फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   /bihar-nepal-flood-gandak-river-flash-flood-alert-west-champaran-gopalganj-muzaffarpur-vaishali

बाढ़ से बिहार के बांधों पर बनेगा दबाव: करीब 20 की आबादी पर खतरा, एडवाइजरी जारी; विशेषज्ञों ने जताई चिंता

Wed, 26 Aug 2026 08:50 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Wed, 26 Aug 2026 08:50 PM IST
सार

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बिहार में भी गंडक नदी के जलस्तर बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली समेत कई जिलों में अलर्ट जारी है। निचले इलाकों में माइकिंग कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है और प्रशासन ने राहत-बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। चलिए बता रहे हैं इस एक्सपर्ट ने क्या-क्या कहा है?

विज्ञापन
/bihar-nepal-flood-gandak-river-flash-flood-alert-west-champaran-gopalganj-muzaffarpur-vaishali
दिनेश कुमार मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का खतरा अब बिहार में भी बढ़ने लगा है। बिहार के कई जिलों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर हैं। वहीं, इस भीषण बाढ़ के खतरे को देखते हुए विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। अचानक आने वाली इस फ्लैश फ्लड से भारी नुकसान की आशंका है। गांवों के डूबने के अलावा तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने या टूटने और अन्य नुकसान की संभावना बनी हुई है।

विज्ञापन

देर शाम के बाद वाटर डिस्चार्ज बढ़ने से बढ़ेगा खतरा
पश्चिमी चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर में प्रवेश करने के बाद गंडक नदी छह जिलों से होते हुए बिहार की प्रमुख नदी गंगा में सोनपुर के पास मिलती है। इससे पहले यह वैशाली और सारण की सीमा से गुजरते हुए मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण जिलों से होकर बहती है। इन जिलों के कई प्रखंडों और सैकड़ों पंचायतों के गांवों पर अब बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।

विज्ञापन

स्थिति को देखते हुए लोगों को अलर्ट रहने और निचले इलाकों को खाली करने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों को ऊंचे स्थानों पर शरण लेने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए लगातार माइकिंग कराई जा रही है और लोगों से निचले इलाकों में सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

गंडक नदी के इन क्षेत्रों पर मंडरा रहा खतरा
गोपालगंज जिले में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए कुल छह तटीय प्रखंडों की 62 पंचायतों को सबसे अधिक संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें सदर, कुचायकोट, मांझा, बैकुंठपुर, बरौली और सिधवलिया शामिल हैं। पूर्वी चंपारण जिले में गंडक नदी और उससे जुड़े संभावित बाढ़/फ्लैश फ्लड के खतरे को देखते हुए मुख्य रूप से अरेराज, केसरिया और संग्रामपुर प्रखंडों को सबसे संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्र माना गया है।

पश्चिमी चंपारण जिले में पिपरासी, भितहा, ठकराहां, सिधुआं, बगहा, नौतन, योगापट्टी, मधुबनी, बैरिया और लौरिया प्रखंड संवेदनशील माने जा रहे हैं। वैशाली जिले में गंडक के बढ़ते जलस्तर से लालगंज, हाजीपुर और राघोपुर प्रखंड प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर जिले में पारू, सरैया और साहेबगंज प्रमुख रूप से संवेदनशील क्षेत्र हैं।

विशेषज्ञ ने बताया, कितना विनाशकारी हो सकता है बाढ़ का असर
बाढ़ के कारणों और इससे बचाव पर दशकों से अध्ययन कर रहे विशेषज्ञ दिनेश कुमार मिश्रा ने बताया कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का असर गंडक नदी पर अधिक दिखाई देगा। त्रिशूली नदी को ही नेपाल में नारायणी और बिहार में गंडक नदी के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि इसके कारण बिहार के कई जिलों, खासकर गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में आने वाले इलाकों में इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। बाढ़ के पानी के तेज बहाव के कारण निचले इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा रहेगा। कई गांव जलमग्न हो सकते हैं। तटबंधों पर दबाव बढ़ने से उनके टूटने का खतरा भी बना रहेगा। सहायक नदियों में भी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा गंडक नदी से निकलने वाली नहरों पर भी दबाव बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि ऐसे में आपदा प्रबंधन की तैयारी सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि संभावित खतरे से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। पर्याप्त संख्या में नाव और बोट की व्यवस्था करने के साथ तटबंधों की लगातार निगरानी करना जरूरी है।

ये भी पढ़ें- नेपाल में बाढ़ से तबाही: अबतक 95 शव बरामद, 500 लापता; कैलाश यात्रियों पर भी संकट, भारत सरकार ने भेजी मदद

आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी अहम
संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी सबसे महत्वपूर्ण है। लोगों को निचले इलाकों से निकालकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करना, बाढ़ में फंसे लोगों को समय पर बाहर निकालने के लिए पर्याप्त रेस्क्यू संसाधन उपलब्ध रखना और SDRF की प्रतिनियुक्ति से लेकर तटबंधों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करना बेहद अहम है।

इन तैयारियों के जरिए बाढ़ के खतरे और उससे होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित रहने, भोजन और पेयजल की व्यवस्था करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed