EV: भारत की ईवी नीति पर क्यों भड़का चीन? क्या अब WTO में होगी आर-पार की लड़ाई?
चीन ने भारत की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। द्विपक्षीय बातचीत बेनतीजा रहने के बाद चीन ने विवाद समाधान पैनल गठित करने की मांग की है। चीन का आरोप है कि भारत की PLI और अन्य योजनाओं में 'लोकल कंटेंट' जैसी शर्तें रखी गई हैं, जिससे आयातित सामानों के साथ भेदभाव होता है और विदेशी कंपनियों को नुकसान पहुंचता है।
विस्तार
द्विपक्षीय बातचीत से मामला नहीं सुलझने के बाद चीन ने भारत की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और ऑटोमोबाइल से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शिकायत दर्ज कराई है। चीन का कहना है कि भारत की ये नीतियां आयातित सामानों के साथ भेदभाव करती हैं। चीन ने WTO से विवाद समाधान पैनल बनाने की मांग की है। यह कदम 25 नवंबर 2025 और 6 जनवरी 2026 की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद उठाया गया। चीन चाहता है कि इस मुद्दे को 27 जनवरी को जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में होने वाली बैठक के एजेंडे में रखा जाए।
चीन की आपत्ति क्या है?
चीन ने अक्तूबर 2025 में पहली बार कहा था कि भारत की PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजनाओं की कुछ शर्तें विदेशी कंपनियों को नुकसान पहुंचाती हैं। चीन का आरोप है कि भारत कुछ योजनाओं में घरेलू सामान/लोकल पार्ट्स इस्तेमाल करने को जरूरी बनाता है, जिससे आयातित सामान पीछे रह जाते हैं। चीन के मुताबिक यह WTO के नियमों के खिलाफ है।
चीन ने किन WTO नियमों का हवाला दिया?
चीन का दावा है कि भारत की 'लोकल कंटेंट' वाली शर्तें इन नियमों का उल्लंघन करती हैं:
SCM समझौता (सब्सिडी नियम): सरकार की सब्सिडी पर नियम बनाता है और ऐसे इंसेंटिव रोकता है जिनमें आयात की जगह घरेलू सामान इस्तेमाल करने की शर्त हो।
GATT 1994: आयातित और घरेलू सामान के साथ बराबरी का व्यवहार करने की बात करता है।
TRIMs समझौता: ऐसे निवेश नियमों पर रोक लगाता है जो व्यापार को बिगाड़ें, जैसे इंसेंटिव के लिए लोकल कंटेंट अनिवार्य करना।
कौन-कौन सी योजनाएं जांच के घेरे में हैं?
चीन की शिकायत में भारत की ये प्रमुख योजनाएं शामिल हैं:
- ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए PLI योजना
- ACC बैटरी स्टोरेज (एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल) कार्यक्रम
- भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों के निर्माण को बढ़ावा देने वाली योजना
विवाद के पीछे असली वजह क्या है?
यह मामला ऐसे समय आया है जब चीनी ऑटो कंपनियां विदेशी बाजारों में तेजी से विस्तार करना चाहती हैं, क्योंकि चीन में उत्पादन ज्यादा है और कीमतों की प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। भारत का तेजी से बढ़ता ईवी बाजार उनके लिए बड़ा मौका है। चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन (CPCA) के अनुसार, चीनी कंपनियों ने साल के पहले 8 महीनों में करीब 20.1 लाख इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों का निर्यात किया, जो 51% ज्यादा है। लेकिन यूरोप जैसे जगहों में उन्हें विरोध झेलना पड़ रहा है, जहां चीनी ईवी पर 27% तक टैरिफ लगाया गया है।
भारत-चीन व्यापार का हाल
चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है लेकिन भारत का ट्रेड घाटा लगातार बढ़ रहा है।
भारत का निर्यात (चीन को): 2024-25 में 14.5% घटकर 14.25 बिलियन डॉलर रहा गया।
भारत का आयात (चीन से): 11.52% बढ़कर 113.45 बिलियन डॉलर हो गया।
ट्रेड घाटा: बढ़कर 99.2 बिलियन डॉलर (रिकॉर्ड स्तर) पहुंच गया।
भारत का जवाब क्या है?
भारत सरकार का कहना है कि ये योजनाएं देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए हैं, किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए नहीं। सरकार ने मई 2021 में ACC बैटरी PLI के लिए 18,100 करोड़ रुपये और ऑटो PLI के लिए 25,938 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। अगर WTO पैनल बनता है तो वह जांच करेगा कि भारत की नीतियां वैश्विक व्यापार नियमों के मुताबिक हैं या नहीं। यह प्रक्रिया कई महीनों तक चल सकती है और इसका असर भारत की औद्योगिक नीति पर भी पड़ सकता है।