Sri Lanka: श्रीलंका में रोमांचक मोड़ लेगा राष्ट्रपति चुनाव, विक्रमसिंघे-राजपक्षे के बीच हो सकती है चुनावी जंग
Sri Lanka: अगर रानिल विक्रमसिंघे इस बार के राष्ट्रपति चुनाव में दावेदारी पेश करते हैं, तो उन्हें अपनी ही कैबिनेट के साथी रहे विजयदासा राजपक्षे से चुनौती मिल सकती है।
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श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव नजदीक आ रहा है और इसे लेकर राजनीति में अभी से हलचल देखने को मिल रही है। इस बीच खबर है कि राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे भी चुनाव में पुनर्निवाचन के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। अगर विक्रमसिंघे अपनी दावेदारी पेश करते हैं, तो उन्हें अपनी ही कैबिनेट के साथी रहे विजयदासा राजपक्षे से चुनौती मिल सकती है। बता दें कि राजपक्षे वर्तमान में श्रीलंका के कानून मंत्री का पद संभाल रहे हैं।
पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने क्या कहा?
श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना का कहना है कि 65 साल के विजयदासा राजपक्षे 15 नवंबर से पहले होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उनकी पार्टी के उम्मीदवार होंगे। सिरिसेना ने कहा कि एसएलएफपी के लिए राजपक्षे एक उपयुक्त प्रत्याशी हैं।
एसएलपीपी के सदस्य रह चुके हैं राजपक्षे
इससे पहले राजपक्षे श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) पार्टी के सदस्य रह चुके हैं, जो कि अब टूट चुकी है। इस पार्टी में महिंदा राजपक्षे के प्रति वफादार यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम अलायंस के नेताओं का जमावड़ा था। एसएलपीपी के नेताओं के एक टीम की अगुवाई 75 वर्षीय विक्रमसिंघे कर रहे हैं। इसके अलावा पार्टी के दूसरे सदस्य विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा के नेतृत्व वाले राजनीतिक गठबंधन समागी जना बालवेगया (एसजेबी) के साथ जुड़े हुए हैं। यहां खास बात यह भी है कि एसएलपीपी द्वारा इस बार के चुनावों में उम्मीदवार खड़ा करने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। दरअसल 2022 में पार्टी का बड़े पैमाने पर विरोध किया गया था, जब श्रीलंका में आर्थिक संकट के लिए प्रदर्शनकारियों ने राजपक्षे परिवार को दोषी ठहराया था।
रानिल विक्रमसिंघे को इस बात की उम्मीद
उधर विक्रमसिंघे ने भी अभी अपनी उम्मीदवारी की घोषणा नहीं की है, हालांकि देश को दिवालियापन से बाहर निकालने के लिए वह पुनर्निर्वाचन के लिए क्रॉस-पार्टी समर्थन पर भरोसा कर रहे हैं। उधर मुख्य विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा और मार्क्सवादी जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) पार्टी के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके पहले ही अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर चुके हैं
बता दें कि सिरिसेना की पार्टी एसएलएफपी अप्रैल की शुरुआत से ही अव्यवस्थित नजर आ रही है। इस दौरान उन्होंने राजपक्षे को पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में नामित किया था लेकिन अदालत के आदेश से सिरिसेना पर नेता के रूप में प्रतिबंध लगा दिया गया। इतना ही नहीं, अदालत ने राजपक्षे को भी काम करने से रोकने आदेश दिया है। कुल मिलाकर देखा जाए तो सिरिसेना और पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के नेतृत्व वाले दो गुट गंभीर कानूनी पचड़े में उलझे हुए हैं।