बुक कराने जा रहे हैं नई कार, तो पहले पढ़ लें यह जरूरी खबर, इस वजह से डिलीवरी के लिए करना पड़ सकता है लंबा इंतजार
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के पास इस समय 2.15 लाख बुकिंग हैं। वहीं ह्यूंदै मोटर के पास एक लाख, किआ मोटर्स के पास 75 हजार यूनिट्स की एडवांस बुकिंग हो चुकी है...
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लगभग पांच लाख लोग अपनी कारों की डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं। इनमें सेडान, हैचबैक और एसयूवी बुक करने वाले ग्राहक भी हैं। लेकिन प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने के एलान के बाद भी वाहन निर्माता कंपनियों के पसीने छूट रहे हैं। मांग भी है लेकिन गाड़ियों की शॉर्टेज है और ऑटोमोबाइल कंपनियों को कूछ सूझ नहीं रहा है, क्योंकि जरूरी सामान उनके पास नहीं है, जिसका असर उत्पादन पर पड़ रहा है।
कंपनियों ने बंद कर दिया था प्रोडक्शन
दरअसल ऑटोमोबाइल कंपनियों के पास स्टील और सेमी कंडक्टर चिप की शॉर्टेज हो गई है, वहीं यह चिप से आयात की जाती है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में बन रही नई मॉर्डन कारों में इस सेमीकंडक्टर चिप की काफी जरूरत होती है। वहीं डिलीवरी में देरी की एक और वजह है कि क्योंकि लगभग सभी कार कंपनियों ने दिसंबर के मध्य से लेकर मध्य जनवरी तक अपनी प्रोडक्शन लाइन बंद कर दी थी और इन दिनों अब वे पुराना बैकलॉग निपटाने में लगे हुए हैं।
नौ महीने तक की वेटिंग
दिसंबर में जहां डीलरों के पास जहां इंनवेंट्री की कमी हो गई थी, वहीं अब उसमें थोड़ा सुधार आ रहा है, लेकिन मांग को पूरा करने लायक हालात अभी भी नहीं हैं। अंदाजा लगा सकते हैं ग्राहकों को महिंद्रा थार के लिए नौ महीने, ह्यूंदै क्रेटा सात महीने, मारुति अर्टिगा और टाटा अलट्रोज के लिए 6 से 8 महीने, ह्यूंदै i20 और किआ सोनेट के लिए के लिए पांच महीने तक का इंतजार करना पड़ रहा है। जबकि दूसरे पॉपुलर मॉडल्स के लिए यह इंतजार 2 से 6 महीने तक का है।मारुति के पास सबसे ज्यादा बुकिंग
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के पास इस समय 2.15 लाख बुकिंग हैं। वहीं ह्यूंदै मोटर के पास 1 लाख, किआ मोटर्स के पास 75 हजार यूनिट्स की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा और निसान मोटर के पास 30 से 50 हजार यूनिट्स का बैकलॉग है। वहीं डीलर्स के पास पिछले छह माह से एक महीने से कम का स्टाक है। उनके लिए भी मैनेज करना मुश्किल हो रहा है। जनवरी के आखिर तक इनवेंट्री 1.45 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई थी, जो 15 दिन की रिटेल बिक्री के लिए पर्याप्त थी, वहीं दिसंबर में यह मात्र 70 हजार यूनिट थी।
अंदाजा लगा सकते हैं कि कंपनियों के लिए मैनेज करना मुश्किल हो रहा था कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के पास दिसंबर के आखिर तक कंपनी के पास मात्र 21 हजार यूनिट्स की इनवेंट्री बची थी। मारुति के सूत्रों का कहना है कि त्योहार के बाद से मांग अभी भी बनी हुई है, जिसके चौथी तिमाही तक जारी रहने की उम्मीद है लेकिन डीलरों के पास इनवेंट्री की कमी है क्योंकि मांग अभी सप्लाई और ओईएम (ऑरिजनल इक्विमेंट मैन्यूफैक्चरर्स) के बीच झूल रही है।
क्या है ये सेमीकंडक्टर चिप
वहीं चीन, ताइवान और दूसरे यूरोपीय देशों में अभी भी चिप की शॉर्टेज है। चिप या सेमी कंडक्टर चिप में इलेक्ट्रिक सर्किट होता है, जिसमें सेमीकंडक्टर वेफर पर दूसरे कंपोनेंट्स जैसे ट्रांजिस्टर और वायरिंग होती है। एक डिवाइस में कई सेमीकंडक्टर चिप होती हैं, जो एक इंटीग्रेटेड सर्किट (आईसी) बनाती हैं, जो कई गैजेट्स और इलेक्ट्रिक डिवाइसेज में काम आता है। वहीं मॉर्डन कारों में इलेक्ट्रिक सर्किट की भरमार होती है, क्योंकि कारों में आ रहे लेटेस्ट फीचर इन्हीं पर बेस्ड होते हैं। यहां तक कि इंजन परफॉरमेंस, ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग जैसे फीचर भी इन्हीं के जरिए काम करते हैं। हालांकि चिप्स की शॉर्टेज से पूरी दुनिया की ऑटो इंडस्ट्री परेशान है, भारत इसमें अकेला नहीं है।
क्यों हो रही है शॉर्टेज
वहीं बड़ी बात यह है कि इन चिप्स की शॉर्टेज क्यों हो रही है। जैसा कि पहले बताया गया है कि ये सेमीकंडक्टर चिप हर लेटेस्ट डिवाइस और गैजेट की जरूरत हैं। महामारी के दौरान कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन आदि की मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई, जिससे चिप मेकर्स के ऊपर बोझ बढ़ गया और सप्लाई में दिक्कत शुरू हो गई। कोरोना वायरस की वजह से सेमीकंडक्टर चिप के प्रोडक्शन पर असर पड़ा, क्योंकि अभी भी कई कंपनियां मैनपावर की शॉर्टेज से जूझ रही हैं। जिसका असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी पड़ना लाजिमी है।
महंगी हो सकती हैं कारें
वहीं देश की कार कंपनियां चीन, ताइवान, डेनमार्क और जर्मनी आदि देशों से ये चिप आयात करती रही हैं। जिसका असर ग्राहकों को होने वाली कारों की डिलीवरी पर पड़़ रहा है। हालांकि कई देशों की सरकारों ने इस समस्या से निजात पाने के लिए देश में ही चिप निर्माण का फैसला किया है ताकि प्रोडक्शन बढ़ाया जा सके। वहीं चिप निर्माता महामारी और आर्थिक दिक्कतों का हवाला देते हुए चिप निर्माण की कीमतें बढ़ाने की बात कह रहे हैं, वहीं अगल चिप निर्माता ये कदम उठाते हैं, तो स्वाभाविक तौर पर इसका असर गाड़ियों की कीमतों पर पड़ेगा और कंपनियां वाहनों की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर हो सकती हैं।