग के सदस्य गुरलाल सिंह और अन्य के साथ मिलकर अमेरिका के कैलिफोर्निया में बैठे एक परिवार से चार लाख डॉलर की रंगदारी मांगने और उनके रिश्तेदारों को हत्या के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।


3. रविंदर सिंह ढांडा ड्रग नेटवर्क

सरगना: कनाडा स्थित रविंदर सिंह ढांडा, जिसे 'रैंडी', 'रोलेक्स', और 'जॉन विक' के नाम से भी जाना जाता है।

प्रमुख सहयोगी: जसकरन बागरी उर्फ बाबा और गुरतेज सिंह स्माघ उर्फ सिम्बा।
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गैंग सरगनाओं पर अमेरिका की नजर। - फोटो : अमर उजाला
कुल मिलाकर, अमेरिकी न्याय विभाग और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने दुनिया भर में फैले इनके ड्रग्स और आतंक के व्यापार को खत्म करने का अभियान शुरू किया है।


अमेरिकी-अन्य एजेंसियों की तरफ से क्या कार्रवाई हुई?

अलग-अलग देशों में चले ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत एफबीआई ने लॉस एंजिल्स पुलिस विभाग (एलएपीडी), ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (डीईओ), होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन (एचएसआई), यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के साथ-साथ कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) और स्पेन की पुलिस (गार्डिया सिविल) को अभियान में शामिल किया था। 

1. कहां हुई छापेमारी, क्या-क्या बरामदगी हुई?
जांच एजेंसियों ने अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 50 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की। कैलिफोर्निया में विशेष रूप से सैक्रामेंटो क्षेत्र में 23 और लॉस एंजिल्स क्षेत्र में 11 स्थानों पर सर्च वारंट के तहत छापे मारे गए। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्री बरामद की गई, जिसमें लगभग 1,000 किलोग्राम कोकीन, 1 किलोग्राम हेरोइन, $40,000 नकद और एक दर्जन हथियार शामिल हैं।

ये भी पढ़ें: Explainer: लॉरेंस गैंग के गुर्गे कितने देशों में फैले, अमेरिका-कनाडा में क्या आरोप लगे? यूरोप में भी नेटवर्क!

2. कितनों पर आपराधिक मामले, कहां से-कितने गिरफ्तार?
यह कार्रवाई अमेरिकी अदालतों में तीन अलग-अलग संघीय अभियोगों में कुल 37 लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद की गई। ऑपरेशन हार्ड बॉल में अब तक कुल 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन 24 गिरफ्तारियों में से 13 लोग अमेरिका से पकड़े गए हैं। इनमें 11 कैलिफोर्निया से, एक इंडियाना से और एक जॉर्जिया से गिरफ्तार किया गया। 

दूसरी तरफ कनाडाई एजेंसी ने ब्रिटिश कोलंबिया से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित किया जाएगा, एक स्पेन से पकड़ा गया है, जबकि सात आरोपी पहले से ही हिरासत में थे।

3. अभी कौन-कौन फरार, क्या है लोकेशन?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, 10 आरोपी फरार हैं। इनकी तलाश पूरे जोर-शोर से की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से सात अमेरिका में, दो भारत में और एक यूरोप में छिपा हो सकता है। 
 

कब से इन गैंगस्टरों की तलाश में सक्रिय हुआ अमेरिका?

अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की तरफ से ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत की गई यह कार्रवाई कोई एक दिन में ही तय नहीं हुई। बल्कि बीते कई वर्षों से इन पर जांच जारी थी। हालांकि, कुछ प्रमुख हाई-प्रोफाइल मामलों के बाद इन आपराधिक नेटवर्क, खासकर लॉरेंस बिश्नोई और उसके प्रतिद्वंद्वी आपराधिक गुटों के खिलाफ कार्रवाई बहुत तेजी से और सख्त तरीके से की गई।

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लॉरेंस बिश्नोई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
1. जून 2023: आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या 
इस मामले में सबसे बड़ा ट्रिगर 18 जून 2023 को कनाडा के सरे (ब्रिटिश कोलंबिया) में एक गुरुद्वारे के बाहर खालिस्तान समर्थन आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या थी। इस घटना के बाद इस सिंडिकेट पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का ध्यान तेजी से केंद्रित हुआ।

