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Budget 2026: एक कड़ाही हलवा और लगभग 100 अधिकारियों की 'नजरबंदी', जानिए नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट की इनसाइड स्टोरी

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 24 Jan 2026 06:46 PM IST
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सार

Meta Description: बजट से पहले होने वाली 'हलवा सेरेमनी' सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक गोपनीय अभियान की शुरुआत भी है। जानें नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में लगभग 100 से अधिकारियों-कर्मचारियों की 'नजरबंदी', लॉक-इन पीरियड और 1950 के बजट लीक से जुड़ी पूरी कहानी।

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हलवा सेरेमनी - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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क्या आपने कभी सुना है कि हलवा खाने के तुरंत बाद 100 से ज्यादा लोगों को एक बेसमेंट में बंद कर दिया जाए? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन वित्त मंत्रालय में बजट तैयार होने यानी उसकी छपाई से ठीक पहले ठीक यही होता है। यह सिर्फ एक 'मीठी रस्म' नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े 'सीक्रेट मिशन' यानी बजट की प्रक्रिया का हिस्सा है। बजट तैयार होने की प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले एक हलवा सेरेमनी होती है, उसके बाद इसे तैयार करने वाले सभी अधिकारी और कर्मचारी 'लॉक इन' हो जाते हैं। उसका संपर्क दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट जाता है।

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क्या है यह 'हलवा सेरेमनी'? 

भारत में हर अच्छे काम की शुरुआत मीठे से करने की परंपरा है। यही कारण है कि संसद में बजट पेश होने (1 फरवरी) से कुछ दिन पहले वित्त मंत्रालय में एक बड़ी कड़ाही में हलवा बनाया जाता है। परंपरा के मुताबिक, वित्त मंत्री खुद कड़ाही में हलवा तैयार करवाती हैं और अपने अधिकारियों को परोसती हैं। यह उन अधिकारियों की मेहनत का सम्मान है जो बजट तैयार करने के लिए अपना दिन-रात एक कर देते हैं। लेकिन असली कहानी हलवा की मिठास के बाद शुरू होती है...

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बजट के पहले लॉक इन के दौरान क्या होता है?

हलवा सेरेमनी का रस्म खत्म होते ही बजट प्रक्रिया का 'लॉक-इन पीरियड' शुरू हो जाता है। नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थित प्रिंटिंग प्रेस में 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी 'लॉक' हो जाते हैं।

  • नो मोबाइल, नो इंटरनेट: अंदर जाने के बाद किसी को भी बाहर आने की इजाजत नहीं होती। मोबाइल फोन पूरी तरह बैन होते हैं।
  • जासूसी निगरानी: वहां सिर्फ लैंडलाइन फोन होते हैं, जिन पर आने-जाने वाली हर कॉल को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) सुनता है।
  • परिवार से दूरी: अधिकारी अपने परिवार से भी बात नहीं कर सकते। यहां तक कि मेडिकल इमरजेंसी में भी डॉक्टर अंदर ही आते हैं, कोई बाहर नहीं जाता।

इतनी सख्ती आखिर क्यों?

हर वर्ष संसद में बजट पेश होने से पहले यह प्रक्रिया दुहराई जाती है, ताकि बजट का एक भी आंकड़ा लीक न हो जाए। अगर बजट इसके पेश होने के पहले लीक हो जाए तो इसके बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे जुड़ी सूचनाओं के गलत इस्तेमाल से शेयर बाजार में उथल-पुथल मच सकती है और जमाखोर फायदा उठा सकते हैं। दुर्भाग्य से इतिहास में पहले ऐसा हो भी चुका है। 1950 में बजट का एक हिस्सा लीक हो गया था, जिसके बाद सरकार को बहुत फजीहत झेलनी पड़ी थी। उसी घटना के बाद बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन से हटाकर एक सुरक्षित बंकरनुमा बेसमेंट में शिफ्ट कर दी गई।

डिजिटल दौर में भी 'लॉक इन' की परंपरा क्यों? 

अब बजट 'पेपरलेस' हो गया है और टैबलेट के जरिए पेश किया जाता है। ऐसे में कुछ लोग कहते हैं कि जब बजट से जुड़े दस्तावेज डिजिटल हो गए हैं तो फिर अधिकारियों-कर्मचारियों को लॉक करने की अब क्या जरूरत है?

इसका जवाब है- बजट से जुड़े आंकड़ों की सुरक्षा या डेटा सिक्योरिटी। साइबर हैकिंग और डेटा चोरी से बचने के लिए, जब तक बजट का डेटा फाइनल होकर सुरक्षित सर्वर पर अपलोड नहीं हो जाता, तब तक यह 'लॉक इन' जरूरी हो जाती है। इसलिए हम कह सकते हैं कि हर वर्ष बजट से पहले होने वाली हलवा सेरेमनी सिर्फ फोटो खिंचवाने का मौका नहीं है, बल्कि यह एक गोपनीयता की शपथ भी है। जब 1 फरवरी को वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करती हैं, तो यह उन अधिकारियों की 'आजादी' का भी दिन होता है, जो लॉक इन के कारण कई दिनों तक अपनों से दूर रहते हैं।


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