FY26 Auto Sales: शोरूम आते ही बिक रहीं SUVs, डीलर्स का स्टॉक हुआ आधा; कारों की बिक्री में जबरदस्त उछाल
India Car Sales 2026: ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में FY2026 के दौरान रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई है, जिसमें कुल 46 लाख गाड़ियां बिकीं। मार्च 2026 में भी बिक्री में जोरदार उछाल देखने को मिला। एसयूवी सेगमेंट का बाजार पर दबदबा बना हुआ है, जिसकी हिस्सेदारी 68% तक पहुंच गई है। वहीं, जीएसटी में कटौती और नए मॉडल्स के लॉन्च से छोटी कारों की डिमांड में भी सुधार हुआ है। निर्यात में 18% की वृद्धि के साथ भारतीय कार कंपनियां वैश्विक स्तर पर भी मजबूती दिखा रही हैं। FY2027 में बाजार के 4-6% की दर से बढ़ने का अनुमान है।
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भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार लगातार रफ्तार पकड़ रहा है। हाल ही में आई ICRA की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कारों की जबरदस्त डिमांड देखने को मिल रही है। नई कारों की लॉन्चिंग और जीएसटी दरों में कटौती का सीधा फायदा ग्राहकों और कार कंपनियों दोनों को मिल रहा है। आइए समझते हैं कि कार बाजार के ये नए आंकड़े क्या कहते हैं:
1. मार्च 2026: बिक्री के शानदार आंकड़े
मार्च 2026 भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए शानदार उपलब्धियों वाला महीना साबित हुआ है। इस दौरान कार कंपनियों ने डीलरों को रिकॉर्ड 4.4 लाख गाड़ियां भेजीं, जो पिछले साल मार्च के मुकाबले 16% की बड़ी बढ़ोतरी को दर्शाता है। मासिक आधार पर भी इसमें 6% का सुधार आया है। केवल होलसेल ही नहीं, बल्कि शोरूम से ग्राहकों तक पहुंचने वाली कारों यानी रिटेल बिक्री में भी 21% का जोरदार उछाल देखा गया। बाजार में आई इस तेजी की मुख्य वजह नए मॉडल्स की लॉन्चिंग और जीएसटी दरों में कटौती को माना जा रहा है, जिससे कारों की कीमत कम हुई और ग्राहकों का उत्साह बढ़ गया।
2. साल भर का रिकॉर्ड (FY 2026 की रिपोर्ट)
बीते वित्त वर्ष (FY 2026) के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय कार बाजार ने इस साल इतिहास रच दिया है। पूरे साल के दौरान शोरूम से कुल 46 लाख गाड़ियां बिकीं, जो अब तक का एक ऑल-टाइम रिकॉर्ड है। दिलचस्प बात यह है कि साल की शुरुआत काफी सुस्त रही थी और पहले छह महीनों में बिक्री में 0.2% की मामूली गिरावट देखी गई थी। हालांकि, जीएसटी दरों में बदलाव के बाद बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल गई और साल की दूसरी छमाही में बिक्री 17% की शानदार तेजी के साथ आगे बढ़ी। इसी रफ़्तार के चलते पूरे साल की औसत ग्रोथ 8.6% रही। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कमजोर मानसून की आशंका जैसी चुनौतियां सामने न होतीं तो यह विकास दर और भी ऊंचे स्तर को छू सकती थी।
3. शोरूम में फटाफट बिक रहीं गाड़ियां
बाजार में कारों की बढ़ती डिमांड का सबसे सकारात्मक असर शोरूम्स में देखने को मिल रहा है। ऑटोमोबाइल डीलर्स के संगठन FADA के आंकड़े बताते हैं कि गाड़ियों की मांग इतनी जबरदस्त है कि डीलरों के पास अब स्टॉक जमा नहीं हो पा रहा है। जहां सितंबर 2025 में डीलरों के पास औसतन 60 दिनों का स्टॉक खड़ा रहता था, वहीं बिक्री की तेज रफ्तार के चलते मार्च 2026 तक यह घटकर सिर्फ 28 दिन रह गया है। स्टॉक के इस आधे से भी कम होने का साफ मतलब है कि गाड़ियां शोरूम पहुंचते ही हाथों-हाथ बिक रही हैं।
4. सड़कों पर एसयूवी का राज
सड़कों पर बढ़ती कारों की भीड़ के बीच भारतीय ग्राहकों की पसंद अब साफ तौर पर बड़ी गाड़ियों की ओर झुक गई है। आलम यह है कि आज सड़कों पर एसयूवी और यूटिलिटी व्हीकल्स का एकछत्र राज देखने को मिल रहा है। वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में बिकी कुल कारों में 68% हिस्सेदारी अकेले इसी सेगमेंट की रही है। हालांकि, मार्केट में यह बड़ी गाड़ियां भले ही सबसे आगे हों, लेकिन जीएसटी दरों में हुई कटौती ने छोटी कारों के लिए भी ऑक्सीजन का काम किया है। यही वजह है कि पिछले कुछ समय से पिछड़ रही मिनी और कॉम्पैक्ट कारों की बिक्री में भी अब हल्का सुधार देखने को मिल रहा है।
5. विदेशों में भी बज रहा भारतीय कारों का डंका
भारतीय कार कंपनियां सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपना दम दिखा रही हैं। भारत से कारों के निर्यात में इस साल 18% की शानदार ग्रोथ हुई है, जो यह बताता है कि दुनिया भर में भारतीय कारों की सप्लाई बढ़ रही है।
आगे कैसा रहेगा बाजार? (FY27 का अनुमान)
ICRA रिपोर्ट का अनुमान है कि आने वाले साल (FY 2027) में कार बाजार 4 से 6% की दर से आगे बढ़ेगा। माना जा रहा है कि एसयूवी सेगमेंट आगे भी बाजार का लीडर बना रहेगा, लेकिन धीरे-धीरे छोटी पैसेंजर कारों की डिमांड में भी तेजी आने की उम्मीद है।

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