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Trump Politics: रूस पर दबाव के लिए अमेरिकी संसद में विधेयक, ईरान से क्या चाहते हैं ट्रंप, भारत पर कितना असर?
Sun, 19 Jul 2026 10:37 PM IST
Pavan
पीटीआई, वॉशिंगटन
पीटीआई, वॉशिंगटन
Published by: Pavan
Updated Sun, 19 Jul 2026 10:37 PM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों से रूस प्रतिबंध विधेयक में ईरान को भी शामिल करने की मांग की है। प्रस्तावित विधेयक में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। हालांकि, डेमोक्रेट सांसदों ने कहा कि दो साल की बातचीत के बाद तैयार इस विधेयक में फिलहाल कोई नया बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
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ईरान और रूस को लेकर ट्रंप की रणनीति पर नजरें
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों से रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक में ईरान को भी शामिल करने की मांग की है। यह विधेयक रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने का प्रावधान करता है। इनमें भारत भी शामिल है, क्योंकि वह रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है।
क्या है रूस प्रतिबंध विधेयक?
यह विधेयक रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अमेरिकी सीनेट में पेश किया है। इसे 100 सदस्यीय सीनेट में 60 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला है। इस विधेयक का उद्देश्य रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकना है। इसके तहत रूस के राजनीतिक नेतृत्व, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव है। साथ ही, रूस से तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रावधान किया गया है।
यह भी पढ़ें- US से क्यों नहीं डरता ईरान?: अराघची ने सुनाया किस्सा, जब विटकॉफ से पूछा था- कभी मौत के खौफ के बीच की है बातचीत
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ट्रंप ने ईरान को भी शामिल करने की मांग की
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि रिपब्लिकन सांसदों को इस विधेयक में ईरान को भी शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी यही चाहते थे और यह कदम उठाया जाना था। हालांकि, डेमोक्रेटिक पार्टी इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है।
डेमोक्रेट्स ने क्यों जताई आपत्ति?
डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह विधेयक लगभग दो वर्षों की लंबी बातचीत के बाद तैयार हुआ है। इसलिए इसमें नए मुद्दे जोड़ने के बजाय इसे मौजूदा स्वरूप में ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रपति ईरान पर अलग कानून लाना चाहते हैं तो उस पर अलग से विचार किया जा सकता है, लेकिन इस विधेयक में बदलाव उचित नहीं होगा।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
वर्तमान में रूस से सबसे अधिक कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। यदि यह विधेयक मौजूदा स्वरूप में पारित होता है तो रूस से तेल खरीदने वाले इन देशों से अमेरिका में आयात होने वाले उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि, रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ यूरोपीय देशों को इसमें छूट दी गई है। जिन देशों की रूसी गैस पर निर्भरता रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है और जो आयात कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें राहत मिलेगी।
भारत ने जून में रिकॉर्ड रूसी तेल खरीदा
ऊर्जा विश्लेषक संस्था केप्लर के अनुसार, जून में भारत का कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। इसमें से करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन तेल रूस से आया, जो भारत के कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा था। रूस इस समय भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
यह भी पढ़ें- West Asia Crisis: रूस प्रतिबंध विधेयक में ईरान को शामिल करना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप, भारत पर क्या पड़ेगा असर?
हर छह महीने होगी समीक्षा, कुछ क्षेत्रों को मिली छूट
इस विधेयक में यह भी प्रावधान है कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) हर 180 दिन में रूस से सबसे अधिक तेल या गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों की सूची की समीक्षा करेगा। जरूरत पड़ने पर टैरिफ दरों में बदलाव भी किया जा सकेगा। विधेयक में अमेरिका द्वारा रूस से परमाणु रिएक्टरों और चिकित्सा उपयोग के लिए यूरेनियम की खरीद तथा अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्र में अमेरिका-रूस सहयोग को इन प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है। अब यह देखना होगा कि अमेरिकी सीनेट इस विधेयक को किस रूप में मंजूरी देती है और ट्रंप की ईरान को इसमें शामिल करने की मांग पर क्या फैसला होता है।
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क्या है रूस प्रतिबंध विधेयक?
यह विधेयक रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अमेरिकी सीनेट में पेश किया है। इसे 100 सदस्यीय सीनेट में 60 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला है। इस विधेयक का उद्देश्य रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकना है। इसके तहत रूस के राजनीतिक नेतृत्व, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव है। साथ ही, रूस से तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रावधान किया गया है।
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ट्रंप ने ईरान को भी शामिल करने की मांग की
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि रिपब्लिकन सांसदों को इस विधेयक में ईरान को भी शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी यही चाहते थे और यह कदम उठाया जाना था। हालांकि, डेमोक्रेटिक पार्टी इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है।
डेमोक्रेट्स ने क्यों जताई आपत्ति?
डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह विधेयक लगभग दो वर्षों की लंबी बातचीत के बाद तैयार हुआ है। इसलिए इसमें नए मुद्दे जोड़ने के बजाय इसे मौजूदा स्वरूप में ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रपति ईरान पर अलग कानून लाना चाहते हैं तो उस पर अलग से विचार किया जा सकता है, लेकिन इस विधेयक में बदलाव उचित नहीं होगा।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
वर्तमान में रूस से सबसे अधिक कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। यदि यह विधेयक मौजूदा स्वरूप में पारित होता है तो रूस से तेल खरीदने वाले इन देशों से अमेरिका में आयात होने वाले उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि, रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ यूरोपीय देशों को इसमें छूट दी गई है। जिन देशों की रूसी गैस पर निर्भरता रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है और जो आयात कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें राहत मिलेगी।
भारत ने जून में रिकॉर्ड रूसी तेल खरीदा
ऊर्जा विश्लेषक संस्था केप्लर के अनुसार, जून में भारत का कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। इसमें से करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन तेल रूस से आया, जो भारत के कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा था। रूस इस समय भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
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हर छह महीने होगी समीक्षा, कुछ क्षेत्रों को मिली छूट
इस विधेयक में यह भी प्रावधान है कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) हर 180 दिन में रूस से सबसे अधिक तेल या गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों की सूची की समीक्षा करेगा। जरूरत पड़ने पर टैरिफ दरों में बदलाव भी किया जा सकेगा। विधेयक में अमेरिका द्वारा रूस से परमाणु रिएक्टरों और चिकित्सा उपयोग के लिए यूरेनियम की खरीद तथा अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्र में अमेरिका-रूस सहयोग को इन प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है। अब यह देखना होगा कि अमेरिकी सीनेट इस विधेयक को किस रूप में मंजूरी देती है और ट्रंप की ईरान को इसमें शामिल करने की मांग पर क्या फैसला होता है।