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Low Floor E- Bus: इस मेट्रो शहर की संकरी गली से अब सफर और भी आसान, जल्द आ रही हैं सैकड़ों मिनी इलेक्ट्रिक बसें

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Sun, 01 Mar 2026 12:15 PM IST
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सार

Low floor AC electric bus India: इस शहर में  मेट्रो यात्रियों की फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए 220 इलेक्ट्रिक लो-फ्लोर बसों का टेंडर जारी किया है। छोटी और कॉम्पैक्ट साइज की ये बसें अब कॉलोनियों के अंदर तक जाकर यात्रियों को सीधे मेट्रो स्टेशन तक पहुंचाएंगी, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी। जानिए इसके बारे में विस्तार से...
 

Greener, Smarter, Faster: 220 Mini Electric AC Buses  Bridge Gap Between Your Home Metro
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार

चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) के यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन  (एमटीसी) ने 220 नई लो-फ्लोर एयर-कंडीशंड  इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और संचालन के लिए आधिकारिक तौर पर टेंडर आमंत्रित किए हैं। यह कदम शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह से डिजिटल और ग्रीन बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
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भीड़भाड़ और संकरी सड़कों का स्मार्ट समाधान
अक्सर बड़ी बसों को शहर की अंदरूनी गलियों में मुड़ने और चलने में दिक्कत होती थी, जिसका समाधान एमटीसी ने इन नई बसों के रूप में निकाला है:
  • कॉम्पैक्ट साइज: फ्लीट में 150 बसें (5 मीटर लंबाई) और 70 बसें (7 मीटर लंबाई) शामिल की गई हैं।
  • गली-गली पहुंचेगी सर्विस: इन बसों का छोटा आकार इन्हें भीड़भाड़ वाले रिहायशी इलाकों और संकरे कमर्शियल जोन्स में आसानी से चलने की अनुमति देगा।
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  • डेडिकेटेड फीडर सर्विस: इनका मुख्य काम यात्रियों को उनके घर या ऑफिस से उठाकर सीधे मेट्रो स्टेशन तक छोड़ना होगा।
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बुजुर्गों और दिव्यांगों का रखा गया खास ख्याल
इन बसों को लो-फ्लोर डिजाइन के साथ तैयार किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा बुजुर्ग नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों को होगा, जिन्हें बस में चढ़ने और उतरने में कोई परेशानी नहीं होगी। पूरी तरह से वातानुकूलित होने की वजह से चेन्नई की गर्मी में भी सफर करना आसान हो सकता है।

पर्यावरण और ट्रैफिक के लिए वरदान
यह पहल केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी जरूरी है:
  • प्रदूषण में कमी: इलेक्ट्रिक होने के की वजह से ये बसें जीरो एमिशन पर काम करेंगी।
  • ट्रैफिक जाम से राहत: बेहतर फीडर सर्विस होने से लोग अपनी कारों और बाइक के बजाय सार्वजनिक परिवहन का चुनाव करेंगे, जिससे सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम होगा।
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दिल्ली की तर्ज पर तैयार होगा मॉडल
एक्सपर्ट्स के अनुसार चेन्नई का यह मॉडल दिल्ली और बेंगलुरु जैसे महानगरों की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है, जहां फीडर बसों ने मेट्रो की राइडरशिप में 20-30 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। इनका लक्ष्य है कि साल 2026 के अंत तक चेन्नई के अधिकांश मेट्रो स्टेशनों को इन मिनी-इलेक्ट्रिक बसों से कवर कर लिया जाए।

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