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India-EU: भारत में यूरोपीय कारें हो सकती हैं सस्ती, आयात शुल्क में बड़ी कटौती की योजना
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 26 Jan 2026 03:43 PM IST
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सार
भारत यूरोपियन यूनियन से आने वाली कारों पर इंपोर्ट टैरिफ को मौजूदा 110 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करने वाला है। यह अब तक की सबसे बड़ी छूट होगी, क्योंकि नई दिल्ली और ब्रसेल्स लंबे समय से अटके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को तय करने के करीब पहुंच रहे हैं।
Audi RSQ8 Performance
- फोटो : Audi India
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विस्तार
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से चली आ रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) (एफटीए) वार्ताओं के जल्द निष्कर्ष पर पहुंचने की उम्मीद है। इसी के तहत भारत यूरोप से आने वाली कारों पर आयात शुल्क (इंपोर्ट टैरिफ) में बड़ी कटौती करने की तैयारी में है। मौजूदा समय में जहां पूरी तरह बनी (CBU) कारों पर आयात शुल्क 70 से 110 प्रतिशत तक है, वहीं इसे घटाकर 40 प्रतिशत तक लाने की योजना है।
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शुरुआती राहत, आगे और कटौती की तैयारी
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती चरण में भारत उन यूरोपीय कारों पर शुल्क कम करेगा जिनकी कीमत 15,000 यूरो से अधिक है। बाद के वर्षों में इन टैरिफ को और घटाकर 10 प्रतिशत तक लाया जा सकता है। इससे यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती चरण में भारत उन यूरोपीय कारों पर शुल्क कम करेगा जिनकी कीमत 15,000 यूरो से अधिक है। बाद के वर्षों में इन टैरिफ को और घटाकर 10 प्रतिशत तक लाया जा सकता है। इससे यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।
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2025 BMW 2 Series Gran Coupe
- फोटो : BMW
FTA पर मुहर लगने की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि भारत और ईयू के बीच व्यापार समझौते की घोषणा बहुत जल्द हो सकती है। हालांकि, औपचारिक ऐलान के बाद भी इस समझौते को दोनों पक्षों की मंजूरी और अनुमोदन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बावजूद इसे वर्षों से अटकी बातचीत का एक बड़ा ब्रेकथ्रू माना जा रहा है।
दुनिया का बड़ा बाजार, लेकिन सख्त संरक्षण
भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। लेकिन साथ ही यह सबसे ज्यादा संरक्षित बाजारों में भी शामिल है। ऊंचे इंपोर्ट टैक्स के चलते कई वैश्विक कार निर्माता भारत में अपने महंगे और प्रीमियम मॉडल्स को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर लॉन्च नहीं कर पा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि भारत और ईयू के बीच व्यापार समझौते की घोषणा बहुत जल्द हो सकती है। हालांकि, औपचारिक ऐलान के बाद भी इस समझौते को दोनों पक्षों की मंजूरी और अनुमोदन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बावजूद इसे वर्षों से अटकी बातचीत का एक बड़ा ब्रेकथ्रू माना जा रहा है।
दुनिया का बड़ा बाजार, लेकिन सख्त संरक्षण
भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। लेकिन साथ ही यह सबसे ज्यादा संरक्षित बाजारों में भी शामिल है। ऊंचे इंपोर्ट टैक्स के चलते कई वैश्विक कार निर्माता भारत में अपने महंगे और प्रीमियम मॉडल्स को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर लॉन्च नहीं कर पा रहे हैं।
ICE कारों को तुरंत फायदा, EV को इंतजार
प्रस्ताव के तहत भारत हर साल करीब 2 लाख पेट्रोल और डीजल (ICE) कारों पर तुरंत टैरिफ घटाने की योजना बना रहा है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को इस राहत से पहले पांच साल तक बाहर रखा जाएगा। सरकार का मकसद घरेलू ईवी उद्योग और उसमें हो रहे निवेश को संरक्षण देना है। पांच साल बाद ईवी पर भी चरणबद्ध तरीके से शुल्क घटाने पर विचार किया जाएगा।
यूरोपीय ब्रांड्स को मिल सकती है बड़ी राहत
टैरिफ घटने से यूरोप की कई मास-मार्केट और लग्जरी कार कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है। इनमें वे ब्रांड भी शामिल हैं जो भारत में पहले से असेंबली करते हैं। लेकिन ऊंचे इंपोर्ट टैक्स की वजह से अपने पोर्टफोलियो का पूरा विस्तार नहीं कर पा रहे थे।
प्रस्ताव के तहत भारत हर साल करीब 2 लाख पेट्रोल और डीजल (ICE) कारों पर तुरंत टैरिफ घटाने की योजना बना रहा है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को इस राहत से पहले पांच साल तक बाहर रखा जाएगा। सरकार का मकसद घरेलू ईवी उद्योग और उसमें हो रहे निवेश को संरक्षण देना है। पांच साल बाद ईवी पर भी चरणबद्ध तरीके से शुल्क घटाने पर विचार किया जाएगा।
यूरोपीय ब्रांड्स को मिल सकती है बड़ी राहत
टैरिफ घटने से यूरोप की कई मास-मार्केट और लग्जरी कार कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है। इनमें वे ब्रांड भी शामिल हैं जो भारत में पहले से असेंबली करते हैं। लेकिन ऊंचे इंपोर्ट टैक्स की वजह से अपने पोर्टफोलियो का पूरा विस्तार नहीं कर पा रहे थे।
Mercedes-Benz G450d
- फोटो : Mercedes-Benz
कीमतों में कटौती और नए मॉडल्स की संभावना
कम टैरिफ के चलते कंपनियां इंपोर्टेड कारों की कीमतें कम रख सकेंगी। इससे उन्हें भारत में नए मॉडल्स को टेस्ट करने और मांग समझने का मौका मिलेगा। जिसके बाद वे भविष्य में लोकल मैन्युफैक्चरिंग में नए निवेश का फैसला ले सकती हैं।
एक सूत्र का कहना है कि अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारतीय ग्राहकों के लिए यूरोपीय कारें पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा किफायती और सुलभ हो सकती हैं।
कम टैरिफ के चलते कंपनियां इंपोर्टेड कारों की कीमतें कम रख सकेंगी। इससे उन्हें भारत में नए मॉडल्स को टेस्ट करने और मांग समझने का मौका मिलेगा। जिसके बाद वे भविष्य में लोकल मैन्युफैक्चरिंग में नए निवेश का फैसला ले सकती हैं।
एक सूत्र का कहना है कि अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारतीय ग्राहकों के लिए यूरोपीय कारें पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा किफायती और सुलभ हो सकती हैं।