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Car Colour: क्या गर्मियों में काली कारें सफेद कारों से ज्यादा गर्म होती हैं? जानिए इस दावे की हकीकत

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 02 Mar 2026 11:47 PM IST
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सार

गाड़ी का रंग इस बात पर असर डाल सकता है कि सीधी धूप में पार्क करने पर कार कितनी गर्मी सोखती है। और अक्सर काले और सफेद रंग की तुलना तापमान पर उनके असर के लिए की जाती है। जानें पूरी डिटेल्स।

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Car Driving - फोटो : Freepik
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विस्तार

गर्मियों में जब कार सीधी धूप में खड़ी होती है, तो उसका रंग यह तय करने में भूमिका निभाता है कि वह कितनी गर्म होगी। खास तौर पर काले और सफेद रंग की कारों की तुलना अक्सर की जाती है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, कई कार मालिक यह जानना चाहते हैं कि क्या गहरे रंग की कारें ज्यादा गर्म हो जाती हैं। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि काला और सफेद, दोनों ही कारों के सबसे आम रंगों में गिने जाते हैं।

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काली कारें सफेद कारों से ज्यादा गर्म क्यों होती हैं?
गहरे रंग की कारें हल्के रंगों की तुलना में ज्यादा गर्मी सोखती हैं। सीधी धूप में खड़ी काली कारों की सतह का तापमान आमतौर पर सफेद कारों से ज्यादा पाया गया है।
इसका कारण सूरज की रोशनी का व्यवहार है। सूरज की किरणों में विजिबल और इंफ्रारेड रेडिएशन शामिल होता है, जो गर्मी पैदा करता है। काले जैसे गहरे रंग ज्यादातर तरंगों को सोख लेते हैं और उन्हें गर्मी में बदल देते हैं। जबकि सफेद जैसे हल्के रंग ज्यादा रोशनी को परावर्तित कर देते हैं।

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कार के अंदर का तापमान कैसे बढ़ता है?
कार के केबिन के अंदर तापमान बढ़ने की मुख्य वजह ग्रीनहाउस इफेक्ट होता है। धूप खिड़कियों से अंदर जाती है और डैशबोर्ड, सीट्स जैसी सतहों को गर्म कर देती है। यह गर्मी अंदर फंस जाती है, जिससे केबिन का तापमान तेजी से बढ़ता है, चाहे कार का बाहरी रंग कोई भी हो।
हालांकि, रिसर्च बताती है कि समान परिस्थितियों में काली कार का केबिन, सफेद कार की तुलना में कुछ डिग्री ज्यादा गर्म हो सकता है।

इंटीरियर रंग और मटीरियल का कितना असर पड़ता है?
कार के अंदर इस्तेमाल होने वाला रंग और मटीरियल भी गर्मी को काफी प्रभावित करता है। गहरे रंग का डैशबोर्ड और अपहोल्स्ट्री ज्यादा गर्मी सोखते और देर तक पकड़कर रखते हैं। कई मामलों में केबिन का रंग और मटीरियल, बाहरी पेंट से ज्यादा असर डालता है।
टिंटेड ग्लास, सनशेड्स, वेंटिलेटेड सीट्स और अच्छा एयर कंडीशनिंग सिस्टम केबिन को ठंडा रखने में ज्यादा मददगार साबित होते हैं।

रोजमर्रा के इस्तेमाल में फर्क कितना महसूस होता है?
बहुत ज्यादा गर्म दिनों में काली और सफेद कार के तापमान में कुछ डिग्री का फर्क हो सकता है। लेकिन अगर दोनों ही कारें लंबे समय तक धूप में खड़ी रहें, तो दोनों ही बेहद गर्म हो सकती हैं।
ऐसे में छांव में पार्क करना या रिफ्लेक्टिव विंडशील्ड कवर का इस्तेमाल करना, सिर्फ रंग चुनने से कहीं ज्यादा असरदार उपाय होते हैं।

गर्म इलाकों में कार खरीदते समय क्या ध्यान रखें?
गर्म क्षेत्रों में हल्के रंग की कारें तापमान कम रखने में थोड़ी मदद कर सकती हैं, लेकिन यह फायदा बहुत बड़ा नहीं होता। काली कारें आमतौर पर ज्यादा गर्मी सोखती हैं, लेकिन कुल मिलाकर केबिन का आराम कई दूसरे फैक्टर्स पर निर्भर करता है, जैसे इंटीरियर, ग्लास, और कूलिंग सिस्टम।
इसलिए कार का रंग चुनते समय सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी बातों को भी ध्यान में रखना ज्यादा समझदारी है।

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