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कार टिप्स: गाड़ी खरीदने जा रहे हैं? तो माइलेज और फीचर्स के साथ क्यों जरूरी है ग्राउंड क्लीयरेंस, जानें सब कुछ

Sun, 30 Aug 2026 03:00 PM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Sun, 30 Aug 2026 03:00 PM IST
सार

नई कार खरीदते समय अक्सर लोग माइलेज, इंजन और स्क्रीन जैसे फीचर्स पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन ग्राउंड क्लीयरेंस को अनदेखा कर देते हैं। भारतीय सड़कों पर मौजूद ऊंचे स्पीड ब्रेकर्स, गड्ढों और जलभराव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सही ग्राउंड क्लीयरेंस बेहद जरूरी है। क्या आप जानते हैं कि भारतीय सड़कों के हिसाब से कितना ग्राउंड क्लीयरेंस सही माना जाता है और सिर्फ नंबर देखकर फैसला लेना भारी पड़ सकता है?  
 

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Car Ground Clearance, Why Matters Indian Roads Before Buying New Car
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

कार के सबसे निचले हिस्से और सड़क के बीच की दूरी को ग्राउंड क्लीयरेंस कहा जाता है। अगर कार का ग्राउंड क्लीयरेंस ज्यादा है तो ऊंचे स्पीड ब्रेकर, गड्ढों या खराब रास्तों पर कार के नीचे का हिस्सा जमीन से टकराने की संभावना कम हो जाती है।

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वहीं, अगर आपकी कार का ग्राउंड क्लीयरेंस कम है, तो ऐसी कार को ऐसे रास्तों पर ज्यादा सावधानी से चलाना पड़ता है। बार-बार नीचे से टकराने पर कार के निचले हिस्से के कुछ पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है और मरम्मत का खर्च भी बढ़ सकता है।
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भारतीय सड़कों के लिए कितना ग्राउंड क्लीयरेंस सही माना जाता है?

  • एक्सपर्ट्स की मानें तो रोजमर्रा की खराब या असमान सड़कों के लिए 170 से 200 मिलीमीटर का ग्राउंड क्लीयरेंस अच्छा माना जाता है।
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  • आमतौर पर सेडान कारों का ग्राउंड क्लीयरेंस एसयूवी और कॉम्पैक्ट एसयूवी की तुलना में कम होता है। यही वजह है कि गांवों, छोटे शहरों और खराब सड़कों वाले इलाकों में ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस वाली कारें ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती हैं।
  • हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कम ग्राउंड क्लीयरेंस वाली कार खराब है। इसका चुनाव आपके इस्तेमाल और सड़क की स्थिति पर निर्भर करता है।


सिर्फ ग्राउंड क्लीयरेंस का नंबर न देखें
कार खरीदते समय सिर्फ कंपनी की ओर से बताए गए ग्राउंड क्लीयरेंस के आंकड़े को देखकर फैसला करना सही नहीं है। कार खराब सड़क पर कैसी चलेगी, इसमें कई दूसरी चीजों की भी भूमिका होती है, जैसे सस्पेंशन सेटिंग, टायर का साइज, व्हीलबेस और कार का आगे और पीछे का डिजाइन शामिल है। इसलिए दो कारों का ग्राउंड क्लीयरेंस समान होने के बावजूद गड्ढे या स्पीड ब्रेकर पार करते समय दोनों का व्यवहार अलग हो सकता है।



गांव और खराब सड़कों पर क्यों ज्यादा जरूरी?

  • अगर आपकी कार का इस्तेमाल ऐसे इलाकों में ज्यादा होता है जहां सड़कें टूटी हुई हैं, बड़े गड्ढे हैं या ऊंचे स्पीड ब्रेकर हैं, तो अच्छा ग्राउंड क्लीयरेंस काफी उपयोगी हो सकता है।
  • इससे कार के नीचे का हिस्सा जमीन से टकराने का जोखिम कम होता है। यह फायदा सिर्फ बड़ी एसयूवी तक सीमित नहीं है। छोटी कार खरीदते समय भी अगर आपका रास्ता खराब है तो ग्राउंड क्लीयरेंस को ध्यान में रखना चाहिए।


कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव जरूर करें

  • कार के स्पेसिफिकेशन देखने के बाद सीधे बुकिंग करने के बजाय टेस्ट ड्राइव जरूर लें। कोशिश करें कि कार को अलग-अलग तरह की सड़कों पर चलाकर देखें।
  • स्पीड ब्रेकर, हल्के गड्ढे और खराब सड़क पर कार के सस्पेंशन और नीचे के हिस्से का व्यवहार समझें।
  • आखिरकार सबसे अच्छी कार वही है जो आपके इलाके की सड़कों और आपके इस्तेमाल के हिसाब से सही बैठे। इसलिए नई कार चुनते समय माइलेज, कीमत और फीचर्स के साथ ग्राउंड क्लीयरेंस को भी अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें।
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