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Highways: हाईवे पर सफर अब सस्ता या महंगा? जानिए नई टोल व्यवस्था से आपको कितना फायदा

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 16 Feb 2026 11:03 PM IST
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सार

नेशनल हाईवे पर अक्सर यात्रा करने वालों के लिए टोल में बड़ी राहत मिलने की वजह है। मौजूदा फीस नियमों में बदलाव के बाद 15 फरवरी से कई हाईवे हिस्सों पर टोल चार्ज कम कर दिए गए हैं।

Expressway Toll Rates Revised: What It Means for Daily Commuters and Logistics
National Highways - फोटो : X/@nitin_gadkari
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विस्तार

नेशनल हाईवे पर नियमित सफर करने वालों के लिए यह एक राहत भरी खबर है। 15 फरवरी से टोल शुल्क में संशोधन लागू कर दिया गया है, जिसके तहत कई एक्सप्रेसवे और एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे सेक्शनों पर टोल दरें घटाई गई हैं। यह बदलाव खास तौर पर उन कॉरिडोर पर लागू है, जो अभी पूरी तरह एंड-टू-एंड ऑपरेशनल नहीं हैं। नई व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों से उतना ही टोल लिया जाए, जितना वे वास्तव में सड़क का उपयोग करते हैं। 
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टोल स्ट्रक्चर में क्या बदलाव किया गया है?
पहले की व्यवस्था में, भले ही एक्सप्रेसवे का सिर्फ कुछ हिस्सा ही चालू हो, यात्रियों से पूरे एक्सप्रेसवे के हिसाब से ऊंचा टोल वसूला जाता था।
एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे पर आम तौर पर सामान्य नेशनल हाईवे की तुलना में करीब 25 प्रतिशत ज्यादा टोल लिया जाता है। क्योंकि इन सड़कों पर तेज रफ्तार, सीमित एंट्री-एग्जिट और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलता है।
लेकिन अधूरी सड़कों पर यही दरें लागू होने से यात्रियों में असंतोष बढ़ रहा था। नए नियम इसी खामी को दूर करते हैं।
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दूरी के हिसाब से टोल कैसे तय होगा?
नई नीति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब डिस्टेंस-बेस्ड टोलिंग लागू की गई है।
इसका मतलब यह है कि अगर कोई एक्सप्रेसवे आंशिक रूप से खुला है, तो यात्री को सिर्फ उतनी ही दूरी का टोल देना होगा, जितनी दूरी उसने तय की है, पूरे प्रस्तावित कॉरिडोर का नहीं।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई चालक एक्सप्रेसवे के सिर्फ 40-50 किमी खुले हिस्से का इस्तेमाल करता है, तो उसे पूरे 100-150 किमी के टोल का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इससे निजी वाहन चालकों और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट, दोनों को सीधी बचत होगी।

क्या यह फैसला ट्रैफिक मैनेजमेंट से भी जुड़ा है?
हां, यह कदम सिर्फ आर्थिक राहत तक सीमित नहीं है। इसका एक अहम उद्देश्य ट्रैफिक को बेहतर तरीके से बांटना भी है।
जब अधूरे एक्सप्रेसवे सेक्शन पर टोल कम होगा, तो ज्यादा वाहन इन तेज कॉरिडोर की ओर शिफ्ट होंगे। इससे पुराने नेशनल हाईवे पर दबाव घटेगा, जहां अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है।
कम जाम का मतलब है, बेहतर ट्रैवल टाइम, कम ईंधन खपत और ड्राइविंग का बेहतर अनुभव। 

इससे अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को क्या फायदा होगा?
कम टोल से भले ही पहली नजर में राजस्व घटता दिखे, लेकिन इसके लॉन्ग-टर्म फायदे कहीं ज्यादा हैं।
लॉजिस्टिक्स कंपनियों के ऑपरेशनल कॉस्ट घटेंगे, जिससे माल ढुलाई सस्ती हो सकती है। रोज सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह बचत महीने के खर्च में बड़ा अंतर ला सकती है।
पर्यावरण के लिहाज से भी फायदा है। कम जाम और स्मूद ट्रैफिक से वाहनों का आइडल टाइम घटेगा, जिससे प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। 

यह नई व्यवस्था कब से लागू है?
संशोधित टोल नियम 15 फरवरी से पूरे देश में लागू हो चुके हैं। जो भी वाहन चालक अब आंशिक रूप से खुले एक्सप्रेसवे का उपयोग करेंगे। उन्हें कम टोल दरें अपने आप लागू होती दिखेंगी।
टोल प्लाजा ऑपरेटर्स को एकरूपता बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। 

क्या यह रोज सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत है?
बिल्कुल। ऑफिस जाने वाले कम्यूटर, इंटरसिटी ड्राइवर और ट्रक ऑपरेटर, सभी के लिए टोल एक नियमित खर्च होता है।
अधूरी एक्सप्रेसवे पर टोल घटाकर सरकार ने यात्रियों के सीधे खर्च को कम किया है और टोल सिस्टम को ज्यादा न्यायसंगत बनाया है।
आने वाले समय में, जैसे-जैसे हाईवे नेटवर्क का विस्तार होगा, इस तरह की फ्लेक्सिबल टोल पॉलिसी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और यात्रियों की जेब- दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी।

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