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Helmet: सड़क सुरक्षा पर बड़ा कदम, इस राज्य में टोल प्लाजा पर हेलमेट अनिवार्य, रडार वाहनों से होगी सख्त निगरानी

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 13 Feb 2026 02:24 PM IST
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सार

महाराष्ट्र में सड़क हादसों में होने वाली 77 प्रतिशत मौतें दोपहिया वाहन चलाने वालों और पैदल चलने वालों की होती हैं। इसलिए राज्य के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने ऐसे मामलों को रोकने के लिए एक खास कैंपेन शुरू करने का फैसला किया है।

No helmet, no toll crossing Maharashtra launches drive to curb road accident deaths
Helmet - फोटो : Adobe stock
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विस्तार

महाराष्ट्र में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों में 77 प्रतिशत हिस्सेदारी दोपहिया सवारों और पैदल यात्रियों की है। इसी चिंताजनक आंकड़े को देखते हुए राज्य परिवहन विभाग ने दुर्घटना में होने वाली मौतों को 2030 तक 50 प्रतिशत से अधिक घटाने के लक्ष्य के साथ एक विशेष अभियान शुरू करने का फैसला किया है।
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यह अभियान कब और क्यों शुरू किया गया?
"सेव टू-व्हीलर राइडर्स एंड पेडेस्ट्रीयंस 2026" नामक यह अभियान जनवरी के आखिरी सप्ताह में हुई सड़क सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद शुरू किया गया। बैठक में पूरे राज्य के दुर्घटना आंकड़ों का विश्लेषण किया गया और मौतों में कमी लाने के लिए कई कड़े कदम तय किए गए। इसके बाद सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) को तुरंत नए निर्देश लागू करने को कहा गया। 
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बिना हेलमेट टोल पार करना क्यों होगा मुश्किल?
अभियान के तहत एक अहम निर्देश यह है कि हेलमेट के बिना दोपहिया सवारों को टोल बूथ पार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आमतौर पर टोल प्लाजा पर दोपहिया वाहनों के लिए अलग लेन और मुफ्त प्रवेश होता है। अब सभी टोल प्लाजा के दोनों ओर "नो हेलमेट, नो एंट्री" के बोर्ड लगाए जाएंगे। नियम के पालन के लिए रडार-आधारित इंटरसेप्टर वाहन तैनात किए जाएंगे।

 

ये निर्देश किसने जारी किए?
राज्य परिवहन आयुक्त विवेक भीमनवार ने 11 फरवरी को सभी आरटीओ को इस संबंध में पत्र जारी किया। पत्र में दिए गए अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में महाराष्ट्र में 36,450 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं।

दुर्घटनाओं में जान-माल का नुकसान कितना हुआ?
पत्र के मुताबिक, इन हादसों में 15,549 लोगों की मौत हुई, जबकि 32,147 से अधिक लोग घायल हुए। इनमें से 57 प्रतिशत मृतक दोपहिया सवार और 21 प्रतिशत पैदल यात्री थे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर 2030 तक मौतों में 50 प्रतिशत से अधिक कमी का लक्ष्य तय किया गया है। 

दुर्घटना-प्रवण इलाकों की पहचान कैसे होगी?
परिवहन विभाग पिछले तीन वर्षों के दुर्घटना-प्रवण और संवेदनशील स्थानों की मैपिंग करेगा। राज्य व राष्ट्रीय राजमार्गों सहित प्रमुख सड़कों के दुर्घटना आंकड़े गूगल मैप्स पर प्लॉट कर उनकी गंभीरता का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर प्राथमिकता वाले इलाकों में रोकथाम उपाय लागू होंगे।

हाईवे पर हेलमेट नियम कैसे सख्त होगा?
जिन जिलों में दोपहिया दुर्घटनाएं सबसे अधिक हैं, वहां की तीन प्रमुख राज्य या राष्ट्रीय राजमार्गों पर हेलमेट अनिवार्य किया जाएगा। इसके बाद अन्य संवेदनशील सड़कों को इस दायरे में लाया जाएगा। आरटीओ को हर साल इन जिलों की सभी दुर्घटनाओं की एफआईआर जमा कर रोड सेफ्टी सेल को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

 

पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या कदम होंगे?
जहां पैदल यात्रियों के हादसे अधिक होते हैं, वहां जेब्रा क्रॉसिंग की पेंटिंग, असुरक्षित क्रॉसिंग रोकने के लिए सुरक्षात्मक फेंसिंग, फुट ओवरब्रिज या सबवे, और ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम लगाए जाएंगे। साथ ही सड़क इंजीनियरिंग की खामियों, जैसे अवैध डिवाइडर कट, फुटपाथ की कमी या गलत कनेक्टिंग रोड, की पहचान कर सुधार किया जाएगा।

 

ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में क्या बदलाव होंगे?
आरटीओ में कैमरा निगरानी में ड्राइविंग टेस्ट पर जोर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, आधुनिक टेस्ट सेंटरों में अभी लगभग 30 प्रतिशत आवेदक फेल होते हैं। और इस मानक को बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

किन एजेंसियों को अभियान में जोड़ा गया है?
इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम, नगर परिषद, ग्राम पंचायतें, लोक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य विभागों को भी सहयोग के लिए शामिल किया गया है। परिवहन विभाग पूरे राज्य में इन उपायों की मासिक समीक्षा करेगा।

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