SUV: भारतीय एसयूवी बाजार; अब देसी कंपनियों का राज, 66% मार्केट शेयर के साथ महिंद्रा और टाटा ने बदली बाजी
भारत के कार बाजार में दशकों तक मारुति सुजुकी और ह्यूंदै का दबदबा बना रहा लेकिन 2025 तक तस्वीर पूरी तरह बदल गई। अब एसयूवी सिर्फ एक सेगमेंट नहीं, बल्कि पूरे पैसेंजर व्हीकल मार्केट का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है। SIAM के अनुसार 2025 में एसयूवी और एमपीवी की हिस्सेदारी बढ़कर 66% हो गई, जो 2024 में 61.2% थी। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह महिंद्रा और टाटा की मजबूत वापसी रही, जिन्होंने नए मॉडल्स, बेहतर डिजाइन, ज्यादा फीचर्स और दमदार ब्रांड पोजिशनिंग के जरिए विदेशी कंपनियों को कड़ी टक्कर दी।
विस्तार
दशकों तक भारत में कार बाजार की कहानी लगभग एक जैसी थी। मारुति सुजुकी सबसे आगे रहती थी, ह्यूंदै दूसरे नंबर पर। टाटा और महिंद्रा जैसी देसी कंपनियां ज्यादातर पीछे रहती थीं- वे मजबूत थीं, लेकिन आम लोगों की पहली पसंद कम बनती थीं। उस समय एसयूवी का मतलब या तो भारी-भरकम गाड़ियां होता था या फिर बहुत महंगी लाइफस्टाइल कारें लेकिन 2025 तक पूरा खेल बदल गया। अब एसयूवी सिर्फ एक सेगमेंट नहीं, बल्कि पूरे ऑटो बाजार का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है। SIAM के मुताबिक 2025 में भारत के पैसेंजर व्हीकल बाजार में एसयूवी और MPV की हिस्सेदारी 66% हो गई, जो 2024 में 61.2% थी। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह महिंद्रा और टाटा की जबरदस्त वापसी है। इन्होंने विदेशी कंपनियों को कड़ी टक्कर दी और गाड़ियां लॉन्च करने व बेचने का तरीका भी बदल दिया।
एसयूवी अब सिर्फ गाड़ी नहीं, 'पहचान' बन गई है
भारत में एसयूवी का क्रेज सिर्फ ऊंची गाड़ी या बड़ा साइज नहीं है। असल बात है स्टाइल, सुरक्षा और पहचान। आज के खरीदार को सड़क पर दमदार मौजूदगी, ज्यादा सुरक्षा, डिजिटल फीचर्स (टचस्क्रीन, कनेक्टेड टेक) और बोल्ड डिजाइन चाहिए। अब गाड़ी सिर्फ चलने का साधन नहीं, बल्कि लोगों की पर्सनैलिटी का हिस्सा बन गई है। एक एक्सपर्ट के मुताबिक टाटा और महिंद्रा की सफलता इसलिए नहीं है कि उन्होंने सिर्फ अच्छी गाड़ियां बनाई, बल्कि इसलिए कि उन्होंने ग्राहक की सोच और पसंद को सही समझा। महिंद्रा 25-40 साल के शहरी युवाओं को पसंद आती है क्योंकि इसकी गाड़ियां 'स्टेटमेंट' देती हैं। टाटा उन लोगों को आकर्षित करती है जो सुरक्षा, जिम्मेदारी और आधुनिक सोच चाहते हैं।
2025 में बाजार का संतुलन बदल गया
FADA के आंकड़ों के अनुसार 2025 में एसयूवी ट्रेंड का सबसे बड़ा फायदा महिंद्रा को हुआ। महिंद्रा की बिक्री 2024 के 4.93 लाख से बढ़कर 2025 में 5.93 लाख हो गई। इसका मार्केट शेयर 12.08% से बढ़कर 13.25% हो गया और वह चौथे से सीधे दूसरे नंबर पर पहुंच गई। टाटा 5.68 लाख यूनिट्स के साथ महिंद्रा के पीछे रही और ईवी में नंबर 1 बनी रही। सबसे बड़ा झटका ह्यूंदै को लगा। इसकी बिक्री करीब 5.60 लाख पर ही रही, लेकिन मार्केट शेयर घटकर 12.50% हो गया। करीब 20 साल बाद ह्यूंदै चौथे नंबर पर चली गई। मारुति की बिक्री बढ़कर 17.86 लाख हुई, लेकिन मार्केट शेयर गिरकर 39.91% हो गया। मतलब एसयूवी के महंगे बाजार में अब मारुति को कड़ी टक्कर मिल रही है। विदेशी कंपनियों में टोयोटा ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री 2.61 लाख से बढ़कर 3.21 लाख हो गई।
महिंद्रा: नई पहचान और नई रणनीति
महिंद्रा की सफलता किसी एक मॉडल की वजह से नहीं, बल्कि लंबे समय की रणनीति से आई। थार, स्कॉर्पियो-एन और XUV700 जैसी गाड़ियों ने बिक्री बढ़ाई और अपने सेगमेंट की परिभाषा बदल दी। महिंद्रा ने मार्केटिंग भी बदल दी। अब सिर्फ एक दिन का बड़ा लॉन्च इवेंट नहीं, बल्कि डिजिटल कैंपेन, टीजर और सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा इन चीजों पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है।
टाटा मोटर्स: आम आदमी का एसयूवी सपना
महिंद्रा जहां 'एटीट्यूड' बेचती है, वहीं टाटा 'एसयूवी का सपना हर किसी तक' पहुंचाने पर काम करती है। टाटा पंच ने माइक्रो-एसयूवी सेगमेंट को मजबूत बनाया। यह हैचबैक की कीमत में एसयूवी जैसा फील देती है और 5-स्टार सुरक्षा भी देती है। टाटा ने 2.5 लाख से ज्यादा ईवी बिक्री करके भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को ज्यादा आम बना दिया।
आगे की चुनौतियां और भविष्य
इतनी सफलता के बाद भी टाटा और महिंद्रा के सामने एक बड़ी चुनौती है सर्विस और आफ्टर-सेल्स। इस मामले में वे अभी भी मारुति और टोयोटा से पीछे मानी जाती हैं। ऑनलाइन लोगों के अनुभव अक्सर मिले-जुले रहते हैं। फिर भी आज का युवा ग्राहक छोटी कमियों को नजरअंदाज कर देता है, अगर उसे गाड़ी में पावर, स्टाइल और पहचान मिल रही हो। एक ऑटो एक्सपर्ट का कहना है कि बाजार अब सिर्फ 'कीमत' नहीं देख रहा, बल्कि 'चाहत और स्टेटस' की तरफ बढ़ रहा है। और इस नई रेस में देसी कंपनियां अब किसी के पीछे नहीं हैं, वे खुद ट्रेंड सेट कर रही हैं। महिंद्रा ने 2026 की शुरुआत 90,000 नई बुकिंग्स के साथ की। टाटा की नई सिएरा को पहले ही दिन 70,000 बुकिंग्स मिलीं। इससे साफ है कि अब भारतीय ग्राहक इन ब्रांड्स से भावनात्मक रूप से जुड़ चुके हैं।