Tourist Buses: केरल में टूरिस्ट बसों के लिए सफेद रंग का नियम खत्म, ऑपरेटरों को मिली राहत
कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के लिए एकसमान सफेद रंग कोड को खत्म करने के राज्य परिवहन प्राधिकरण के फैसले ने बस ऑपरेटरों के बीच बहस छेड़ दी है।
विस्तार
केरल में टूरिस्ट बसों के रंग से जुड़े नियम को लेकर चल रही बहस के बीच राज्य परिवहन प्राधिकरण ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों के लिए अनिवार्य सफेद रंग (व्हाइट कलर कोड) की शर्त को खत्म कर दिया है।
इस फैसले का बस ऑपरेटरों के बीच मिश्रित प्रभाव देखने को मिला है। कई ऑपरेटरों ने इसे राहत भरा कदम बताया है। जबकि कुछ का मानना है कि इससे टूरिस्ट बसों के बीच अनावश्यक प्रतिस्पर्धा फिर बढ़ सकती है।
सफेद रंग का नियम क्यों लागू किया गया था?
साल 2022 में केरल सरकार ने टूरिस्ट बसों के लिए एक समान सफेद रंग अनिवार्य किया था। इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना और बसों की पहचान को आसान बनाना था।
इस नियम के तहत बस ऑपरेटरों को अपने वाहनों को सफेद रंग में पेंट करवाना पड़ता था, तभी उन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट मिलता था।
करीब 12,000 बस ऑपरेटरों ने इस नियम का पालन करते हुए अपनी बसों को दोबारा पेंट कराया था।
इस नियम को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
समस्या तब शुरू हुई जब कुछ बस ऑपरेटरों ने अपने वाहनों को ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (अखिल भारतीय पर्यटक परमिट) (AITP) के तहत पंजीकृत कराना शुरू कर दिया।
AITP परमिट वाले वाहनों पर राज्य के रंग संबंधी नियम लागू नहीं होते थे। इससे वे रंग-बिरंगी और आकर्षक बसों का इस्तेमाल जारी रख सके।
इस कारण बाजार में असमानता की स्थिति बन गई, क्योंकि राज्य में पंजीकृत बसों को सफेद रंग का नियम मानना पड़ता था। जबकि AITP बसों को इससे छूट मिल जाती थी।
बस ऑपरेटरों के अनुसार इससे स्कूल ट्रिप जैसे कार्यक्रमों में AITP बसों को ज्यादा प्राथमिकता मिलने लगी।
बस ऑपरेटरों ने सरकार के फैसले पर क्या कहा?
कॉन्ट्रैक्ट कैरिज ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बिंदु जॉन ने इस फैसले का स्वागत किया।
उनका कहना है कि पहले केवल राज्य में पंजीकृत बस ऑपरेटरों को ही रंग नियम का पालन करना पड़ता था। जबकि AITP और केरल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की टूरिस्ट बसें रंगीन डिजाइन के साथ चल रही थीं।उनके अनुसार यह स्थिति भेदभावपूर्ण थी और नया फैसला प्रतिस्पर्धा में संतुलन लाने में मदद करेगा।
क्या टूरिस्ट बसों में खतरनाक बदलाव भी किए जा रहे हैं?
कुछ ऑपरेटर खासकर स्कूल ट्रिप के लिए बसों को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए बड़े बदलाव कर रहे हैं।
इन बसों में अक्सर:
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तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम
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घूमने वाली LED लाइट्स
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महंगे मॉडिफिकेशन
लगाए जाते हैं।
बताया जाता है कि ऐसी मॉडिफिकेशन पर 20-25 लाख रुपये तक खर्च हो सकता है, जबकि केवल बस को फिर से पेंट कराने में ही 1-2 लाख रुपये लग जाते हैं।
कुछ मामलों में बसों के फ्रंट ग्रिल में बड़े स्पीकर लगाए जाते हैं, जिसके कारण हेडलाइट्स की जगह बदलनी पड़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे ड्राइवर की सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और सड़क पर अन्य वाहनों के लिए भी खतरा बढ़ सकता है।
क्या सभी बस ऑपरेटर ऐसा करते हैं?
बस ऑपरेटर संघ का कहना है कि इस तरह के अत्यधिक और जोखिमपूर्ण मॉडिफिकेशन सिर्फ लगभग 10 प्रतिशत ऑपरेटर ही करते हैं।
संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का यह फैसला किसी राजनीतिक कारण से नहीं लिया गया है।
उनका कहना है कि अगर यह चुनाव से जुड़ा कदम होता, तो पिछले बजट में लगाए गए अतिरिक्त कर भी हटा दिए जाते, जो अभी तक नहीं हटाए गए हैं।
मिलेगी अधिक स्वतंत्रता
केरल सरकार द्वारा टूरिस्ट बसों के लिए अनिवार्य सफेद रंग का नियम हटाने से बस ऑपरेटरों को अधिक स्वतंत्रता मिली है।
हालांकि इस फैसले से प्रतिस्पर्धा और डिजाइन की आज़ादी बढ़ सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और अनावश्यक मॉडिफिकेशन पर सख्त निगरानी भी जरूरी होगी।
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