Delhi Pollution: प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती की तैयारी, ऑफिस टाइमिंग में बदलाव और ANPR सिस्टम पर जोर
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाने का संकेत दिया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान के लिए कदम उठाने पर जोर दिया।
विस्तार
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए कई अहम सुझाव दिए। बैठक के दौरान उठाए गए मुख्य कदम और निर्देश इस प्रकार हैं।
1. वाहनों और ट्रैफिक पर नकेल
पर्यावरण मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए तत्काल समाधान के बजाय लंबी अवधि की नीतियों की जरूरत है। वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए इन उपायों पर चर्चा हुई।
ANPR सिस्टम: दिल्ली की सीमाओं (बॉर्डर एंट्री पॉइंट्स) पर 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' (ANPR) सिस्टम लगाए जाएंगे ताकि प्रदूषण फैलाने वाले या प्रतिबंधित वाहनों की पहचान तुरंत हो सके।
ऑफिस टाइमिंग में बदलाव: पीक आवर्स (व्यस्त घंटो) के दौरान सड़कों पर भीड़ कम करने के लिए दफ्तरों के समय में बदलाव की संभावना तलाशने का निर्देश दिया गया है। इसका मतलब है कि सभी दफ्तर एक ही समय पर खुलने या बंद होने के बजाय अलग-अलग समय पर काम कर सकते हैं।
स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट: दिल्ली में 62 ऐसे 'कंजेशन हॉटस्पॉट्स' (ज्यादा जाम वाले इलाके) की पहचान की गई है, जहां ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट की सख्त जरूरत है।
ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) को बढ़ावा: इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने और एनसीआर के लिए एक समान वाहन पंजीकरण नीति बनाने पर भी जोर दिया गया।
2. औद्योगिक प्रदूषण पर कार्रवाई
समीक्षा बैठक में उद्योगों से होने वाले प्रदूषण के आंकड़ों पर भी गौर किया गया। एनसीआर के 240 औद्योगिक एस्टेट्स में से 227 पहले ही पीएनजी यानी क्लीन फ्यूल पर शिफ्ट हो चुके हैं। हालांकि औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर अवैध रूप से चल रही फैक्ट्रियों पर चिंता जताई गई। मंत्री ने निर्देश दिया कि ऐसी अवैध इकाइयों को सील किया जाए।
23 जनवरी से सख्त एक्शन: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने उन 88 इकाइयों को नोटिस जारी किया है जिन्होंने अभी तक 'ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम' (OCEMS) नहीं लगाया है। इन इकाइयों के खिलाफ 23 जनवरी से बंद करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
3. निर्माण कार्यों पर नजर
निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन पर भी जोर दिया गया। यह तय किया गया कि जब प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा होगा, तब तोड़-फोड़ वाली गतिविधियों को रोका जाएगा और कचरे के वैज्ञानिक निपटारे के लिए रिसाइकिलर एसोसिएशन के साथ भागीदारी की जाएगी। भूपेंद्र यादव ने कहा कि एनसीआर में वायु प्रदूषण इंसानी गतिविधियों और मौसम दोनों के कारण होता है। इन उपायों की सफलता के लिए जनता की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव बेहद जरूरी है।