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EV Sales: भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति! अगले दशक में भारत में जबरदस्त ग्रोथ का अनुमान

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 16 Feb 2026 09:02 PM IST
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सार

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री 2035 तक 22 मिलियन यूनिट तक पहुंच सकती है, और ज्यादातर गाड़ियों के सेगमेंट में ईवी की पहुंच 50 प्रतिशत से ज्यादा होने की उम्मीद है।

India EV Market Outlook 2035 India Set for Massive EV Growth Over Next Decade
Electric Cars - फोटो : Freepik
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विस्तार

2035 तक भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री 2.2 करोड़ यूनिट्स तक पहुंच सकती है। यह अनुमान केपीएमजी इंडिया की ओर से जारी रिपोर्ट में दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में ज्यादातर वाहन सेगमेंट्स में ईवी की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। 
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ईवी बिक्री में तेज बढ़ोतरी की वजह क्या होगी?
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ईवी की तेज ग्रोथ के पीछे कई बड़े कारण होंगे- 
  • इलेक्ट्रिक वाहनों की मजबूत उपभोक्ता मांग
  • सप्लाई चेन में सुधार
  • सरकार की ओर से अनुकूल नीतियां और रेगुलेटरी सपोर्ट
इन सभी फैक्टर्स के चलते ईवी सेक्टर को लंबी अवधि में मजबूत बढ़त मिलने की संभावना है। 
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कच्चे माल की सप्लाई भारत के लिए चुनौती क्यों है?
हालांकि रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि भारत की ईवी प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे अहम कच्चे माल से जुड़े जोखिमों को कितनी प्रभावी तरह से संभाल पाता है।

ईवी में इन मिनरल्स की जरूरत पारंपरिक वाहनों की तुलना में कहीं ज्यादा होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की 70 प्रतिशत से अधिक रिफाइनिंग क्षमता कुछ ही क्षेत्रों में केंद्रित है, जिससे भू-राजनीतिक और व्यापारिक जोखिम बढ़ जाते हैं। 

भारत आयात पर निर्भरता कैसे कम कर सकता है?
केपीएमजी का मानना है कि भारत घरेलू खोज (डोमेस्टिक एक्सप्लोरेशन) और प्रोसेसिंग में निवेश के जरिए आयात पर निर्भरता घटा सकता है।
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में पहचाने गए खनिज भंडारों का भी जिक्र किया गया है। इसके अलावा-
  • लोकल रिफाइनिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियां
  • लॉन्ग-टर्म सप्लाई एग्रीमेंट्स
  • वैकल्पिक मटीरियल्स पर रिसर्च
ईवी सेक्टर के लिए बेहद अहम होंगे। 

EV भविष्य पर KPMG के विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
केपीएमजी इंडिया में ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लीड रोहन राव ने कहा, "भारत की ईवी महत्वाकांक्षाएं सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर नहीं, बल्कि कच्चे माल की मजबूत सप्लाई चेन सुनिश्चित करने पर निर्भर करती हैं।"

वहीं, डील एडवाइजरी पार्टनर राघवन विश्वनाथन के मुताबिक, ईवी सेक्टर में एक्सप्लोरेशन, रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग में रणनीतिक निवेश भारत को वैश्विक ईवी इकोसिस्टम में लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए जरूरी होगा। 

ईवी का भविष्य उज्ज्वल!
रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत में ईवी का भविष्य उज्ज्वल है। लेकिन कच्चे माल की उपलब्धता और सप्लाई चेन स्ट्रैटेजी इस ग्रोथ की सबसे बड़ी कसौटी होगी। सही नीतियों और निवेश के साथ भारत 2035 तक ईवी सेक्टर में वैश्विक स्तर पर मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।

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