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EV: सरकार ने पेश की नई ईवी ड्राइव टेक्नोलॉजी, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 02 Mar 2026 10:20 PM IST
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सार

सरकार ने एक नई इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी पेश की है, जिसका मकसद ईवी के जरूरी पार्ट्स की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।

India Unveils Indigenous EV Drive Technology to Reduce Imports and Boost Local Manufacturing
Electric Car - फोटो : Freepik
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विस्तार

भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के मकसद से एक नई ईवी ड्राइव टेक्नोलॉजी को पेश किया है। यह कदम देश में एडवांस पावर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमताओं को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में उठाया गया है।

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यह नई तकनीक क्या है और कहां लॉन्च की गई?
सोमवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) में 30 किलोवाट की वाइड बैंड गैप (WBG) आधारित इंडीग्रेटेड ड्राइवि सिस्टम (IDS) को लॉन्च किया गया। यह सिस्टम इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए खास तौर पर विकसित किया गया है और इसे एक स्वदेशी तकनीकी समाधान के रूप में देखा जा रहा है। 

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इस तकनीक को किसने विकसित किया है?
इस इंडीग्रेटेड ड्राइवि सिस्टम को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग, तिरुवनंतपुरम ने आईआईटी मद्रास और Lucas TVS (लुकास टीवीएस) के सहयोग से विकसित किया है। यह परियोजना नेशनल मिशन ऑन पावर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी के तहत लाई गई है। जिसकी जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने दी है।

30 kW कैटेगरी भारत के लिए क्यों अहम है?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, 30 kW पावर कैटेगरी भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट के लिए बेहद उपयुक्त है। इसमें कॉम्पैक्ट कारें और शेयर्ड मोबिलिटी फ्लीट्स शामिल हैं, जहां किफायती और कुशल पावरट्रेन की मांग तेजी से बढ़ रही है।

मौजूदा ईवी सिस्टम में समस्या क्या है?
फिलहाल भारत में इस्तेमाल होने वाले हाई-परफॉर्मेंस ईवी पावरट्रेन सिस्टम और सेमीकंडक्टर आधारित कई अहम कंपोनेंट्स का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है। इससे लागत बढ़ती है और सप्लाई चेन पर विदेशी निर्भरता बनी रहती है।

स्वदेशी IDS से क्या फायदा होगा?
सरकार का मानना है कि यह स्वदेशी सिस्टम आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा और लोकल मैन्युफैक्चरिंग के जरिए लागत घटेगी। साथ ही, यह उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं के अनुरूप बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा देगा।

Integrated Drive System की बनावट क्या खास है?
यह सिस्टम इलेक्ट्रिक मोटर और इन्वर्टर को एक ही कॉम्पैक्ट यूनिट में जोड़ता है। पारंपरिक सेटअप में ये दोनों अलग-अलग होते हैं। जबकि इंटीग्रेटेड डिजाइन से पावर डेंसिटी बेहतर होती है और जगह की जरूरत भी कम पड़ती है। यह इसे आधुनिक ईवी प्लेटफॉर्म्स के लिए ज्यादा उपयुक्त बनाता है। 

भारत के EV इकोसिस्टम पर इसका क्या असर पड़ेगा?
सरकार के अनुसार, ऐसी स्वदेशी ड्राइव सिस्टम्स को बड़े स्तर पर अपनाने से भारत की ईवी सप्लाई चेन मजबूत होगी। इससे पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित हार्डवेयर निर्माण से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर आधारित इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तकनीकों में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी बढ़ने की उम्मीद है।

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