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Highway Speed Limit: अब नेशनल हाइवे पर नहीं होगा कंफ्यूजन, केंद्र तय करेगा रफ्तार; चालान से मिल सकती है राहत

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Mon, 02 Mar 2026 02:04 PM IST
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सार

National Highway Speed Limit India: राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग जगहों पर बदलती स्पीड लिमिट से यात्रियों को जल्द राहत मिल सकती है। क्योंकि सड़क मंत्रालय ने केंद्र से राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए स्पीड लिमिट तय करने की मांग की है। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि नेशनल हाइवे पर स्पीड लिमिट तय करने का अधिकार केंद्र के पास हो, ताकि राज्यों और स्थानीय एजेंसियों की ओर से की जाने वाली अलग-अलग अधिसूचनाओं से पैदा होने वाला भ्रम खत्म किया जा सके। इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 112 और 113 में संशोधन का सुझाव दिया गया है।
 

Highway Speed Limit: Centre Standardize Rules; Relief for Drivers from Sudden Speeding Fines and Confusion
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

वर्तमान में मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे सभी श्रेणियों की सड़कों के लिए अधिकतम स्पीड लिमिट अधिसूचित करता है। हालांकि, राज्य सरकारों और स्थानीय पुलिस को यह अधिकार है कि वे अपने क्षेत्र में इन सीमाओं को कम कर सकें। यही वजह है कि कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग के किसी हिस्से खासतौर पर शहरी क्षेत्रों से गुजरते खंड पर स्पीड लिमिट 100 किमी प्रति घंटा से घटाकर 60–70 किमी प्रति घंटा कर दी जाती है। नियमित रूप से उस मार्ग पर यात्रा न करने वाले ड्राइवर इन बदलावों को नोटिस नहीं कर पाते और चालान का सामना करते हैं।
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कानून में क्या बदलाव प्रस्तावित?
सड़क परिवहन मंत्रालय मोटर व्हीकल एक्ट (एमवीए) की धारा 112 और 113 में संशोधन की तैयारी कर रहा है।
  • धारा 112: वर्तमान में यह राज्यों को न्यूनतम और अधिकतम स्पीड लिमिट तय करने का अधिकार देती है। संशोधन के बाद, नेशनल हाइवे के लिए यह शक्ति केंद्र के पास आ जाएगी।
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  • धारा 113: यह वाहनों के वजन और उपयोग पर प्रतिबंध से जुड़ी है, इसमें भी केंद्र की भूमिका स्पष्ट की जाएगी।
  • राज्यों का अधिकार: राज्य सरकारें अपने अधिकार क्षेत्र की अन्य सड़कों जैसे स्टेट हाईवे या जिला सड़कें के लिए नियम तय करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेंगी।
प्रस्ताव के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के लिए स्पीड लिमिट तय करने का अधिकार केंद्र के पास रहेगा। जिससे राज्य सरकारें अपनी राज्य सड़कों और अन्य मार्गों पर नियम तय करने के लिए स्वतंत्र रहेंगी। 

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क्या ये बदलाव जरूरी है?
हां, एक्सपर्ट्स इसे जरूरी मान रहे हैं क्योंकि इससे नियमों में एकरूपता आएगी और ड्राइवरर्स के लिए अनुपालन आसान होगा। अभी अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्ग के अलग हिस्सों पर स्पीड लिमिट बदल जाने से भ्रम की स्थिति बनती है। कई बार स्थानीय स्तर पर सीमा कम कर दी जाती है, जिसकी जानकारी नियमित रूप से उस मार्ग पर यात्रा न करने वाले लोगों को नहीं होती और उन्हें अनावश्यक चालान भरना पड़ता है। 

माना जा रहा है एक समान नीति लागू होने से ऐसी अस्पष्टता कम होगी, जुर्मानों में कमी आएगी और ट्रैफिक मॉनिटरिंग अधिक प्रभावी हो सकेगी। नेशनल हाईवे (लैंड एंड ट्रैफिक) कंट्रोल एक्ट के तहत हाइवे प्रशासन के पास पहले से ही ट्रैफिक प्रबंधन और अतिक्रमण हटाने के अधिकार हैं, इसलिए प्रस्तावित संशोधन से जिम्मेदारियों और अधिकारों की स्पष्ट सीमा तय हो जाएगी।

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
अगर यह संशोधन लागू होता है तो यात्रियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट पूरे देश में अधिक समान और स्पष्ट हो सकती है। अचानक बदलती स्पीड सीमा की समस्या कम होगी और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान नियमों को समझना तथा उनका पालन करना आसान हो जाएगा। इससे ड्राइविंग अनुभव अधिक व्यवस्थित और अनुमानित बनेगा।

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एक्सपर्ट की राय: हाइवे प्रशासन होगा मजबूत
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, नेशनल हाइवे (लैंड एंड ट्रैफिक) कंट्रोल एक्ट के तहत पहले से ही हाइवे प्रशासन को ट्रैफिक प्रबंधन का अधिकार है। स्पीड लिमिट को सेंट्रलाइज करने से यह प्रशासन और अधिक प्रभावी ढंग से काम कर पाएगा। इससे न केवल ट्रैफिक स्मूद होगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है क्योंकि ड्राइवर को पता होगा कि उसे किस रफ्तार पर स्थिर रहना है।

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