Most Expensive Petrol: दुनिया में सबसे महंगा पेट्रोल कहां है? भारत या अमेरिका नहीं, कीमत सुनकर चौंक जाएंगे!
पेट्रोलियम दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले ईंधनों में शामिल है और वैश्विक परिवहन व्यवस्था का बड़ा हिस्सा इसी पर निर्भर करता है। हालांकि, हर देश में पेट्रोल की कीमत एक जैसी नहीं होती। इसकी कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है। जानें पूरी डिटेल्स।
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पेट्रोलियम आज की तारीख में दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला ईंधन है, जो वैश्विक स्तर पर पूरे ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर की रीढ़ बना हुआ है। हालांकि, दुनिया के हर देश में पेट्रोल की कीमतें एक जैसी नहीं हैं। टैक्स, रिफाइनरियों और तेल भंडारों तक पहुंच, करेंसी एक्सचेंज रेट (विदेशी मुद्रा दर) और सरकारी सब्सिडी जैसे कई कारणों से अलग-अलग देशों में तेल के दाम बदल जाते हैं।
आज के समय में भारत अपनी ईंधन जरूरतों का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है और यहां पेट्रोल फिलहाल 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है। लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर पेट्रोल की कीमतों का चार्ट देखें, तो भारत ठीक बीच में आता है। दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल लीबिया में मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे महंगा पेट्रोल किस देश में बिक रहा है?
दुनिया का सबसे महंगा पेट्रोल किस देश में मिलता है?
जब दुनिया के सबसे महंगे पेट्रोल की बात आती है, तो बहुत से लोगों के दिमाग में अमेरिका या भारत का नाम आ सकता है, लेकिन सच कुछ और ही है:
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हॉन्ग कॉन्ग है सबसे आगे: दुनिया में सबसे महंगा पेट्रोल हॉन्ग कॉन्ग (Hong Kong) में बिकता है। हॉन्ग कॉन्ग चीन का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है, जो न्यूयॉर्क और लंदन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा वित्तीय केंद्र भी है।
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हैरान करने वाली कीमत: हॉन्ग कॉन्ग में इस समय पेट्रोल की कीमत 31.94 हॉन्ग कॉन्ग डॉलर (HK$) है। अगर भारतीय रुपये में इसकी गणना की जाए, तो यह लगभग ₹384.57 प्रति लीटर बैठती है।
हॉन्ग कॉन्ग में पेट्रोल इतना ज्यादा महंगा क्यों है?
हॉन्ग कॉन्ग में ईंधन की कीमतें आसमान छूने के पीछे कई बड़े और ठोस कारण काम कर रहे हैं:
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आयात पर भारी निर्भरता: हॉन्ग कॉन्ग के पास अपने तेल भंडार नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अपनी ईंधन जरूरतों का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है।
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भारी-भरकम सरकारी टैक्स: वहां की सरकार ईंधन के आयात पर बहुत भारी ड्यूटी (टैक्स) वसूलती है।
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जमीन की भारी लागत: हॉन्ग कॉन्ग में पेट्रोल पंप खोलने के लिए जमीन की कीमत बहुत ज्यादा है। महंगी जमीनी की वजह से तेल की लागत बढ़ जाती है।
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पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना: सरकार द्वारा इतना भारी टैक्स लगाने के पीछे एक खास मकसद भी है। सरकार चाहती है कि पेट्रोल महंगा होने पर आम जनता अपनी निजी गाड़ियों के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करे।
भारत और हॉन्ग कॉन्ग में पेट्रोल की कीमतों में कितना अंतर है?
अगर हम भारत और हॉन्ग कॉन्ग में ईंधन की कीमतों की आपस में तुलना करें, तो अंतर बेहद चौंकाने वाला है:
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भारत का हाल: भारत अपनी ईंधन जरूरतों का 90 प्रतिशत से ज्यादा आयात करता है। यहां अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) की दरें अलग होने के कारण राज्यों के हिसाब से पेट्रोल की कीमतें बदलती हैं। भारत में पेट्रोल की कीमत मुख्य रूप से 102 रुपये प्रति लीटर से लेकर 114 रुपये प्रति लीटर के बीच बनी हुई है।
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हॉन्ग कॉन्ग से तुलना: हॉन्ग कॉन्ग में पेट्रोल की कीमत 384.57 रुपये प्रति लीटर है। इसका मतलब यह हुआ कि हॉन्ग कॉन्ग में पेट्रोल की कीमतें भारत के मुकाबले लगभग 256 प्रतिशत ज्यादा हैं।