Indian Army: भारतीय सेना ने किया स्वदेशी सिस्टम का सफल परिक्षण, 20 टन तक भारी आर्मर्ड वाहन हो सकेंगे एयरड्रॉप
Tests Indigenous Heavy Drop System: भारतीय सेना ने 20 टन तक के भारी सैन्य वाहनों को हवा से सुरक्षित उतारने के लिए स्वदेशी 28-फीट हैवी ड्रॉप सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया। इसमें एक बख्तरबंद वाहन को वास्तविक परिस्थितियों में एयरड्रॉप किया गया।
विस्तार
भारतीय सेना ने सुदूर और मुश्किल इलाकों में भारी सैन्य वाहन और सामान पहुंचाने के लिए एक नई स्वदेशी तकनीक का सफल परीक्षण किया है। इस सिस्टम का नाम एडवांस 28-फीट हैवी ड्रॉप सिस्टम– 20T (टाइप V) है। इसका परीक्षण 17 फरवरी 2026 को राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया। यह सिस्टम एयरबोर्निक्स डिफेंस एंड स्पेस ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की इकाई एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट के साथ मिलकर तैयार किया है। यह परियोजना 'मेक इन इंडिया' के तहत देश में रक्षा उपकरणों को स्वदेशी रूप से बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
यह हैवी ड्रॉप सिस्टम बड़े ट्रांसपोर्ट विमानों से भारी सैन्य वाहन और उपकरण को सुरक्षित तरीके से जमीन पर उतारने के लिए बनाया गया है। यह एक बार में 20 टन तक का वजन संभाल सकता है। यह लॉकहीड मार्टिन C-130J सुपर हरक्यूलिस और बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर III जैसे बड़े मालवाहक विमानों के साथ काम कर सकता है। इसमें 28 फुट का खास प्लेटफॉर्म और पैराशूट सिस्टम लगाया गया है। दो बड़े एक्सट्रैक्टर पैराशूट और चार-पॉइंट लिंक सिस्टम की मदद से भारी सामान को पहले विमान से बाहर निकाला जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से जमीन पर उतारा जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो यह तकनीक भारी सैन्य उपकरणों को सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से हवा से जमीन तक पहुंचाने में मदद करती है।
वास्तविक परिस्थितियों में हुआ परीक्षण
इस बार पहले की तरह सिर्फ डेमो नहीं किया गया बल्कि करीब 15 टन वजनी असली बख्तरबंद वाहन को हवा से गिराकर परीक्षण किया गया। इसके लिए BMP (बख्तरबंद कार्मिक वाहन) का इस्तेमाल किया गया। यह टेस्ट लगभग असली सैन्य हालात जैसे माहौल में किया गया। ट्विन एक्सट्रैक्टर सिस्टम की मदद से भारी वाहन को संतुलित और सुरक्षित तरीके से जमीन पर उतारा गया।
रणनीतिक रूप से क्यों है यह अहम?
यह सिस्टम सेना को पहाड़ी और दूर-दराज के इलाकों में भी भारी सैन्य वाहन पहुंचाने में मदद करता है। ऐसी जगहों पर सड़क से पहुंचना मुश्किल या बहुत समय लेने वाला होता है। इस तकनीक की मदद से:
- कठिन इलाकों में तेजी से सैनिक और वाहन तैनात किए जा सकेंगे।
- आपात स्थिति में सेना जल्दी कार्रवाई कर पाएगी।
- अलग-अलग तरह के बड़े ट्रांसपोर्ट विमानों से भारी लड़ाकू वाहन उतारे जा सकेंगे।
- कुल मिलाकर यह परीक्षण सेना की ताकत बढ़ाने और देश में स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।