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Hindi News ›   Automobiles News ›   Does E20 Fuel Reduce Mileage or Impact Engines? Govt Clarifies in Parliament

E20: क्या ई20 ईंधन से घटता है माइलेज और खराब होता है इंजन? संसद में सरकार ने दिया जवाब, शोध में मिली जानकारी

Sat, 08 Aug 2026 10:19 AM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 08 Aug 2026 10:19 AM IST
सार

ई20 ईंधन को लेकर पिछले कुछ महीनों से चल रही बहस आखिरकार संसद तक पहुंच गई। कई वाहन चालकों ने दावा किया कि इस ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज घटता है, जबकि कुछ ने इंजन को नुकसान होने की आशंका जताई। इन सभी चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट जवाब देते हुए ई20 पेट्रोल की सुरक्षा और प्रदर्शन पर अपनी स्थिति साफ की।

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Does E20 Fuel Reduce Mileage or Impact Engines? Govt Clarifies in Parliament
E20 Petrol - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पिछले कुछ महीनों से इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर देश भर के वाहन चालकों के बीच तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं। सोशल मीडिया पर कई वाहन मालिकों ने दावा किया था कि ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और इंजन के पार्ट्स खराब होने का खतरा है।

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जनता की इन्हीं चिंताओं और विवाद के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद में स्थिति साफ की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने स्पष्ट किया कि सरकारी एजेंसियों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं और उद्योग निकायों द्वारा किए गए लैब और फील्ड परीक्षणों में यह साबित हुआ है कि निर्धारित मानकों के तहत ई20 पेट्रोल पूरी तरह से सुरक्षित है। 

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NITI Aayog और शोध संस्थाओं की जाँच रिपोर्ट में क्या बातें सामने आई हैं?

संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण के असर और वाहन अनुकूलता की जांच के लिए 26 दिसंबर 2020 को नीति आयोग (NITI Aayog) के तहत एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने देश की प्रमुख अनुसंधान संस्थाओं के अध्ययनों का विश्लेषण किया:

  • प्रमुख शोध संस्थाएं:
    इस मूल्यांकन में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के अध्ययन शामिल थे।

  • इंजन सुरक्षा:
    रिपोर्ट के अनुसार, निर्धारित सीमाओं के भीतर इथेनॉल-मिश्रित ईंधन का उपयोग करने से वाहनों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।

  • पुराने वाहनों पर असर:
    अध्ययन में पाया गया कि निर्दिष्ट परिचालन स्थितियों के तहत पुराने वाहनों के प्रदर्शन, टिकाऊपन या उनके पार्ट्स पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। 

E20 ईंधन को बाजार में उतारने से पहले किन-किन पैमानों पर परखा गया था?

मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि E20 फ्यूल को ऐसे ही बाजार में नहीं लाया गया है, बल्कि इसे व्यापक और कड़े परीक्षणों के बाद ही पेश किया गया था:

  • फ्यूल सिस्टम की मजबूती: ईंधन प्रणाली के प्रवाह और दबाव की गहन जांच की गई।

  • इंजन स्ट्रेंथ: इंजन पर पड़ने वाले दबाव और उसकी सहनक्षमता को परखा गया।

  • ड्राइविंग क्षमता: हर तरह के रास्तों और स्थितियों में वाहन चलाने की क्षमता का परीक्षण हुआ।

  • मटीरियल कम्पैटिबिलिटी: ईंधन के संपर्क में आने वाले रबर, प्लास्टिक और धातु के पुर्जों पर इसके असर को देखा गया।

  • उत्सर्जन प्रदर्शन: इससे निकलने वाले धुएं और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया गया।

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आखिर क्या है E20 फ्यूल विवाद और सरकार इसे क्यों दे रही है बढ़ावा?

भारत सरकार कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है।

  • E20 का गणित:
    E20 पेट्रोल में 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल का मिश्रण होता है। इस इथेनॉल का निर्माण मुख्य रूप से गन्ने, चावल और मक्के जैसे अनाजों से किया जाता है।

  • विवाद की वजह:
    बीते दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वाहन मालिकों ने शिकायत की थी कि E20 ईंधन से उनकी गाड़ियों की ईंधन खपत बढ़ गई है यानी माइलेज कम गया है और वाहन के स्पेयर पार्ट्स को नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि, सरकार ने अब संसद में आधिकारिक आंकड़े और टेस्ट रिपोर्ट पेश कर इन सभी दावों को खारिज कर दिया है।

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