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Vastu Tips: घर का मुख्य कैसा होना चाहिए ? जानिए साफ-सफाई से लेकर दिशा तक सबकुछ
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 21 Feb 2026 12:48 PM IST
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सार
Vastu Tips: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की सुख-समृद्धि और शांति का संबंध घर के मुख्य द्वार से होता है। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार किस दिशा में होना चाहिए घर का मुख्य द्वार
वास्तु में मुख्य द्वार के आसपास स्वच्छता को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
Vastu Tips: घर का मुख्य द्वार केवल आने-जाने का मार्ग नहीं, बल्कि पूरे घर की ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की ऊर्जा सबसे पहले एंट्रेंस से ही घर में प्रवेश करती है। इसलिए यदि मुख्य द्वार संतुलित, स्वच्छ और आकर्षक हो, तो घर में सुख, शांति और समृद्धि का प्रवाह बना रहता है।
स्वच्छता और प्रकाश का रखें विशेष ध्यान
वास्तु में मुख्य द्वार के आसपास स्वच्छता को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। प्रवेश स्थान पर धूल, कचरा, टूटे सामान या जूते-चप्पलों का ढेर न रखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा रुक जाती है। द्वार पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। शाम के समय दोनों ओर दीपक या आकर्षक लाइट लगाने से वातावरण पवित्र और आमंत्रित करने वाला बनता है। हल्की पीली या गर्म रोशनी सौम्यता और अपनापन बढ़ाती है, जिससे घर में प्रवेश करते ही सुकून का अनुभव होता है।
शुभ चिह्न और तोरण का महत्व
मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, ॐ या शुभ-लाभ जैसे मंगलकारी चिह्न बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। आम, अशोक या केले के पत्तों का तोरण सकारात्मक स्पंदन को आकर्षित करता है। त्योहारों या विशेष अवसरों पर रंगोली बनाना भी शुभ फलदायी होता है। रंगोली के प्राकृतिक और सौम्य रंग घर के वातावरण को प्रसन्न और उत्साहपूर्ण बनाते हैं।
द्वार का रंग और डिजाइन
वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार मजबूत और सुदृढ़ होना चाहिए। लकड़ी का दरवाजा शुभ और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है। दिशा के अनुसार रंग चुनना भी लाभकारी होता है—पूर्व दिशा में हल्का हरा या भूरा, उत्तर में हल्का नीला, दक्षिण में गहरा भूरा और पश्चिम में क्रीम या सफेद रंग शुभ माना गया है। आकर्षक और साफ-सुथरी नेमप्लेट प्रतिष्ठा और सकारात्मक पहचान का प्रतीक होती है।
मुख्य द्वार के पास हरियाली सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। तुलसी, मनी प्लांट या अन्य छोटे सजावटी पौधे प्रवेश स्थान को जीवंत बनाते हैं। आजकल मौसम में खूब फुलवारी आ रही है, ऐसे में आप छोटे-छोटे सुंदर गमलों में ताजी और कच्ची फुलवारी लगाकर अपने घर के एंट्रेंस को और भी मनमोहक बना सकते हैं। रंग-बिरंगे फूल न केवल सौंदर्य बढ़ाते हैं, बल्कि मन को भी प्रसन्न करते हैं। यदि जगह कम हो तो दीवार पर हैंगिंग पॉट्स या सीढ़ियों के पास सजे गमले भी रखे जा सकते हैं। साथ ही, हल्की प्राकृतिक सुगंध जैसे चंदन, गुलाब या मोगरा की खुशबू वातावरण को पवित्र और सकारात्मक बनाए रखती है।
वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार अंदर की ओर खुलना चाहिए, जिससे ऊर्जा का प्रवाह सहज रूप से घर में प्रवेश करे। दरवाजा खुलते समय किसी प्रकार की आवाज या रुकावट नहीं होनी चाहिए। चरमराहट या अटकने की समस्या जीवन में बाधाओं का संकेत मानी जाती है, इसलिए इसे तुरंत ठीक कराना चाहिए। जब मुख्य द्वार स्वच्छ, सुव्यवस्थित, सुगंधित और हरियाली से सुसज्जित होता है, तो वहां से प्रवेश करने वाली ऊर्जा भी सकारात्मक और मंगलकारी होती है। ऐसे छोटे-छोटे उपाय घर के वातावरण को सौंदर्य, शांति और समृद्धि से भर देते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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स्वच्छता और प्रकाश का रखें विशेष ध्यान
वास्तु में मुख्य द्वार के आसपास स्वच्छता को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। प्रवेश स्थान पर धूल, कचरा, टूटे सामान या जूते-चप्पलों का ढेर न रखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा रुक जाती है। द्वार पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। शाम के समय दोनों ओर दीपक या आकर्षक लाइट लगाने से वातावरण पवित्र और आमंत्रित करने वाला बनता है। हल्की पीली या गर्म रोशनी सौम्यता और अपनापन बढ़ाती है, जिससे घर में प्रवेश करते ही सुकून का अनुभव होता है।
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शुभ चिह्न और तोरण का महत्व
मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, ॐ या शुभ-लाभ जैसे मंगलकारी चिह्न बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। आम, अशोक या केले के पत्तों का तोरण सकारात्मक स्पंदन को आकर्षित करता है। त्योहारों या विशेष अवसरों पर रंगोली बनाना भी शुभ फलदायी होता है। रंगोली के प्राकृतिक और सौम्य रंग घर के वातावरण को प्रसन्न और उत्साहपूर्ण बनाते हैं।
द्वार का रंग और डिजाइन
वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार मजबूत और सुदृढ़ होना चाहिए। लकड़ी का दरवाजा शुभ और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है। दिशा के अनुसार रंग चुनना भी लाभकारी होता है—पूर्व दिशा में हल्का हरा या भूरा, उत्तर में हल्का नीला, दक्षिण में गहरा भूरा और पश्चिम में क्रीम या सफेद रंग शुभ माना गया है। आकर्षक और साफ-सुथरी नेमप्लेट प्रतिष्ठा और सकारात्मक पहचान का प्रतीक होती है।
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सुगंध और हरियाली से बढ़ाएं सकारात्मकतामुख्य द्वार के पास हरियाली सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। तुलसी, मनी प्लांट या अन्य छोटे सजावटी पौधे प्रवेश स्थान को जीवंत बनाते हैं। आजकल मौसम में खूब फुलवारी आ रही है, ऐसे में आप छोटे-छोटे सुंदर गमलों में ताजी और कच्ची फुलवारी लगाकर अपने घर के एंट्रेंस को और भी मनमोहक बना सकते हैं। रंग-बिरंगे फूल न केवल सौंदर्य बढ़ाते हैं, बल्कि मन को भी प्रसन्न करते हैं। यदि जगह कम हो तो दीवार पर हैंगिंग पॉट्स या सीढ़ियों के पास सजे गमले भी रखे जा सकते हैं। साथ ही, हल्की प्राकृतिक सुगंध जैसे चंदन, गुलाब या मोगरा की खुशबू वातावरण को पवित्र और सकारात्मक बनाए रखती है।
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दरवाजे की दिशा और खुलने का तरीकावास्तु के अनुसार मुख्य द्वार अंदर की ओर खुलना चाहिए, जिससे ऊर्जा का प्रवाह सहज रूप से घर में प्रवेश करे। दरवाजा खुलते समय किसी प्रकार की आवाज या रुकावट नहीं होनी चाहिए। चरमराहट या अटकने की समस्या जीवन में बाधाओं का संकेत मानी जाती है, इसलिए इसे तुरंत ठीक कराना चाहिए। जब मुख्य द्वार स्वच्छ, सुव्यवस्थित, सुगंधित और हरियाली से सुसज्जित होता है, तो वहां से प्रवेश करने वाली ऊर्जा भी सकारात्मक और मंगलकारी होती है। ऐसे छोटे-छोटे उपाय घर के वातावरण को सौंदर्य, शांति और समृद्धि से भर देते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।