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मॉडिफिकेशन: थार को फैंसी दिखाने के चक्कर में नुकसान! एक्सीडेंट के बाद ₹4 लाख का इंश्योरेंस क्लेम हुआ रिजेक्ट

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीे Published by: Suyash Pandey Updated Mon, 22 Jun 2026 02:57 PM IST
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सार

Mahindra Thar Insurance Claim Rejected Due To Modification: कार को मॉडिफाई करवाने का शौक कई बार भारी पड़ जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ पंजाब के एक महिंद्रा थार मालिक के साथ। इनका करीब ₹4 लाख का इंश्योरेंस क्लेम इसलिए रिजेक्ट हो गया क्योंकि इन्होंने गाड़ी में किए गए बदलावों की जानकारी बीमा कंपनी को नहीं दी थी।

Insurance Claim Rejected After Car Modification: How a Mahindra Thar Owner Lost ₹4 Lakh After an Accident
महिंद्रा थार मॉडिफिकेशन - फोटो : एआई
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विस्तार

आजकल कारों को मॉडिफाई कराने का काफी क्रेज है। चौड़े टायर, नई लाइट्स या फिर गाड़ी का कलर बदलवाने का शौक कई लोगों को होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि आपका यह शौक लाखों रुपये का नुकसान करवा सकता है?



देश में ज्यादातर कार मालिकों को यह जानकारी ही नहीं है कि गाड़ी में किया गया अपनी मर्जी का बदलाव आपका कार इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट करवा सकता है। हाल ही में एक महिंद्रा थार मालिक के साथ ऐसा ही हुआ, आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।

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क्या है पूरा मामला?

मान लीजिए आपके पास 17 लाख रुपये की महिंद्रा थार है और आपने 42 हजार रुपये देकर उसका फुल इंश्योरेंस भी करा रखा है। अचानक आपकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाता है, जिसमें करीब 3.8 लाख रुपये का नुकसान होता है। आप बेफिक्र होकर बीमा कंपनी को क्लेम के लिए बुलाते हैं। सर्वेयर आता है, फोटो लेता है, लेकिन 7 दिन बाद आपको पता चलता है कि आपका क्लेम रिजेक्ट हो गया है।

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अब 3.8 लाख रुपये का पूरा खर्च आपको अपनी जेब से भरना होगा। पंजाब के रहने वाले हरप्रीत सिंह के साथ ठीक ऐसा ही हुआ। यह बीमा कंपनी की मनमानी नहीं, बल्कि कार मालिक की एक छोटी सी लापरवाही का नतीजा था।


किन बदलावों की वजह से रिजेक्ट हुआ क्लेम?

हरप्रीत सिंह ने अपनी थार को कूल लुक देने के लिए उसमें कुछ आफ्टर-मार्केट मॉडिफिकेशन कराए थे:

  • कंपनी से आई हेडलाइट को ब्लैक कलर से पेंट करवा दिया।
  • गाड़ी में नई LED DRL लाइट्स लगवा लीं।
  • बोनट पर स्नोर्कल लगवा लिया।

गाड़ी के रंग को बदलने के लिए उस पर मैट ऑलिव रंग की फिल्म/रैप लगवा ली।


बीमा कंपनी ने क्या कहा?

क्लेम रिजेक्ट करते हुए बीमा कंपनी ने साफ कहा कि, "एक्सीडेंट के वक्त गाड़ी की जो हालत थी, वह हमारी पॉलिसी में दर्ज डिटेल्स से बिल्कुल अलग थी। पॉलिसी लेते समय हमें इन बदलावों के बारे में नहीं बताया गया था।"


नियम क्या कहता है?

बीमा अधिनियम की धारा 64VB के मुताबिक, अगर आप गाड़ी में कोई भी ऐसा बदलाव करते हैं जो फैक्ट्री-फिटेड चीजों से अलग है, तो आपको उसकी जानकारी तुरंत बीमा कंपनी को देनी होगी। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो कोई जानकारी छिपाने के जुर्म में आपकी पॉलिसी अमान्य हो जाएगी। ऐसे मामलों में कंज्यूमर कोर्ट भी आपकी कोई मदद नहीं कर पाएगा।


कार मालिकों के लिए क्या है सबक?

कार में बड़े अलॉय व्हील लगाना हो, कलर वाली फिल्म लगवानी हो या लाइट्स बदलनी हों- मॉडिफिकेशन कराने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसका सही तरीका जानना जरूरी है:

  • इंश्योरेंस कंपनी को बताएं: गाड़ी में कोई भी बड़ा बदलाव कराने के बाद सबसे पहले अपनी बीमा कंपनी को सूचित करें।
  • प्रीमियम अपडेट कराएं: बीमा कंपनी इन बदलावों के हिसाब से आपके सिस्टम में डिटेल्स अपडेट करेगी और हो सकता है कि आपका प्रीमियम थोड़ा बढ़ जाए। लेकिन इससे आपका क्लेम हमेशा सुरक्षित रहेगा।
  • RTO से मंजूरी लें: गाड़ी का रंग बदलने जैसे बड़े बदलावों के लिए आरटीओ (RTO) की परमिशन लेना भी कानूनी रूप से अनिवार्य है।

गाड़ी में नए बदलाव करना हर किसी को अच्छा लगता है लेकिन अगर सही नियमों का पालन नहीं किया, तो एक्सीडेंट के वक्त यही शौक आपको रुला भी सकता है। इसलिए सतर्क रहें और अपनी बीमा कंपनी को हमेशा अपडेट रखें।

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