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Electric Vehicles: चीन की नई नीति से मिलेगा ईवी झटका! भारत में बढ़ सकती हैं इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमतें

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 20 Jan 2026 04:34 PM IST
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सार

बीजिंग के एक छोटे से नीतिगत फैसले से भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमतें बढ़ने वाली हैं। जानें क्या है पूरा मामला।

India EV Market Faces Price Pressure as China Slashes Battery Export Subsidy
Electric Car - फोटो : FREEPIK
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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की कीमतों में आने वाले समय में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह चीन द्वारा लिया गया एक नीतिगत फैसला है, जिसने भारतीय ईवी उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला ऐसे समय आया है जब पहले ही इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलने वाला टैक्स लाभ पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तुलना में धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
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चीन ने बैटरी निर्यात पर घटाई टैक्स छूट
चीन ने लिथियम-आयन बैटरियों के निर्यात पर मिलने वाली टैक्स रिबेट को 9 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत करने का एलान किया है। यह बदलाव 1 अप्रैल से लागू होगा। इसके साथ ही चीन अगले एक साल के भीतर इस प्रोत्साहन को पूरी तरह खत्म करने की योजना भी बना रहा है। यह फैसला 8 जनवरी को लिया गया था।

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India EV Market Faces Price Pressure as China Slashes Battery Export Subsidy
Electric Car Charging - फोटो : Freepik
भारतीय EV कंपनियों पर सीधा असर क्यों?
भारत की कई इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियां बैटरियों के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर हैं। BYD और CATL जैसी चीनी कंपनियां भारतीय बाजार के लिए प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। ऐसे में टैक्स रिबेट घटने और पिछले एक साल में लिथियम की कीमतों में तेज उछाल के कारण बैटरी लागत बढ़ने की आशंका है।

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EV की कीमत में बैटरी की भूमिका अहम
एक इलेक्ट्रिक वाहन की कुल लागत में बैटरी की हिस्सेदारी एक-तिहाई से भी ज्यादा होती है। अगर बैटरी महंगी होती है, तो इसका सीधा असर वाहन निर्माताओं के मुनाफे पर पड़ेगा। ऐसे में कंपनियों के सामने दो ही विकल्प होंगे। या तो मुनाफा कम करें या बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालें।

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India EV Market Faces Price Pressure as China Slashes Battery Export Subsidy
Electric Car - फोटो : FREEPIK
सबसे ज्यादा असर किन कंपनियों पर पड़ेगा?
रिपोर्ट के अनुसार, वे कंपनियां ज्यादा प्रभावित होंगी जो शॉर्ट-टर्म बैटरी सप्लाई एग्रीमेंट पर निर्भर हैं। इन कंपनियों के लिए लागत बढ़ने का असर जल्दी और ज्यादा महसूस किया जा सकता है।

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बाजार में असर कब दिखेगा?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि, इस फैसले का असर अगले दो हफ्तों में बाजार में दिख सकता है। टैक्स रिबेट घटने से पहले कंपनियां तेजी से बैटरियों का स्टॉक जुटाने की कोशिश कर सकती हैं। जिससे सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।

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