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Union Budget: केंद्रीय बजट 2026-27; इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर से भारतीय टायर उद्योग में आएगी नई रफ्तार

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Mon, 02 Feb 2026 04:04 PM IST
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सार

Tyre Industry: केंद्रीय बजट 2026-27 ने भारतीय टायर उद्योग के लिए नई उम्मीदें जगा दी हैं। सरकार ने बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जिससे सड़कों, लॉजिस्टिक्स और परिवहन नेटवर्क में तेजी आने की संभावना है। टायर निर्माताओं के संगठन टायर कंपनियों के संगठन ATMA का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में यह निवेश वाहनों की आवाजाही बढ़ाएगा, जिससे टायरों की मांग खासतौर पर कमर्शियल और रिप्लेसमेंट सेगमेंट में काफी मजबूत होगी।

Union Budget 2026-27 Boosts Tyre Industry as Infrastructure Spending Rises
टायर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI
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विस्तार
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साल 2026-27 का केंद्रीय बजट भारतीय टायर कंपनियों के लिए नई उम्मीदें लेकर आया है। सरकार ने बुनियादी ढांचे और सड़कों के निर्माण पर खर्च बढ़ाने का जो बड़ा फैसला लिया है, उससे टायर निर्माता काफी उत्साहित हैं। टायर कंपनियों के संगठन (ATMA) का मानना है कि सरकारी निवेश में इस बढ़ोतरी से भविष्य में वाहनों की आवाजाही बढ़ेगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर टायरों की मांग पर पड़ेगा और इसमें बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।

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इंफ्रास्ट्रक्चर और टायर उद्योग का गहरा संबंध

टायर का कारोबार पूरी तरह से देश की सड़कों और परिवहन व्यवस्था पर निर्भर करता है। इस बजट में सरकार ने बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर खर्च को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जो टायर कंपनियों के लिए एक बहुत अच्छा संकेत है। टायर एसोसिएशन (ATMA) का कहना है कि जब सरकार सड़कों, रेलवे और माल ढोने के रास्तों (लॉजिस्टिक) को बेहतर बनाने के लिए इतना पैसा खर्च करेगी तो सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि हर तरह की गाड़ियों के लिए टायरों की बिक्री और इस्तेमाल में बड़ी बढ़ोतरी होगी।

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प्रमुख हस्तियों के विचार

ATMA के चेयरमैन अरुण मामन ने बजट पर खुशी जताते हुए कहा कि टायर इंडस्ट्री की तरक्की पूरी तरह देश में बनने वाली सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करती है। सरकार के जरिए विकास कार्यों पर ज्यादा पैसा खर्च करने से न सिर्फ निजी कारों, बल्कि कमर्शियल वाहनों के टायरों की मांग भी काफी बढ़ेगी। उन्होंने आगे समझाया कि माल ढुलाई के लिए नए रास्ते (फ्रेट कॉरिडोर) बनने और छोटे शहरों में ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं बेहतर होने से वाहनों का इस्तेमाल बढ़ेगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि नई गाड़ियों के साथ-साथ पुराने टायरों को बदलवाने के बाजार में भी काफी तेजी आएगी।

एक पुरानी चुनौती अभी भी बरकरार

बजट में अच्छी खबरों के बीच टायर इंडस्ट्री ने अपनी एक पुरानी समस्या को फिर से उठाया है। चेयरमैन अरुण मामन ने बताया कि इस बार भी 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' की दिक्कत को दूर नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि विदेश से बना-बनाया टायर मंगाना सस्ता है, लेकिन टायर बनाने के लिए कच्चा माल (रॉ मैटेरियल) मंगाना महंगा पड़ता है, क्योंकि उस पर टैक्स ज्यादा है। इससे देश में टायर बनाने वाली कंपनियों का खर्च बढ़ जाता है। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के लिए सरकार भविष्य में इस टैक्स की विसंगति को जरूर ठीक करेगी।


साफ तौर पर कहें तो बजट 2026-27 ने भारतीय टायर कंपनियों के लिए तरक्की का रास्ता खोल दिया है। सरकार जिस तरह से सड़कों और निर्माण कार्यों पर पूरा जोर (बुलिश रुख) दे रही है, उससे न केवल नई गाड़ियों की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि आने वाले लंबे समय में टायर इंडस्ट्री भी कामयाबी की नई ऊंचाइयों पर पहुँच जाएगी।

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