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PM E-Drive Scheme: EV खरीदना हुआ और सस्ता, बिना दफ्तरों के चक्कर काटे शोरूम से ही सब्सिडी पाने का पूरा प्रोसेस

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Mon, 30 Mar 2026 11:48 AM IST
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सार

PM E-Drive Scheme Updated: भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को सस्ती कीमत पर आम लोगों तक पहुंचाने के लिए अपनी पीएम ई-ड्राइव योजना को अपडेट कर दिया है। इसके तहत अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर की खरीद पर ज्यादा सब्सिडी मिल रही है। इस लेख में समझते हैं कि योजना की नई डेडलाइन क्या है, सब्सिडी के लिए गाड़ियों की प्राइस लिमिट क्या तय की गई है और बिना किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटे, सीधे शोरूम पर ई-वाउचर के जरिए डिस्काउंट पाने का पूरा स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस क्या है।

PM E-Drive Scheme Updated: Govt Extends EV Subsidy Deadline, Boosts Targets to Promote Electric Vehicles
पीएम ई-ड्राइव स्कीम - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए अपनी PM E-Drive (पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट) योजना को अपडेट कर दिया है। इसे अब पहले से ज्यादा आसान और असरदार बनाया गया है। करीब 10,900 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना के तहत अब ज्यादा लोगों को इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर सब्सिडी मिलेगी। आइए समझते हैं कि यह योजना क्या है और आप इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं।

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पीएम ई-ड्राइव योजना क्या है?

यह सरकार की एक खास पहल है जिसका मकसद देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाना, नए चार्जिंग स्टेशन बनाना और प्रदूषण को कम करना है। यह योजना मुख्य रूप से 1 अक्तूबर 2024 से शुरू की गई थी। इसके जरिए सरकार आम लोगों को सस्ती कीमत पर ईवी उपलब्ध कराना चाहती है ताकि पेट्रोल-डीजल पर हमारी निर्भरता कम हो सके।

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योजना में हुए बड़े बदलाव और नई डेडलाइन

भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ाने के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना के नियमों और समयसीमा में महत्वपूर्ण विस्तार किया है। अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वाले ग्राहक 31 जुलाई 2026 तक सब्सिडी का लाभ उठा सकेंगे। सरकार ने इसके तहत कवर होने वाले वाहनों का लक्ष्य भी 14 लाख से बढ़ाकर 24.8 लाख कर दिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा ले सकें। वहीं, ई-रिक्शा और ई-कार्ट के लिए इस राहत को और भी लंबा खींचते हुए 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है, जिसका नया लक्ष्य अब 39 हजार से ज्यादा वाहनों का है।


हालांकि, खरीदारों को एक बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि भारी उद्योग मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अगर योजना के लिए आवंटित 10,900 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित समय से पहले खत्म हो जाता है तो इस स्कीम को वहीं रोक दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में, फंड खत्म होने के बाद सब्सिडी के लिए किया गया कोई भी नया दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पीएम ई-ड्राइव योजना के लिए पात्रता 

इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने स्पष्ट मापदंड निर्धारित किए हैं, ताकि सही श्रेणी के वाहनों और खरीदारों तक सब्सिडी का फायदा पहुंच सके। इस योजना के दायरे में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर (जैसे ई-रिक्शा, ई-कार्ट और L5 कैटेगरी) के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई के लिए उपयोग होने वाली ई-बसें, ई-एम्बुलेंस और ई-ट्रक को भी शामिल किया गया है।

महत्वपूर्ण बात ये है कि यह सब्सिडी मुख्य रूप से आम जनता और प्राइवेट खरीदारों के लिए तैयार की गई है, ताकि देश में व्यक्तिगत स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ सके। हालांकि, इसमें एक विशेष शर्त यह रखी गई है कि अगर कोई केंद्र या राज्य सरकार का विभाग या उनकी कोई एजेंसी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदती है तो वे इस योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी के पात्र नहीं होंगे। इसका सीधा लाभ केवल उन्हीं निजी खरीदारों और व्यावसायिक संस्थाओं को मिलेगा जो ग्रीन मोबिलिटी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

