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Delhi EV policy: क्या 2028 से दिल्ली में बंद हो जाएगी पेट्रोल बाइक की बिक्री? जानें सरकार का क्या है नया प्लान
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Thu, 16 Apr 2026 03:14 PM IST
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सार
Delhi EV policy: राजधानी दिल्ली एक बड़े बदलाव की तैयारी में है। सरकार की नई ड्राफ्ट ईवी पॉलिसी 2026-2030 के तहत प्रस्ताव रखा गया है कि 1 अप्रैल 2028 से शहर में सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e2W) ही रजिस्टर किए जाएंगे।यानी पेट्रोल वाली बाइक या स्कूटी का दौर खत्म होने की कगार पर है। इस लेख में जानिए इस बदलाव का कारण क्या है? और अगर ऐसा होता है, तो इसमें कौन-कौन सी चुनौतियां आ सकती हैं...
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
Electric two-wheeler mandate: दिल्ली में हर साल करीब 4.5 लाख टू-व्हीलर बिकते हैं। अब सरकार चाहती है कि 2028 तक इनमें से सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ही सड़कों पर उतरें। जिससे राजधानी में प्रदूषण कम हो सके, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे काफी चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि अभी न तो हमारे पास पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर है और न ही इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का अच्छा विकल्प मौजूद है।
क्यों है यह फैसला इतना बड़ा और चुनौतीपूर्ण?
दिल्ली हर साल भारत के कुल टू-व्हीलर वॉल्यूम का करीब तीन प्रतिशत हिस्सा रजिस्टर करती है। इतने बड़े पैमाने पर एक झटके में पूर्ण विद्युतीकरण यानी की फुल इलेक्ट्रिफिकेशन करना कोई मामूली बात नहीं है। अभी दिल्ली में करीब 1,919 चार्जिंग स्टेशन हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हर बाइक इलेक्ट्रिक हो गई, तो चार्जिंग स्टेशंस पर लगने वाली भीड़ किसी मेले से कम नहीं होगी। इसलिए सरकार को पहले बिजली ग्रिड और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहद मजबूत बनाना होगा।
ईवी मार्केट की मौजूदा स्थिति
ईवी मार्केट की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो FY26 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e2W) की बिक्री 14 लाख यूनिट्स के पार पहुंच चुकी है, जो सालाना आधार पर करीब 22% की मजबूत वृद्धि दिखाती है। इसके साथ ही मार्केट में इसकी हिस्सेदारी (पेनेट्रेशन) बढ़कर 6.5% हो गई है।
इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का अभाव
इसके अलावा लोग अक्सर लंबी यात्रा के लिए पेट्रोल मोटरसाइकिल पसंद करते हैं, लेकिन बाजार में फिलहाल भरोसेमंद इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों की बहुत कमी है। वहीं, बैटरी डिस्पोजल भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। इसके लिए अगर सही सिस्टम नहीं बना, तो ये बैटरियां भविष्य में प्रदूषण का नया कारण बन सकती हैं।
क्या कहती है ऑटो इंडस्ट्री?
इस फैसले पर सोयायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी की SIAM के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा का कहना है कि सरकार को पाबंदी लगाने के बजाय सक्षम बनाने पर जाेर देना चाहिए। अगर चार्जिंग की सुविधा व इलेक्ट्रिक-पेट्रोल के दामों में बराबरी हो जाए, तो लोग खुद ही इलेक्ट्रिक की तरफ आएंगे। वहीं, कई एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि अगर ग्राहकों पर जबरन पाबंदी लगाई गई, तो जनता में विरोध भी बढ़ सकता है। आखिर जो लोग लंबी दूरी की यात्रा तय करते हैं और उनके पास कार नहीं है, तो उनके लिए इलेक्ट्रिक में फिलहाल उतने अच्छे विकल्प नहीं हैं।
चीन के ग्वांगझू शहर का उदाहरण देते हुए एक विशेषज्ञ ने कहा कि अगर सरकार सही योजना और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सख्ती करे, तो प्रदूषण कम करने का लक्ष्य नामुमकिन नहीं है, चीन ने भी यही रास्ता अपनाकर प्रदूषण पर काबू पाया था। उनका कहना है कि हालांकि सरकार ने अपनी पॉलिसी में 30,000 चार्जिंग पॉइंट्स लगाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन लक्ष्य हासिल करने के लिए सिर्फ घोषणा काफी नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहनों को सस्ता बनाना, चार्जिंग स्टेशन घर-घर तक पहुंचाना और बैटरी रीसाइकलिंग के लिए एक पुख्ता इंतजाम करना होगा।
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क्यों है यह फैसला इतना बड़ा और चुनौतीपूर्ण?