2. ताजा घटनाक्रम: अमेरिका में करोड़ों की रंगदारी मांगना
इन गिरोहों ने व्हाट्सएप और अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए अमेरिका में रहने वाले लोगों से भारी रंगदारी मांगनी शुरू कर दी थी। एक मामले में तो पीड़ित से 50 लाख डॉलर (करीब 40 करोड़ रुपये) से ज्यादा की मांग की गई। यह मामले लॉस एंजिल्स और थाउजेंड ओक्स इलाके से सामने आए थे।

3. अप्रैल 2026: पुलिस अधिकारियों के साथ भ्रष्टाचार और झूठे मुकदमे का खुलासा
जग्गू भगवानपुरिया गैंग की जांच में यह बात सामने आई कि इस गिरोह ने पंजाब पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर कैलिफोर्निया में रहने वाले एक परिवार से चार लाख डॉलर (करीब 3.3 करोड़ रुपये) की रंगदारी मांगी। पैसे न देने पर पीड़ित के भारत में रहने वाले रिश्तेदारों को जनवरी 2026 में हुए एक झूठे मर्डर केस में फंसाने की धमकी दी गई। इस मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने तत्कालीन इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा को नामजद किया और भारत से अधिकारी के प्रत्यर्पण की मांग की जा सकती है।  

अब जानें- भारत से जुड़े सरगना और उनके गैंग पर लगे आरोपों की कुंडली


1. लॉरेंस बिश्नोई गैंग

लॉरेंस बिश्नोई और उसके गैंग पर अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की बड़ी वजह अमेरिकी न्याय विभाग की जांच रही, जिसमें यह सामने आया कि बिश्नोई भारत की जेल में बंद होने के बावजूद वहां से तस्करी किए गए मोबाइल फोन के जरिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क चला रहा था। अमेरिकी अदालत में दायर अभियोग के मुताबिक, इस गैंग ने दुनिया भर में बसे भारतीय समुदाय को अपना निशाना बनाया और दहशत का माहौल बनाकर हत्या, रंगदारी और ड्रग्स तस्करी जैसे अपराध किए। मामले में बिश्नोई के साथ उसके दो सहयोगी उत्तरी अमेरिका में अपराध के लिए आरोपी- गोल्डी बराड़ और यूरोप के सरगना- रोहित गोदारा पर भी आरोप तय किए गए हैं।

हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी अभियोग में यह स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई और उसके शीर्ष सहयोगी गोल्डी बराड़ ने ही इस हत्या का आदेश दिया था। इस घटना के बाद ही कनाडा सरकार ने मामले की पूरी गोपनीय जानकारी अमेरिका के साथ साझा की थी। इसके चलते अमेरिकी प्रशासन ने सतर्कता से कनाडा और अमेरिका से चल रहे बिश्नोई गैंग के कनेक्शन ढूंढने शुरू कर दिए।

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लॉरेंस बिश्नोई गैंग। - फोटो : अमर उजाला
करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने के घटनाक्रम
यह गैंग व्हाट्सएप और अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करके अमेरिका और कनाडा में रहने वाले लोगों से भारी रंगदारी वसूलता था। उदाहरण के लिए, लॉस एंजिल्स और थाउजेंड ओक्स (कैलिफोर्निया) में रहने वाले पीड़ितों को डराकर 5 मिलियन डॉलर (करीब 40 करोड़ रुपये) की मांग की गई थी।

हाई-प्रोफाइल लोगों के घर गोलीबारी और धमकियां
अमेरिकी अभियोग के अनुसार, नवंबर 2023 में वैंकूवर (कनाडा) में एक प्रमुख भारतीय अभिनेता और गायक के घर पर गोलीबारी हुई थी। बिश्नोई गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए फेसबुक पर पंजाबी में धमकी दी थी कि "तुम्हें हमसे कोई नहीं बचा सकता।" अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह की घटनाओं का इस्तेमाल गैंग द्वारा विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय में डर पैदा करने और रंगदारी वसूलने के लिए किया गया।

