Small Commercial Vehicle: स्मॉल कमर्शियल वाहनों की मांग में जोरदार वापसी, पिक-अप सेगमेंट में डबल-डिजिट ग्रोथ
भारत का स्मॉल कमर्शियल व्हीकल (SCV) सेगमेंट, जो लास्ट-माइल डिलीवरी और छोटे कारोबारों की रीढ़ माना जाता है, करीब दो साल की सुस्ती के बाद फिर से तेजी पकड़ रहा है। SIAM के ताजा आंकड़ों के अनुसार, SCV सेगमेंट की कुल बिक्री सालाना आधार पर 7% बढ़कर 3,69,793 यूनिट्स हो गई है। इस बढ़त में सबसे बड़ा योगदान पिक-अप सेगमेंट का रहा, जहां बिक्री में 10% उछाल दर्ज हुआ, जबकि मिनी-ट्रक सेगमेंट में मामूली वृद्धि देखने को मिली।
विस्तार
भारत का स्मॉल कमर्शियल व्हीकल (SCV) सेगमेंट, जिसे 'लास्ट-माइल डिलीवरी' की रीढ़ माना जाता है, करीब दो साल की धीमी रफ्तार के बाद अब फिर से तेजी से बढ़ने लगा है। नए आंकड़ों के मुताबिक, पिक-अप गाड़ियों की बढ़ती मांग ने इस सेक्टर की बिक्री को दोबारा मजबूती दी है।
बिक्री के मुख्य आंकड़े
SIAM के आंकड़ों के अनुसार, SCV सेगमेंट ने पिछले साल के मुकाबले 7% की वृद्धि दर्ज की है।
कुल बिक्री: पिछले साल 3,45,194 यूनिट्स के मुकाबले इस साल 3,69,793 यूनिट्स।
पिक-अप सेगमेंट: इसमें 10% का उछाल आया है, जो बढ़कर 2,52,222 यूनिट्स हो गया है।
मिनी-ट्रक सेगमेंट: इसमें मामूली बढ़त देखी गई, जो 117,571 यूनिट्स रही।
SCV सेगमेंट में 2-3.5 टन भार क्षमता वाले पिक-अप और 2 टन तक के मिनी-ट्रक शामिल हैं, जो पूरे लाइट कमर्शियल व्हीकल बाजार का लगभग 85% हिस्सा बनाते हैं।
वृद्धि के प्रमुख कारण
क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक, पूनम उपाध्याय ने बताया कि तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में यह उछाल कई कारणों से आया है:
त्योहारी और ग्रामीण मांग: ग्रामीण क्षेत्रों और त्योहारों के दौरान मांग में वृद्धि।
बुनियादी ढांचा: निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों में तेजी।
जीएसटी में कटौती: कमर्शियल वाहनों पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% किया गया है, जिसने कम ब्याज दरों के साथ मिलकर ग्राहकों को वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया है।
बाजार में हिस्सेदारी: कौन है सबसे आगे?
बाजार में प्रतिस्पर्धा कड़ी है, लेकिन कुछ प्रमुख कंपनियां अपने-अपने सेगमेंट में दबदबा बनाए हुए हैं:
1. पिक-अप सेगमेंट:
महिंद्रा: 60% हिस्सेदारी के साथ मार्केट लीडर है।
अशोक लेलैंड: 20% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर।
टाटा मोटर्स: 18% हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर।
2. मिनी-ट्रक सेगमेंट:
टाटा मोटर्स: 2005 में 'टाटा एस' के साथ इस बाजार में क्रांति लाने वाली टाटा मोटर्स 52% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है।
मारुति सुजुकी: अपनी 'सुपर कैरी' के जरिए 24% हिस्सेदारी रखती है।
महिंद्रा: 23% हिस्सेदारी के साथ तीसरे नंबर पर है।
बाजार में आ रहा है बदलाव
पिछले कुछ वर्षों में ग्राहकों की पसंद में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2019 में जहां मिनी-ट्रक और पिक-अप की बिक्री का अंतर कम था, वहीं अब ग्राहक 1 टन से कम भार वाले मिनी-ट्रकों से दूर हटकर अधिक पेलोड क्षमता (1 टन से ज्यादा) वाले पिक-अप वाहनों को तरजीह दे रहे हैं।