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Hindi News ›   Delhi ›   Vehicle Scrappage Scheme: NCR States Likely to Waive Road Tax on New Clean-Fuel Trucks and Buses

Scrappage: पुराने ट्रक-बस स्क्रैप करने पर मिलेगा बड़ा फायदा! NCR में रोड टैक्स पूरी तरह माफ करने की तैयारी

Tue, 30 Jun 2026 11:13 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Tue, 30 Jun 2026 11:13 PM IST
सार

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के चारों राज्यों- दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान - में जल्द ही पुराने भारी वाणिज्यिक वाहनों को स्क्रैप कर नए स्वच्छ ईंधन वाले ट्रक और बस खरीदने वालों को रोड टैक्स में पूरी छूट मिल सकती है।

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Vehicle Scrappage Scheme: NCR States Likely to Waive Road Tax on New Clean-Fuel Trucks and Buses
Trucks - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को जड़ से खत्म करने और सड़कों पर दौड़ रहे पुराने व्यावसायिक वाहनों को हटाने के लिए केंद्र सरकार एक बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेलने जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के चारों राज्य, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान, जल्द ही एक अभूतपूर्व घोषणा कर सकते हैं। इसके तहत, हाल ही में मंजूर किए गए स्क्रैपेज प्रोग्राम के अंतर्गत अपने पुराने भारी वाणिज्यिक वाहनों को बदलकर पर्यावरण के अनुकूल 'क्लीन-फ्यूल' वाहन खरीदने वाले ग्राहकों का रोड टैक्स पूरी तरह से माफ कर दिया जाएगा।

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नई दिल्ली में क्लीनर फ्रेट मोबिलिटी (स्वच्छ माल ढुलाई) पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी महमूद अहमद ने इस बड़ी योजना का खुलासा किया। 

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रोड टैक्स में मिलने वाली इस बड़ी छूट को लेकर सरकारी तैयारी क्या है?

अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए राज्यों के साथ बातचीत का दौर पूरा हो चुका है:

  • बातचीत हुई पूरी: एडिशनल सेक्रेटरी महमूद अहमद ने बताया कि चारों राज्य सरकारों के साथ इस विषय पर गहन चर्चा पूरी हो चुकी है।

  • जल्द जारी होगा नोटिफिकेशन: आने वाले कुछ दिनों या हफ्तों में ही चारों राज्यों की ओर से इस टैक्स छूट को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन (अधिसूचना) जारी होने की पूरी उम्मीद है।


यह टैक्स छूट किस तरह के वाहनों और खरीदारों पर लागू होगी?

इस इंसेंटिव (प्रोत्साहन) का लाभ उठाने के लिए सरकार ने वाहनों की श्रेणी और ईंधन के प्रकार को लेकर कुछ नियम तय किए हैं:

  • पुराने वाहनों को कबाड़ करना जरूरी: यह प्रस्तावित छूट केवल उन्हीं खरीदारों को मिलेगी जो अपने पुराने, प्रदूषण फैलाने वाले प्री-BS VI (यानी BS-6 मानक से पुराने) ट्रकों और बसों को स्क्रैप (कबाड़) करेंगे।

  • क्लीन-फ्यूल वाहन खरीदना अनिवार्य: पुराने वाहन को कबाड़ में देने के बाद खरीदार को नए वाहन के तौर पर स्वच्छ ईंधन से चलने वाले ट्रक या बस को खरीदना होगा।

  • 'परिवर्तन' पहल का हिस्सा: वाहनों को बदलने का यह आकर्षक प्रोत्साहन केंद्र सरकार की 'परिवर्तन' (Parivartan) पहल का एक मुख्य हिस्सा है। जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने पुराने और प्रदूषणकारी व्यावसायिक वाहनों को सड़कों से तेजी से हटाने के उद्देश्य से मंजूरी दी है।

Vehicle Scrappage Scheme: NCR States Likely to Waive Road Tax on New Clean-Fuel Trucks and Buses
Trucks - फोटो : Amar Ujala

इस योजना के तहत वाहन निर्माता कंपनियां क्या फायदा दे रही हैं?

सरकारी रियायतों के अलावा, इस अभियान को सफल बनाने के लिए बड़ी गाड़ियां बनाने वाली कंपनियों ने भी हाथ मिलाया है:

  • 8% तक का बंपर डिस्काउंट: महमूद अहमद ने बताया कि इस कार्यक्रम को सपोर्ट करने के लिए वाहन निर्माता कंपनियां भी आगे आई हैं। वे इस योजना के पात्र नए कमर्शियल वाहनों की एक्स-शोरूम कीमत पर लगभग 8 फीसदी की सीधी छूट देने के लिए तैयार हो गई हैं।

योजना को जमीनी स्तर पर कामयाब बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर क्या तैयारी है?

ज्यादा से ज्यादा ट्रक और बस मालिकों को इस योजना से जोड़ने के लिए सरकार ने सीधे जिला प्रशासन को कमान सौंप दी है:

  • कलेक्टर्स संभालेंगे कमान: इस स्कीम में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मंत्रालय पूरे एनसीआर क्षेत्र के जिला प्रशासनों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

  • सीधा संवाद साधने के निर्देश: एनसीआर के लगभग 35 से 37 जिला कलेक्टरों और लीड बैंक समन्वयकों को सीधे तौर पर ट्रक और बस मालिकों से जुड़ने और उन्हें इस स्क्रैपेज स्कीम को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कहा गया है। 

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क्लीन मोबिलिटी को लेकर सरकार का दृष्टिकोण दंडात्मक है या सहयोगात्मक?

सरकार ने साफ कर दिया है कि उसका मकसद जबरन नियम थोपना नहीं, बल्कि ग्राहकों को बेहतर विकल्प देना है:

  • सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं: एडिशनल सेक्रेटरी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकार की स्वच्छ गतिशीलता रणनीति केवल बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों तक ही सीमित नहीं है।

  • विकल्पों का गुलदस्ता: कमर्शियल वाहनों के बेड़े को आधुनिक बनाने और प्रदूषण घटाने के लिए नीति निर्माता कई तरह के तकनीकी विकल्पों पर काम कर रहे हैं। अहमद ने कहा, "हम केवल किसी एक समाधान पर निर्भर नहीं रहना चाहते। समय की मांग है कि ग्राहकों के सामने 'विकल्पों का एक गुलदस्ता' हो, और अंतिम फैसला पूरी तरह से ग्राहक को ही करना चाहिए।"

  • सख्ती नहीं, प्रोत्साहन है रास्ता: सरकार का स्पष्ट नजरिया है कि व्यावसायिक वाहनों के मालिकों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई (सख्ती या जुर्माना) करने के बजाय, उन्हें आकर्षक प्रोत्साहन देकर इस योजना को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। 
     

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