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Chandraghanta Mata: नवरात्रि का तीसरा दिन आज, पढ़ें मां चंद्रघंटा से जुड़ी पौराणिक कथा

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Megha Kumari Updated Sat, 21 Mar 2026 07:15 AM IST
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सार

Chandraghanta Mata Vrat Katha: आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है, जिसमें मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। आइए देवी से जुड़ी पौराणिक कथा को जानते हैं।
 

chaitra Navratri 2026 day 3 chandraghanta mata vrat katha in hindi
Chandraghanta Mata Vrat Katha - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

Chandraghanta Mata Vrat Katha: नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप का पूजन किया जाता है। इस दिन देवी की पूजा-अर्चना करने से साधक को विशेष फलों की प्राप्ति होती हैं। शास्त्रों के मुताबिक, देवी के मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटा सुशोभित होती है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। यदि देवी को खीर या शहद का भोग लगाया जाए, तो भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती हैं। साथ ही जीवन में सुख, शांति और साहस का संचार होता है। हालांकि, देवी से जुड़ी पौराणिक कथा का पाठ करने पर वह शीघ्र प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं। ऐसे में आइए इस कथा को जानते हैं।

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मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा

नवरात्रि के तीसरे दिन विधि-विधान से मां चंद्रघंटा की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि, जब असुरों का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया और देवताओं पर संकट मंडराने लगा, तब देवी ने चंद्रघंटा का स्वरूप लिया था। कहते हैं कि, उस समय महिषासुर और देवताओं के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था। देवताओं की पीड़ा-दुख को सुनकर त्रिदेव क्रोधित हो उठे। इसके बाद उनके तेज और ऊर्जा से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिसे मां चंद्रघंटा के रूप में जाना जाता है। इसके बाद देवी को देवताओं ने विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और सिंह वाहन प्रदान किया। इन दिव्य शक्तियों से सुसज्जित होकर मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का संहार किया था। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की उपासना से साधक को अद्भुत आत्मबल और निर्भयता प्राप्त करती हैं। 


देवी पूजन मंत्र 

1. "या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।"

2. "पिंडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।"



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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