Auto Tips: आपकी कार के टायर नए हैं या पुराने? इस 'सीक्रेट कोड' से 1 मिनट में लगाएं पता
Tyre Expiry Date: क्या आपको लगता है कि आपकी नई कार में लगे एकदम नए दिखने वाले टायर पूरी तरह से सुरक्षित हैं? अगर हां तो शायद आपको सावधान होने की जरूरत है। दरअसल, खाने-पीने की चीजों की तरह टायरों की भी अपनी एक एक्सपायरी डेट होती है। ऑटो एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 5-6 साल से पुराने टायर तेज रफ्तार में और खास तौर पर गर्मियों के मौसम में अचानक फटने से बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं। यह लेख में हम आपको बताएंगे कि टायर के किनारे (साइडवॉल) पर लिखे सीक्रेट 'DOT' कोड को डिकोड करके उसकी असली मैन्युफैक्चरिंग डेट कैसे पता की जाए।
विस्तार
अक्सर हम कार खरीदते समय उसके स्मार्ट फीचर्स, इंजन और एयरबैग्स पर तो पूरा ध्यान देते हैं। लेकिन सबसे अहम हिस्से यानी टायर्स को नजरअंदाज कर देते हैं। क्या आप जानते हैं कि आपकी एकदम नई कार में लगे टायर असल में एक्सपायर हो चुके हो सकते हैं? सिर्फ टायर का ऊपरी डिजाइन देखकर उसकी असली उम्र का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। तकनीक की भाषा में हर टायर की एक 'एक्सपायरी डेट' होती है, जो उस पर लिखे एक खास कोड में छिपी होती है। अगर टायर 5 साल से ज्यादा पुराना है तो वह हाई-स्पीड पर एक टाइम बम की तरह है।
पुराने टायर क्यों हो सकते हैं खतरनाक?
भारत में एक्सप्रेसवे और हाईवे का जाल बिछ रहा है और इसके साथ ही 'टायर बर्स्ट' (टायर फटने) की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। खासकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तेज गर्मियों के दौरान यह समस्या आम हो जाती है। इसके पीछे का विज्ञान कुछ ऐसा है:
- रबर का सूखना: समय के साथ टायर का रबर अपनी नमी खो देता है और सख्त होकर दरकने लगता है।
- हीट और प्रेशर: तेज गर्मी में सड़क का तापमान बढ़ जाता है, जिससे टायर के अंदर हवा का दबाव भी तेजी से बढ़ता है।
- कमजोर स्ट्रक्चर: पुराना रबर इस बढ़े हुए प्रेशर को झेल नहीं पाता और हाई-स्पीड पर टायर फट जाता है।
नई कार में पुराना टायर कैसे आ जाता है?
यह एक कड़वी सच्चाई है। कई बार डीलरशिप्स अपना पुराना स्टॉक क्लियर करने के लिए 2 से 3 साल पुराने टायर नई कारों में फिट कर देते हैं। स्पेयर टायर (स्टेपनी) के मामले में तो यह अक्सर 4-5 साल पुराना निकल सकता है। वहीं, सेकंड-हैंड कारों में यह समस्या और भी ज्यादा देखने को मिलती है।
डिकोड करें टायर का 'सीक्रेट कोड'
हर ओरिजिनल टायर के किनारे (साइडवॉल) पर एक DOT कोड (डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन कोड) लिखा होता है। यही वह सीक्रेट कोड है जो बताता है कि आपका टायर किस हफ्ते और किस साल में बना था।
- इस कोड का फॉर्मेट कुछ ऐसा दिखता है: DOT XXXX 2219
- इसमें आपको सिर्फ आखिरी के चार अंकों पर ध्यान देना है:
- पहले दो अंक (22): यह निर्माण के हफ्ते (वीक) बताते हैं।
- आखिरी दो अंक (19): यह निर्माण का वर्ष (ईयर) बताते हैं।
उदाहरण के लिए समझें:
- अगर कोड 2219 है तो इसका मतलब है टायर साल 2019 के 22वें सप्ताह (यानी मई 2019 के आस-पास) में बना है।
- अगर कोड 0524 है तो टायर साल 2024 के 5वें सप्ताह (फरवरी 2024) में बना है।
- प्रो टिप: यह कोड टायर के दोनों तरफ होता है। अगर बाहर की तरफ सिर्फ कुछ अक्षर दिख रहे हैं तो गाड़ी के नीचे झुककर टायर के अंदरूनी हिस्से की तरफ देखें, वहां पूरे 4 अंक जरूर लिखे होंगे।
एक्सपर्ट्स क्या सलाह देते हैं?
टायर कंपनियों और सेफ्टी एक्सपर्ट्स के मुताबिक:
- टायर की उम्र 5 से 6 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, भले ही उसका ऊपरी डिजाइन एकदम नया क्यों न लग रहा हो।
- 5 साल पुराने टायर की हर 6 महीने में किसी अच्छे मैकेनिक से जांच कराएं।
- 6-7 साल बाद बिना सोचे टायर को बदलवा लें।
सड़क पर खुद को सुरक्षित कैसे रखें?
इन आसान लेकिन जरूरी दिशा-निर्देशों को हमेशा याद रखें:
- कोड चेक करें: नया टायर खरीदते या गाड़ी की डिलीवरी लेते समय DOT कोड जरूर पढ़ें।
- रेगुलर प्रेशर चेक: हर महीने और किसी भी लंबे सफर से पहले टायर का एयर प्रेशर (हवा) जरूर चेक कराएं।
- ओवरलोडिंग से बचें: कार में उसकी क्षमता से ज्यादा वजन न डालें।
- फिजिकल डैमेज देखें: अगर टायर में कोई भी दरार, कट, या बुलबुला (उभार) दिखे तो उसे तुरंत बदल दें।
आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा सिर्फ एयरबैग्स या एबीएस ब्रेकिंग सिस्टम पर निर्भर नहीं करती। ये सड़क और कार के बीच इकलौते संपर्क यानी आपके टायर पर भी निर्भर करती है। अगली बार कार में बैठने से पहले अपनी कार के टायर्स का सीक्रेट कोड जरूर चेक करें।