सब्सिडी के लिए कीमत की लिमिट 

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए सरकार ने वाहनों की कीमत को लेकर एक विशेष शर्त रखी है, ताकि इसका फायदा किफायती और मध्यम वर्ग की गाड़ियों तक सीमित रहे। नियम के अनुसार, सब्सिडी केवल उन्हीं वाहनों पर लागू होगी जिनकी फैक्ट्री कीमत सरकार के जरिए तय की गई सीमा के भीतर है।

अगर आप एक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो उसकी ज्यादातम फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये तक होनी चाहिए। वहीं, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के मामले में यह सीमा 2.5 लाख रुपये निर्धारित की गई है। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि अगर किसी गाड़ी की फैक्ट्री कीमत इन तय सीमाओं ऊपर जाती है तो वह वाहन सरकारी सब्सिडी पाने का पात्र नहीं होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि यह योजना प्रीमियम और महंगी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बजाय उन वाहनों पर केंद्रित है जो आम जनता की जेब के अनुकूल हों।

सब्सिडी पाने की पूरी और आसान प्रक्रिया 

अगर आप नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो सब्सिडी पाने के लिए आपको किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद आधुनिक और पेपरलेस बना दिया है। इससे आपको शोरूम पर ही सीधा डिस्काउंट मिल जाएगा।

इस प्रक्रिया की शुरुआत तब होती है जब आप डीलर के पास अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ी का रजिस्ट्रेशन (RTO) कराते हैं। उस समय डीलर पीएम ई-ड्राइव पोर्टल पर जाकर आपकी गाड़ी के लिए एक यूनिक आईडी वाला ई-वाउचर जेनरेट करेगा। इसके तुरंत बाद, डीलर आपके चेहरे के वेरिफिकेशन के जरिए आधार e-KYC की प्रक्रिया पूरी करेगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सब्सिडी का लाभ सही व्यक्ति को मिल रहा है। जैसे ही यह वेरिफिकेशन सफल होगा, आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS के जरिए वाउचर डाउनलोड करने का एक लिंक भेजा जाएगा।

इसके बाद आपको उस लिंक से ई-वाउचर डाउनलोड करके उस पर अपने डिजिटल या फिजिकल हस्ताक्षर करने होंगे और उसे वापस डीलर को सौंपना होगा। अंत में, डीलर आपके के जरिए हस्ताक्षरित वाउचर को पोर्टल पर अपलोड कर देगा (जिसकी एक कॉपी रिकॉर्ड के लिए आपको भी दी जाएगी)। इस पूरी प्रक्रिया के बाद, डीलर गाड़ी की कुल ऑन-रोड कीमत में से सब्सिडी की रकम को तुरंत घटा देगा और आपको केवल डिस्काउंट के बाद वाली फाइनल कीमत ही चुकानी होगी।

योजना के मुख्य फायदे 

यह योजना केवल सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के परिवहन भविष्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है। इसका सबसे बड़ा और सीधा फायदा यह है कि इलेक्ट्रिक वाहन अब आम आदमी के बजट में आ जाएंगे। भारी भरकम सब्सिडी के कारण शुरुआती कीमत कम होने से लोग अब पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के बजाय ई-वाहनों को प्राथमिकता दे सकेंगे, जिससे उनकी जेब पर ईंधन का बोझ कम होगा।

आर्थिक बचत के साथ-साथ, यह योजना पर्यावरण के लिए एक वरदान साबित होगी। सड़कों पर जितनी ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां दौड़ेंगी, जहरीले धुएं का उत्सर्जन उतना ही कम होगा। क्लीन मोबिलिटी के इस विजन से हमारे शहरों की हवा साफ होगी और वायु प्रदूषण के स्तर में भारी गिरावट आएगी।

इसके अलावा, यह योजना देश में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहद मजबूत बनाने वाली है। सरकार केवल निजी वाहनों पर ही नहीं, बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कमर्शियल गाड़ियों (जैसे ई-बसें और ई-ट्रक) पर भी बड़ा निवेश कर रही है। इसके साथ ही, पूरे देश में चार्जिंग स्टेशनों का एक विशाल जाल बिछाया जाएगा। इससे ईवी मालिकों को रेंज की चिंता नहीं रहेगी और लंबे सफर पर भी वे बिना किसी डर के इलेक्ट्रिक वाहन ले जा सकेंगे।

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