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ईवी मैन्युफैक्चरिंग में राहत: सरकार ने लोकलाइजेशन नियमों में दी ढील, बस-ट्रक निर्माताओं को बड़ी राहत

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Tue, 17 Mar 2026 11:32 AM IST
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सार

EV Motor Import India 2026: भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक बस और ट्रक कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए ट्रैक्शन मोटर आयात करने की छूट 2026 तक बढ़ा दी है। मैग्नेट की कमी और सप्लाई चेन की दिक्कतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इससे न सिर्फ ईवी कंपनियों का प्रोडक्शन बिना रुके चलता रहेगा, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने का पर्याप्त समय भी मिल जाएगा।

India Extends EV Motor Import Deadline, Easing Rules for Electric Buses and Trucks
इलेक्ट्रिक बस और ट्रक - फोटो : एआई
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विस्तार

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का फोकस भी इस बात पर है कि गाड़ियां और उनके पार्ट्स भारत में ही बनें। लेकिन फिलहाल सरकार ने इलेक्ट्रिक बस और ट्रक बनाने वाली कंपनियों को एक बड़ी राहत दी है। अब ये कंपनियां 2026 तक विदेशों से अपनी गाड़ियों के लिए इलेक्ट्रिक मोटर (ट्रैक्शन मोटर) मंगा सकेंगी। आइए समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और इससे क्या फायदा होगा।

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क्या है पूरा मामला?

देश में ईवी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की 10,900 करोड़ रुपये की पीएम ई-ड्राइव योजना चल रही है। इसका नियम था कि कंपनियों को गाड़ियों के पार्ट्स भारत में ही बनाने होंगे। लेकिन, भारी उद्योग मंत्रालय ने 13 मार्च को एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत कंपनियों को 31 अगस्त 2026 तक रेयर-अर्थ मैग्नेट वाले ट्रैक्शन मोटर्स (इलेक्ट्रिक मोटर) का आयात करने की छूट दे दी गई है। यानी 1 सितंबर 2026 से ही पूरी तरह स्वदेशी मोटर लगाना अनिवार्य होगा।

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किन गाड़ियों को मिलेगा इसका फायदा?

सरकार की ओर से दी गई यह छूट मुख्य रूप से कमर्शियल यानी व्यावसायिक इस्तेमाल वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू होगी। इसके दायरे में N2 और N3 कैटेगरी में आने वाले मीडियम और हैवी इलेक्ट्रिक ट्रकों के साथ-साथ M2 और M3 कैटेगरी की पैसेंजर इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी।

सरकार को क्यों बढ़ानी पड़ी समयसीमा?

ये दूसरी बार है जब सरकार ने यह डेडलाइन बढ़ाई है। ऐसा पहले सितंबर 2025 से बढ़ाकर मार्च 2026 किया गया था। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है रेयर-अर्थ मैग्नेट है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मोटर बनाने में इस खास तरह के चुंबक का इस्तेमाल होता है। पूरी दुनिया में इसकी सप्लाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है और भारत भी इसके लिए आयात (खासकर चीन) पर काफी ज्यादा निर्भर है। अगर सरकार आयात पर तुरंत रोक लगा देती तो कंपनियों के पास मोटर नहीं होती और गाड़ियों का प्रोडक्शन रुक जाता।

आगे का क्या है प्लान? (PMP नियम)

सरकार ने भले ही अभी आयात की छूट दे दी है लेकिन उनका लॉन्ग-टर्म प्लान पूरी तरह से 'मेड इन इंडिया' पर ही केंद्रित है। दरअसल, चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (PMP) के तहत 2026 के बाद कंपनियों को मोटर से जुड़े सभी अहम काम भारत में ही करने होंगे। इसका मतलब है कि मैग्नेट की फिटिंग से लेकर रोटर और स्टेटर की असेंबली, शाफ्ट और बेयरिंग लगाने के साथ-साथ केबल और कनेक्टर जोड़ने जैसे सभी जरूरी काम कंपनियों को स्वदेशी स्तर पर ही करने होंगे।

भारत में ही बनेंगे मैग्नेट (सरकार की नई पहल)

चीन या दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म करने के लिए सरकार ने एक मास्टरस्ट्रोक चला है। सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक नई योजना शुरू की है। इसका नाम 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' है। इसका सीधा मकसद इन जरूरी मैग्नेट्स का उत्पादन भारत में ही करना है।

इस फैसले का असर क्या होगा?

इस अहम फैसले से ईवी कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें अपना प्रोडक्शन सुचारू रूप से जारी रखने और अपनी सप्लाई चेन को दुरुस्त करने का पूरा समय मिल जाएगा। साथ ही, कंपनियों को भारत में ही अपनी मोटर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए भी पर्याप्त वक्त मिल सकेगा। इससे देश के ईवी सेक्टर की रफ्तार धीमी नहीं पड़ेगी और बिना किसी रुकावट के इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों का निर्माण होता रहेगा। ये प्रदूषण कम करने के बड़े लक्ष्य में मददगार साबित होगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो सरकार का यह कदम ईवी इंडस्ट्री के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है। ये आज की तात्कालिक परेशानियों को सुलझाने के साथ-साथ आने वाले कल के लिए एक 'आत्मनिर्भर भारत' की मजबूत नींव भी रख रहा है।

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