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स्पेशल सिचुएशन इन्वेस्टिंग: क्या बाजार के संकट में छिपे हैं मुनाफे के अवसर, फंड की रिटर्न के बारे में जानिए

Media Solutions Initiative Published by: मार्केटिंग डेस्क Updated Tue, 27 Jan 2026 02:18 PM IST
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मंजू जिंदल - फोटो : Manju Jindal
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शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अनुभवी निवेशकों के लिए अस्थिरता का दौर अक्सर संपत्ति निर्माण का सबसे बड़ा अवसर लेकर आता है। हालिया रिपोर्टों और बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 'स्पेशल सिचुएशन इन्वेस्टिंग' (विशेष परिस्थितियों में निवेश) की रणनीति ने पिछले एक दशक में निवेशकों को बाजार की चुनौतियों के बीच भी मजबूत रिटर्न दिया है। 

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संकट बना अवसर 
ऐतिहासिक परिदृश्य पिछले 10 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट सेक्टर ने कई अस्थायी व्यवधान देखे हैं। एनालिस्ट्स के अनुसार, 2016 की चीन और कमोडिटी मंदी, एनबीएफसी संकट, और 2019 में धीमी जीडीपी वृद्धि जैसे कारकों ने बाजार को हिलाकर रख दिया था। इसके अलावा, 2022 में उच्च मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में बढ़ोतरी, आपूर्ति पक्ष की समस्याएं, और 2023 में अमेरिकी बैंकों के पतन व इजरायल-हमास संघर्ष ने भी बाजार में भारी गिरावट पैदा की। 
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रिपोर्ट बताती है कि एक अमेरिकी शॉर्ट सेलर द्वारा भारतीय समूह पर रिपोर्ट (अदाणी प्रकरण का संदर्भ) और सरकारी नियमों में बदलाव जैसी 'स्पेशल सिचुएशन' ने भी बाजार में उथल-पुथल मचाई। हालांकि, जब बाजार ने इन घटनाओं के असर को झेल लिया, तो स्मार्ट निवेशकों के लिए कम कीमत पर खरीदारी के अवसर मिले। 

निवेश का गणित  
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी विशेष स्थितियां कुछ शेयरों और सेक्टरों में तेज गिरावट का कारण बनती हैं। निवेश का मूल मंत्र यह है कि यदि किसी शेयर के मूल्यांकन में गिरावट उसकी कमाई और डिविडेंड पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव से कहीं अधिक है, तो वह लंबी अवधि के लिए एक बेहतरीन 'बाय' हो सकता है। 

हालांकि, इस रणनीति के लिए 'स्मार्ट बॉटम-अप स्टॉक पिकिंग' और गहन शोध की आवश्यकता होती है। यह पोर्टफोलियो किसी विशिष्ट मार्केट कैप या सेक्टर तक सीमित न रहकर केंद्रित हो सकता है। 

जिंदल इन्वेस्टमेंट्स की सीएफपी और सीईओ मंजू जिंदल के अनुसार, ऐसी जटिल परिस्थितियों में सही अवसरों की पहचान करना कठिन होता है, क्योंकि इसके लिए समय और संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे में, म्यूचुअल फंड का रास्ता अपनाना एक सुरक्षित और संरचित विकल्प माना गया है। 

फंड का प्रदर्शन कैसा रहा है? 
इस रणनीति की सफलता के प्रमाण के रूप में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड के आंकड़े सामने आए हैं।  

 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक: 

  • फंड ने पिछले 5 वर्षों में 27.23% सीएजीआर का रिटर्न दिया है। 
  • तीन साल का CAGR 23.14% रहा है। 
  • जनवरी 2019 में अपनी स्थापना के बाद से फंड ने 21.02% का सालाना रिटर्न दिया है. 

मंजू जिंदल के अनुसार, बाजार की अनिश्चितता को जोखिम मानने के बजाय, 'स्पेशल सिचुएशन इन्वेस्टिंग' उसे एक अवसर के रूप देखा जाना चाहिए। हालांकि, सीधे निवेश में जोखिम को देखते हुए, विशेषज्ञों की सलाह है कि खुदरा निवेशक म्यूचुअल फंड्स के जरिए इन मौकों का लाभ उठाएं।

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