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भारत-ईयू व्यापार समझौता: आयातित कारों पर शुल्क 110% से घटकर 40 फीसदी हो सकता है, ऑटो बाजार को मिलेगी रफ्तार
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Mon, 26 Jan 2026 04:47 AM IST
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सार
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के तहत आयातित कारों पर शुल्क 110% से घटाकर 40% किया जा सकता है। इससे भारतीय ऑटो बाजार में प्रतिस्पर्धा और निवेश बढ़ने की उम्मीद है।
भारत-ईयू एफटीए
- फोटो : Adobe stock
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विस्तार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत आयातित कारों पर शुल्क में बड़ी कटौती की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ से आने वाली कारों पर शुल्क 110 प्रतिशत तक से घटाकर 40 प्रतिशत किया जा सकता है। यह कटौती अब तक भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार को खोलने की सबसे बड़ी पहल मानी जा रही है।
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सूत्रों ने बताया कि यह कम शुल्क उन सीमित कारों पर लागू होगा, जिनकी आयात कीमत 15,000 यूरो से अधिक है। आगे चलकर इस शुल्क को चरणबद्ध तरीके से 10 प्रतिशत तक लाने का भी प्रावधान हो सकता है। इससे यूरोपीय वाहन निर्माताओं के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश आसान होगा। कम शुल्क का सबसे ज्यादा लाभ फॉक्सवैगन, रेनो, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी यूरोपीय कंपनियों को मिलने की उम्मीद है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं के मंगलवार को संपन्न होने की घोषणा होने की संभावना है। इसके बाद समझौते के विस्तृत प्रावधानों को अंतिम रूप देकर दोनों पक्षों की मंजूरी ली जाएगी।
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सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे ईयू नेता
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग (ईयू) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन का रविवार को भारत आगमन पर गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत किया गया। दोनों नेता 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। भारत पहुंचने पर एंटोनियो कोस्टा ने खुशी जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि वह भारत की 77वीं गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली आकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है, जो व्यापार और सुरक्षा से लेकर स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण तथा लोगों के बीच संपर्क तक फैली हुई है। भारत 27 जनवरी को 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
फिलहाल भारत में आयातित कारों पर 70 से 110 प्रतिशत तक लगता है शुल्क
फिलहाल भारत में आयातित कारों पर 70 से 110 प्रतिशत तक शुल्क लगता है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार आलोचना होती रही है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन घरेलू उद्योग को संरक्षण देने के कारण यहां आयात शुल्क काफी ऊंचा रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, भारत हर साल लगभग दो लाख पेट्रोल और डीजल कारों पर तुरंत 40 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव दे सकता है। हालांकि, यह संख्या अंतिम समय में बदल भी सकती है। वहीं, बैटरी चालित विद्युत वाहनों को पहले पांच वर्षों तक शुल्क में किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी। इसका मकसद महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसी घरेलू कंपनियों के निवेश की सुरक्षा करना है।
यूरोपीय कंपनियों की भारतीय कार बाजार में हिस्सेदारी 4% से भी कम
वर्तमान में यूरोपीय कंपनियों की भारत के 44 लाख कारों के सालाना बाजार में हिस्सेदारी 4% से भी कम है। बाजार पर सुजुकी मोटर के साथ भारतीय कंपनियों महिंद्रा और टाटा का दबदबा है। अनुमान है कि 2030 तक भारतीय कार बाजार 60 लाख इकाई सालाना तक पहुंच सकता है, जिसे देखते हुए कई विदेशी कंपनियां निवेश की तैयारी कर रही हैं।
दोनों नेता गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी होंगे शामिल
दोनों यूरोपीय नेता 26 जनवरी को भारत की 77वीं गणतंत्र दिवस समारोह में भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह शिखर सम्मेलन हाल के वर्षों में भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में आई सकारात्मक गति और उच्चस्तरीय संवाद की पृष्ठभूमि में हो रहा है। अक्तूबर 2025 में यूरोपीय संघ परिषद ने नए भारत-ईयू रणनीतिक एजेंडा को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और गहराई देना है।
भारत और यूरोपीय संघ समझौता घरेलू उद्योग के लिए खतरा नहीं : जीटीआरआई
भारत और यूरोपीय संघ के बीच 27 जनवरी को घोषित होने वाला मुक्त व्यापार समझौता घरेलू उद्योग के लिए चुनौती बनने के बजाय लागत घटाने और व्यापार विस्तार में सहायक होगा। यह आकलन थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने किया है। जीटीआरआई ने कहा कि मौजूदा दौर में वैश्विक व्यापार पर शुल्क, भू-राजनीति और आपूर्ति शृंखला के पुनर्गठन का असर बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक संबंध उद्देश्य की स्पष्टता के कारण अलग पहचान रखते हैं। दोनों एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि मूल्य शृंखला के अलग-अलग स्तरों पर काम करने वाले साझेदार हैं। थिंक टैंक के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार भारत श्रम-प्रधान और प्रसंस्करण आधारित वस्तुओं का निर्यात करता है, जबकि यूरोपीय संघ पूंजीगत सामान, उन्नत प्रौद्योगिकी और औद्योगिक इनपुट की आपूर्ति करता है। यही संरचनात्मक पूरकता इस मुक्त व्यापार समझौते को घरेलू उद्योग के लिए नुकसानदेह नहीं, बल्कि लाभकारी बनाती है।
वित्त वर्ष-2025 में भारत-ईयू व्यापार 136 अरब डॉलर से अधिक रहा
वित्त वर्ष 2025 में भारत-यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं का व्यापार 136 अरब डॉलर से अधिक रहा। शुल्क में कटौती से मुख्य रूप से इनपुट लागत घटेगी, मूल्य शृंखला का एकीकरण बढ़ेगा और व्यापार मात्रा में इजाफा होगा, जिससे दोनों पक्षों के उत्पादकों और उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। भारत के यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात में स्मार्टफोन, परिधान, जूते, टायर, दवाइयां, ऑटो पुर्जे, परिष्कृत ईंधन और कटे हीरे शामिल हैं।