Electric Bus: भारत में इलेक्ट्रिक बसों की बिक्री की रफ्तार हुई तेज! FY26 में 4,000 से ज्यादा ई-बसें बिकीं
भारत के पब्लिक बस बेड़े का इलेक्ट्रिफिकेशन जोर पकड़ रहा है। FY26 में अब तक कुल बस बिक्री में इलेक्ट्रिक बसों का हिस्सा 4.5 प्रतिशत है, जो FY25 में 3.5 प्रतिशत था।
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भारत में सार्वजनिक परिवहन का विद्युतीकरण अब जमीन पर दिखने लगा है। FY26 में अब तक कुल बस बिक्री में इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) की हिस्सेदारी 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो FY25 में 3.5 प्रतिशत थी। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब केंद्र और राज्यों के टेंडर वास्तविक तैनाती में बदलने लगे हैं।
FY26 में कितनी ई-बसें बिकी हैं?
Vahan डेटा के अनुसार, 16 जुलाई तक FY26 में कुल 91,575 बसें बिकीं, जिनमें से 4,158 इलेक्ट्रिक बसें थीं। इसके मुकाबले FY25 में कुल 95,641 बसों में से 3,317 ई-बसें बिकी थीं। इससे साफ है कि कुल बिक्री लगभग स्थिर रहने के बावजूद ई-बस पैठ लगातार बढ़ रही है।
ई-बस बिक्री में कौन-सी कंपनियां आगे हैं?
FY26 में अब तक ई-बस बिक्री में PMI Electro (पीएमआई इलेक्ट्रो) सबसे आगे रही है। जिसने 1,006 बसें बेचीं, यह कुल ई-बस बिक्री का करीब 25 प्रतिशत है। इसके बाद Switch Mobility (879 यूनिट), Olectra (853 यूनिट) और JBM Auto (817 यूनिट) का स्थान रहा।
वहीं Tata Motors और Volvo Eicher Commercial Vehicles काफी पीछे रहे, क्रमशः 175 और 42 ई-बसों के साथ।
किन योजनाओं से ई-बस तैनाती को बढ़ावा मिला?
उद्योग के जानकारों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं- FAME-II (फेम-2) और PM e-Bus Sewa Scheme (पीएम ई-बस सेवा स्कीम) के तहत स्वीकृत बसों की तेज तैनाती के साथ-साथ राज्यों के नए प्रोक्योरमेंट टेंडरों का नतीजा है।
हाल के महीनों में कहां-कहां ई-बसें उतारी गईं?
जनवरी 1 से अब तक दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, गुजरात और ओडिशा में करीब 1,000 ई-बसें सड़कों पर उतारी गई हैं। अकेले दिल्ली ने 9 फरवरी को 500 इलेक्ट्रिक बसें शामिल कीं, जो किसी राज्य परिवहन फ्लीट में एक दिन में सबसे बड़ी जोड़ मानी जा रही है।
आगे ई-बस ग्रोथ क्यों तेज हो सकती है?
सेक्टर विशेषज्ञों का कहना है कि दिसंबर 2025 में पूरा हुआ देश का अब तक का सबसे बड़ा टेंडर (10,900 ई-बसें) आने वाले समय में तैनाती को तेजी से बढ़ाएगा। यह गति पीएम ई-बस सेवा स्कीम के तहत बने मोमेंटम को और मजबूत करेगी।
टेंडरिंग से तैनाती तक की टाइमलाइन क्या है?
इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के इंडिया मैनेजिंग डायरेक्टर अमित भट्ट के अनुसार, शुरुआती चरण में ई-बस पैठ धीमी रही क्योंकि टेंडरिंग और प्रोक्योरमेंट में समय लगता है।
उनका कहना है, "दो केंद्रीय योजनाओं के तहत करीब 70 प्रतिशत ई-बसों के टेंडर पूरे हो चुके हैं। आने वाले महीनों में पब्लिक फ्लीट्स में तैनाती तेज होगी।"
कुल कितनी ई-बसों के टेंडर फाइनल हो चुके हैं?
केंद्र ने अब तक दोनों योजनाओं के तहत 16,568 से अधिक ई-बसों के टेंडर फाइनल कर दिए हैं। इसमें-
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पीएम ई-बस सेवा स्कीम के तहत 5,668 बसें (लक्ष्य 10,000)
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पीएम ई-ड्राइव प्रोग्राम के तहत 10,900 बसें (लक्ष्य 14,028)
पीएम ई-ड्राइव के तहत PMI Electro को लगभग आधे ऑर्डर मिले हैं। EKA Mobility को 3,485 बसें, Olectra को 1,785 बसें, जबकि शेष 420 बसें Anthony Travels कंसोर्टियम को मिली हैं। इनकी तैनाती FY27 से शुरू होने की संभावना है।
राज्यों की भूमिका कितनी अहम है?
ई-बस गति केवल केंद्रीय योजनाओं तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र ने 5,000 से अधिक ई-बसों के टेंडर पूरे कर लिए हैं, जबकि राजस्थान और तमिलनाडु अपनी योजनाओं को अंतिम रूप देने के अलग-अलग चरणों में हैं।
बदलेगा पब्लिक ट्रांसपोर्ट
जैसे-जैसे ये टेंडर जमीन पर तैनाती में बदलेंगे, आने वाले समय में पब्लिक ट्रांसपोर्ट फ्लीट में ई-बसों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ने की संभावना है। यह न सिर्फ स्वच्छ परिवहन की दिशा में बड़ा कदम होगा, बल्कि शहरों में प्रदूषण घटाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।