दिल्ली हर साल भारत के कुल टू-व्हीलर वॉल्यूम का करीब तीन प्रतिशत हिस्सा रजिस्टर करती है। इतने बड़े पैमाने पर एक झटके में पूर्ण विद्युतीकरण यानी की फुल इलेक्ट्रिफिकेशन करना कोई मामूली बात नहीं है। अभी दिल्ली में करीब 1,919 चार्जिंग स्टेशन हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हर बाइक इलेक्ट्रिक हो गई, तो चार्जिंग स्टेशंस पर लगने वाली भीड़ किसी मेले से कम नहीं होगी। इसलिए सरकार को पहले बिजली ग्रिड और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहद मजबूत बनाना होगा।
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ईवी मार्केट की मौजूदा स्थिति
ईवी मार्केट की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो FY26 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e2W) की बिक्री 14 लाख यूनिट्स के पार पहुंच चुकी है, जो सालाना आधार पर करीब 22% की मजबूत वृद्धि दिखाती है। इसके साथ ही मार्केट में इसकी हिस्सेदारी (पेनेट्रेशन) बढ़कर 6.5% हो गई है।
इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का अभाव
इसके अलावा लोग अक्सर लंबी यात्रा के लिए पेट्रोल मोटरसाइकिल पसंद करते हैं, लेकिन बाजार में फिलहाल भरोसेमंद इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों की बहुत कमी है। वहीं, बैटरी डिस्पोजल भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। इसके लिए अगर सही सिस्टम नहीं बना, तो ये बैटरियां भविष्य में प्रदूषण का नया कारण बन सकती हैं।
क्या कहती है ऑटो इंडस्ट्री?
इस फैसले पर सोयायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी की SIAM के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा का कहना है कि सरकार को पाबंदी लगाने के बजाय सक्षम बनाने पर जाेर देना चाहिए। अगर चार्जिंग की सुविधा व इलेक्ट्रिक-पेट्रोल के दामों में बराबरी हो जाए, तो लोग खुद ही इलेक्ट्रिक की तरफ आएंगे। वहीं, कई एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि अगर ग्राहकों पर जबरन पाबंदी लगाई गई, तो जनता में विरोध भी बढ़ सकता है। आखिर जो लोग लंबी दूरी की यात्रा तय करते हैं और उनके पास कार नहीं है, तो उनके लिए इलेक्ट्रिक में फिलहाल उतने अच्छे विकल्प नहीं हैं।
चीन के ग्वांगझू शहर का उदाहरण देते हुए एक विशेषज्ञ ने कहा कि अगर सरकार सही योजना और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सख्ती करे, तो प्रदूषण कम करने का लक्ष्य नामुमकिन नहीं है, चीन ने भी यही रास्ता अपनाकर प्रदूषण पर काबू पाया था। उनका कहना है कि हालांकि सरकार ने अपनी पॉलिसी में 30,000 चार्जिंग पॉइंट्स लगाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन लक्ष्य हासिल करने के लिए सिर्फ घोषणा काफी नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहनों को सस्ता बनाना, चार्जिंग स्टेशन घर-घर तक पहुंचाना और बैटरी रीसाइकलिंग के लिए एक पुख्ता इंतजाम करना होगा।
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