Navratri Day 6: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित, जानिए व्रत कथा
Navratri Day 6 Maa katyayani: मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
विस्तार
Navratri Day 6 Maa katyayani: आज चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है। इस तिथि पर मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि, यह दिन शक्ति, साहस और धर्म की विजय का प्रतीक है। इस विशेष अवसर पर देवी कात्यायिनी की उपासना से साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं। साथ ही जीवन में बदलाव महसूस होते हैं और साधक को मानसिक शांति, आत्मबल और इच्छित फल की प्राप्ति होती हैं। कहते हैं कि, देवी के बाएं हाथ में कमल और तलवार होती है, जबकि दाहिने हाथ आशीर्वाद और स्वास्तिक मुद्रा से सुशोभित होता है। देवी को शहद अति प्रिय है। इस दिन उन्हें इसका भोग लगाने से लंबे समय से अटके काम पूरे होते हैं। साथ ही मां कात्यायिनी की कथा का पाठ करना भी लाभकारी माना गया है। ऐसे में आइए इस कथा को जानते हैं।
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देवी मां कात्यायिनी की कथा
देवी मां कात्यायिनी की कथा को लेकर ऐसा कहा जाता है कि, प्राचीन समय की बात है, जब कत नाम के एक महर्षि हुआ करते थे। महार्षि का पुत्र भी था, जिसका नाम कात्य था। उसी वंश में आगे चलकर महर्षि कात्यायन का जन्म हुआ। ऐसा माना जाता है कि, महर्षि कात्यायन की कोई संतान नहीं थी। इसलिए उन्होंने देवी भगवती को प्रसन्न करने के लिए कठोर से कठोर तपस्या की थी। महर्षि कात्यायन की भक्ति से देवी प्रसन्न हो गई। उन्होंने महर्षि कात्यायन को वरदान दिया कि, वे उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी। फिर इसी काल में महिषासुर नाम का एक दैत्य ने तीनों लोकों में अत्याचार मचाया हुआ था। इस कारण सभी देवी-देवता भी भयभीत हो गए थे। महिषासुर को रोकने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने देवी को उत्पन्न किया। माना जाता है कि, देवी महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुई। इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा था। इसके बाद मां कात्यायनी ने महिषासुर का संहार कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया। माना जाता है कि, देवी की पूजा करने से व्यक्ति को सभी तरह के दुखों से मुक्ति मिलती हैं। साथ ही सभी तरह के डर-भय समाप्त होते हैं।
पूजन मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानवघातिनि।।
मां कात्यायनी की आरती
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की।
झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
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