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Bihar News : बिहार सरकार का बड़ा फैसला, टाउनशिप में भूमिहीन नहीं, बल्कि भागीदार बनेंगे किसान

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Krishan Ballabh Narayan Updated Mon, 27 Apr 2026 07:29 PM IST
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सार

Bihar : बिहार सरकार ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का निर्माण कराने जा रही है। इसको लेकर राजधानी पटना के उन क्षेत्रों की जमीन खरीद बिक्री पर 30 जून तक के लिए रोक लगा दी है। अब सरकार ने किसानों के फायदे भी बताए। 

Bihar government make farmers shareholders in Greenfield Satellite Townships patna Bihar News
विनय कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बिहार सरकार ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का निर्माण कराने जा रही है। इसको लेकर राजधानी पटना के उन क्षेत्रों की जमीन खरीद बिक्री पर 30 जून तक के लिए रोक लगा दी है। बिहार सरकार का कहना है कि बिहार सरकार ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विकास से किसान भूमिहीन नहीं होंगे, बल्कि उन्हें इस पूरी परियोजना में शेयर होल्डर बनाया जाएगा। 

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सोमवार को सूचना भवन के संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल कंक्रीट का जाल बिछाना नहीं, बल्कि बिहार के विकास के साथ-साथ किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना भी है। यह कार्य बिहार टाउन प्लानिंग स्कीम नियमावली, 2025 के तहत किया जा रहा है। 
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 जो कोई किसान अपनी जमीन देंगे, सरकार उस किसान  को उनकी 55 फ़ीसदी जमीन वापस करेगी। इसको इस तरह से समझा जा सकता है। जब सरकार किसी जमीन का अधिग्रहण करती है तो उस जमीन की कीमत 10 गुना बढ़ जाती है। पुनपुन क्षेत्र के जमीन की क़ीमत लगभग 20 गुना ज्यादा बढ़ जाएगी। इस तरह किसान को बढ़ी हुई क़ीमत का 55 फीसदी रुपया किसान को दिया जाता है। साथ ही वह जमीन भी मिल जाएगी जिसे सरकार विकसित करती है। सरकार किसान को जमीन होल्डर बनाती है।

जानिए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप योजना की क्या हैं मुख्य विशेषताएँ 

1. सभी प्लॉट एक समान होंगे। उस शहर में पार्क, खेल का मैदान, स्कूल, अस्पताल, मंदिर आदि भी बनाए जाएंगे। हर प्लाट के साथ सड़क, नाले, सिवरेज और बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे।

 

2. राज्य सरकार द्वारा भू-मालिकों को विकसित भूमि का अधिकतम हिस्सा वापस करने का लक्ष्य रखा है, जिसके अन्तर्गत भू-मालिकों को 55% विकसित भूमि वापस की जाएगी, 22% भूमि का उपयोग सड़के एवं बुनियादी ढांचा के निर्माण में की जाएगी, 5% भूमि में पार्क, हरियाली और सार्वजनिक सुविधाएँ का विकास किया जाएगा एवं 3% भूमि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के स्थानीय लोगों को आवास उपलब्ध कराने में उपयोग की जाएगी।

3. मूलभूत संरचना यथा-सड़क, बिजली, ड्रेनेज और सीवर आदि के विकास हेतु 15% भूमि प्राधिकार के द्वारा लागत वसूली के लिए रखी जाएगी।


4. विकास के पश्चात भूमि का बाजार मूल्य में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जाती है, जो सामान्यतः वर्तमान भूमि के मूल्य की तुलना में दस गुना अधिक हो जाती है, जिससे भू-मालिकों के आर्थिक हितों की रक्षा होती है।

5. वैसे लोग जो किसी कारणवश टाउन प्लानिंग स्कीम का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं, उन्हें प्राधिकार के द्वारा बातचीत के माध्यम से आपसी सहमति के आधार पर योजना में सम्मिलित किया जाएगा। इसके तहत उन भू-स्वामियों को प्राधिकार के द्वारा बाजार दर पर मुआवजा, टी.डी.आर. (भूमि के बदले विकास अधिकार) जिसे बाजार में बेचा भी जा सकता है, विकसित भवन में अंश के रूप में भुगतान किया जा सकेगा।

इस व्यवस्था के तहत दी जाने वाली कुल राहत की कीमत मूल रूप से दी गई भूमि के बाजार मूल्य के लगभग 4 गुना के बराबर होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक रूप से नुकसान में न रहे।

6. प्रस्तावित टाउनशिप के विशेष क्षेत्र में भूमि के लेनदेन पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध पूरी तरह से जमीन भू-मालिकों के कल्याण के लिए है। विकास की सुगबुगाहट होते ही बिचौलिए किसानों को उनकी जमीन कम कीमत पर खरीद लेते हैं। यह रोक सुनिश्चित करती है कि कोई भी भू-मालिक अपनी बेशकीमती जमीन को कम कीमत पर न बेचे। योजना पूरी होने के बाद जब बुनियादी ढांचा तैयार हो जाएगा, तब वही भू-मालिक अपनी संपत्ति को अच्छे दरों पर बेचने या विकसित करने के हकदार होंगे। यह कदम उनके आर्थिक हितों की रक्षा करने और उन्हें भविष्य के लाभ से वंचित होने से बचाने के लिए उठाया गया है।
स बचान क लिए उठाया गया ह।

7. यह योजना पूरी तरह से पारदर्शी है। ड्राफ्ट प्लान से लेकर प्लॉटों के पुनर्गठन तक, हर चरण में भू-मालिकों / सार्वजनिक परामर्श लिया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि विकास की इस प्रक्रिया में मूल भू-स्वामी सबसे बड़ा लाभार्थी बने। अस्थायी प्रतिबंध विकास का असली लाभ बिचौलियों के बजाय सीधे जमीन मालिक को देने के लिए है।

8. टाउन प्लानिंग स्कीम बिहार के शहरी परिदृश्य को व्यवस्थित करने के साथ-साथ छोटे और सीमांत जमीन मालिकों को सशक्त बनाने की एक दूरदर्शी पहल है।

इस मौके पर नगर विकास एवं आवास विभांग के विशेष सचिव राजीव कुमार श्रीवास्तव, अपर सचिव मनोज कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार, प्रशाखा पदाधिकारी  उमेश्वर कुमार सिंह, सहायक नगर योजना पर्यवेक्षक कमलजीत कुमार शर्मा एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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