इसके अलावा आरोप पत्र में अप्रैल 2024 में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के मुंबई स्थित घर के बाहर फायरिंग और अक्तूबर 2024 में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या जैसे मामलों का जिक्र भी है। न्याय विभाग के मुताबिक, इन घटनाओं को बिश्नोई गैंग जेल में बैठे-बैठे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेखौफ होकर काम करने के सबूत के तौर पर पेश किया गया है।

ड्रग्स की तस्करी और प्रतिद्वंद्वियों की ड्रग्स चुराना
  • अपनी आपराधिक गतिविधियों की फंडिंग के लिए यह गैंग बड़े पैमाने पर कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी करता था। 
  • जांच में खुलासा हुआ कि नवंबर 2024 में अमेरिका से कनाडा भेजी जा रही 49 किलो कोकीन कैलिफोर्निया के रेडलैंड्स में पकड़ी गई थी, जिसकी देखरेख बिश्नोई और बराड़ कर रहे थे।
  • इसके अलावा, मार्च 2024 से जुलाई 2025 के बीच इस गैंग पर लॉस एंजेलिस क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वी गैंग के तस्करों से लगभग 520 किलोग्राम कोकीन चुराने के आरोप भी तय किए गए हैं।

इन आपराधिक कृत्यों के लिए लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा और अन्य छह आरोपियों पर संगठित अपराध की साजिश रचने, हॉब्स एक्ट के तहत जबरन वसूली मांगने और ड्रग्स बांटने की साजिश रचने के कई गंभीर संघीय आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में यह भी टिप्पणी की है कि लॉरेंस बिश्नोई खुद को सोशल मीडिया पर देशभक्त, राष्ट्रवादी और एक धार्मिक व्यक्ति के रूप में पेश करता था, ताकि युवाओं को अपने गिरोह में शामिल कर सके, लेकिन पर्दे के पीछे वह हत्या, अपहरण और ड्रग्स का एक क्रूर अंतरराष्ट्रीय व्यापार चला रहा है।

2. जग्गू भगवानपुरिया गैंग

जग्गू भगवानपुरिया (38) पर भी लॉरेंस की तरह ही भारत की जेल में बंद होने के बावजूद दुनिया भर में अपना अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क चलाने का आरोप है। अमेरिकी न्याय विभाग ने अभियान के तहत भगवानपुरिया और उसके 16 अन्य सहयोगियों पर एक नया संघीय अभियोग दायर किया है। इस गैंग के दुनिया भर में 1000 से अधिक सदस्य बताए गए हैं, जिनमें से 100 से ज्यादा अकेले अमेरिका में काम कर रहे थे। 

भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर रंगदारी लेने के आरोप
इस गिरोह ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए भारत में भ्रष्ट पुलिस और सरकारी अधिकारियों के साथ साठगांठ की। जांच में सामने आया कि गैंग के सदस्य, जैसे कैलिफोर्निया में बैठा गुरलाल सिंह अमेरिका और कनाडा में बैठे पीड़ितों की जानकारी पंजाब पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों को देते थे। इसके बाद ये अधिकारी पीड़ितों के भारत में रहने वाले रिश्तेदारों को हत्या जैसे झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां देकर भारी रंगदारी वसूलते थे।
 
इसी मामले में पंजाब के टांडा के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा का नाम सामने आया है, जिसने भगवानपुरिया सिंडिकेट के साथ मिलकर एक अमेरिकी परिवार से 4 लाख डॉलर की रंगदारी मांगी थी।

ये भी पढ़ें: पंजाब के इंस्पेक्टर पर बड़ा आरोप: अमेरिकी परिवार से मांगी 3 करोड़ की रंगदारी, दी ये धमकी; FBI ने किया नामजद

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जग्गू भगवानपुरिया गैंग। - फोटो : अमर उजाला
बड़े पैमाने पर ड्रग्स की तस्करी
यह सिंडिकेट अपने अपराधों को फंड करने के लिए ड्रग्स की तस्करी करता था। इनका लॉस एंजेलिस और इनलैंड एम्पायर में नशीले पदार्थों को लाने-ले जाने का अपना एक सब-नेटवर्क था। जून 2025 में इस गिरोह द्वारा दक्षिणी कैलिफोर्निया से पूर्वी अमेरिका भेजी जा रही 99.2 किलोग्राम कोकीन और 1 किलोग्राम हेरोइन को कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पकड़ा था।

