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Andhra EV Policy 4.0: आंध्र के इन पांच शहरों को बनाया जाएगा 'ई-मोबिलिटी मॉडल सिटी', ₹250 करोड़ का बजट मंजूर

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 02 May 2026 04:26 PM IST
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सार

आंध्र प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में पांच मॉडल ई-मोबिलिटी शहरों को अधिसूचित करके, आंध्र प्रदेश सतत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी नीति (4.0) 2024-29 को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है

Andhra Pradesh EV Policy 4.0: 5 Model E-Mobility Cities Notified with ₹250 Crore Fund
Electric Car Charging - फोटो : Freepik
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विस्तार

आंध्र प्रदेश सरकार ने 'आंध्र प्रदेश सस्टेनेबल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पॉलिसी 4.0 (2024-29)' को लागू करते हुए राज्य के पांच शहरों को 'मॉडल ई-मोबिलिटी सिटी' के रूप में अधिसूचित किया है। राज्य के नगर निगम मंत्री पी.जी. नारायण ने कहा कि सरकार भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहरी बुनियादी ढांचे और टिकाऊ गतिशीलता प्रणालियों के माध्यम से 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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नगर प्रशासन एवं शहरी विकास विभाग द्वारा G.O.Rt. संख्या 499 के माध्यम से जारी किए गए ये आदेश, शहरी स्थानीय निकायों में कार्यान्वयन हेतु 'परिचालन ढांचे' और 'रणनीतिक रोडमैप' को अनुमोदित करते हैं। 

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अधिकारियों ने इस कदम को एक टिकाऊ, प्रौद्योगिकी-संचालित और भविष्य के लिए तैयार शहरी मोबिलिटी इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

कौन से हैं वे पांच मॉडल ई-मोबिलिटी शहर?

नीति के तहत अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले निम्नलिखित पांच शहरों का चयन किया गया है:

  • विशाखापत्तनम: यहां ग्रीन टूरिज्म मोबिलिटी (हरित पर्यटन) पर ध्यान दिया जाएगा।

  • विजयवाड़ा: यहां लॉजिस्टिक्स-केंद्रित ईवी बुनियादी ढांचे का विकास होगा।

  • राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी): यहां नदी परिवहन के विद्युतीकरण पर जोर दिया जाएगा।

  • नेल्लोर: यहां मत्स्य पालन लॉजिस्टिक्स (Fisheries Logistics) पर ध्यान केंद्रित होगा।

  • तिरुपति: यहां तीर्थयात्रियों की आवाजाही (Pilgrim Mobility) के लिए ईवी सिस्टम विकसित होगा।

 

EV बुनियादी ढांचे के लिए क्या है सरकार की योजना?

इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के लिए नीति में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं:

  • चार्जिंग स्टेशन: शहरों के भीतर हर 3x3 किलोमीटर के ग्रिड में एक चार्जिंग स्टेशन और शहरों के बीच ग्रीन कॉरिडोर व राजमार्गों पर हर 30 किलोमीटर पर एक स्टेशन बनाया जाएगा।

  • मुख्य सुविधाएं: इसमें बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, ग्रीन रूट, जीरो एमिशन जोन और एकीकृत शहरी गतिशीलता प्रणाली का विकास शामिल है।

  • रिन्यूएबल एनर्जी: योजना में नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और स्मार्ट शहरी गतिशीलता योजना को भी प्राथमिकता दी गई है।

 

परियोजना के लिए कितना बजट आवंटित किया गया है?

सरकार ने इस नीति के तहत 250 करोड़ रुपये का एक समर्पित कॉर्पस फंड प्रस्तावित किया है:

  • प्रत्येक अधिसूचित शहर के लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

  • यह राशि बुनियादी ढांचे के विकास और ईवी अपनाने की पहल का समर्थन करने के लिए उपयोग की जाएगी।

 

इस नीति का व्यापक प्रभाव क्या होगा?

प्रमुख सचिव एस. सुरेश कुमार और मंत्री नारायण ने इस पहल के दूरगामी लाभों पर प्रकाश डाला है:

  • आर्थिक लाभ: यह पहल ईवी विनिर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी तकनीक जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करेगी, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

  • पर्यावरण: यह कदम परिवहन दक्षता में सुधार करेगा, प्रदूषण कम करेगा और राज्य के दीर्घकालिक 'कार्बन न्यूट्रलिटी' विजन में मदद करेगा।

  • मानकीकरण: यह ढांचा केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों जैसे पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना और बिजली मंत्रालय के ईवी मानदंडों के अनुरूप है।

 

भविष्य के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं?

अधिकारियों को इस ढांचे को चरणों में लागू करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, भवन नियमों में बदलाव करने की योजना है ताकि निर्माण मानकों में अनिवार्य ईवी चार्जिंग प्रावधानों को शामिल किया जा सके। यह अधिसूचना राज्य के सतत शहरी परिवर्तन के लिए एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 

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