हिरासत से खौफनाक धमकियां देना
गैंग के हौसले इतने बुलंद थे कि इसके एक सदस्य गुरदेव सिंह ने अमेरिका में आईसीई (आव्रजन विभाग) की हिरासत में रहते हुए भी मध्य-पश्चिम अमेरिका में रहने वाले एक परिवार को रंगदारी के लिए धमकाया और पैसे न देने पर उनके बच्चों को गोलियों से भून देने की धमकी दी।

हथियारों का अवैध व्यापार
ड्रग्स के अलावा यह गैंग हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त में भी शामिल था। उन पर बिना लाइसेंस के हथियारों का व्यापार करने और मशीन गन जैसे खतरनाक हथियार रखने के आरोप लगे हैं।

हत्या की सुपारी और अपहरण
यह अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट दुनिया भर में कॉन्ट्रैक्ट किलिंग यानी सुपारी लेकर हत्या, अपहरण और हिंसक वारदातों को अंजाम देता था।

इन्हीं सभी गंभीर आपराधिक गतिविधियों को खत्म करने के लिए अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए जग्गू भगवानपुरिया और उसके गिरोह पर भी लॉरेंस गैंग की तरह ही संगठित अपराध की साजिश, जबरन वसूली (हॉब्स एक्ट के तहत), और ड्रग्स व हथियारों की अवैध तस्करी के कई संघीय आरोप तय किए हैं।

3. रविंदर सिंह ढांडा गैंग

कनाडा के वैंकूवर में रहने वाले 57 वर्षीय रविंदर सिंह ढांडा और उसके गिरोह पर कार्रवाई मुख्य रूप से एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क चलाने की वजह से की गई। ढांडा के अलावा इस मामले में 50 वर्षीय जसकरन बागरी उर्फ बाबा, 43 वर्षीय गुरतेज सिंह स्माघ उर्फ सिम्बा और 8 अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है। 

भारी मात्रा में कोकीन और ड्रग्स की तस्करी
यह नेटवर्क अमेरिका से कनाडा में हर हफ्ते सैकड़ों किलोग्राम कोकीन और मेथमफेटामाइन की तस्करी करता था। ड्रग्स को छिपाने और अमेरिकी-कनाडाई बॉर्डर पार कराने के लिए यह गैंग लॉन्ग-हॉल कमर्शियल ट्रकों (सेमी-ट्रकों) और खेतों में इस्तेमाल होने वाले ट्रकों (फार्म ट्रकों) का उपयोग करता था। यह सिंडिकेट ग्रेटर लॉस एंजिल्स क्षेत्र (जैसे लॉस एंजिल्स, वेस्ट कोविना, ओंटारियो, फोंटाना और पेरिस) से यह सप्लाई चलाता था।
 

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रविंदर सिंह ढांडा गैंग। - फोटो : अमर उजाला
अंतरराष्ट्रीय कार्टेल्स के साथ सांठगांठ
जांच में सामने आया है कि ढांडा का नेटवर्क अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के प्रमुख ड्रग माफियाओं और संगठनों के लिए अंतरराष्ट्रीय तस्करी की सेवाएं (लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट) प्रदान करता था। वह इन संगठनों के साथ तस्करी के रेट तय करता था। न्याय विभाग के अभियोग में इस गिरोह पर विशेष रूप से जुलाई 2023 से नवंबर 2024 के बीच 430.1 किलोग्राम कोकीन की तस्करी करने का चार्ज लगाया गया है।

इस आपराधिक सिंडिकेट को चलाने के लिए रविंदर सिंह ढांडा और उसके सहयोगियों पर आपराधिक गिरोह संचालित करने, नियंत्रित पदार्थों (ड्रग्स) को बांटने की साजिश रचने और उनके निर्यात के कई संघीय आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी जांच अधिकारियों के मुताबिक, अगर ढांडा पर दोष साबित हो जाता है, तो उसे कम से कम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
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