बिहार: बिना डॉक्टर कैसे चल रहा था क्लीनिक? प्रसव के दौरान प्रसूता और नवजात की हुई मौत, उठे बड़े सवाल
दरभंगा के बहेड़ी बाजार स्थित श्यामा सर्जिकल ट्रॉमा सेंटर में प्रसव के दौरान महिला और नवजात की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया। स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्लीनिक के कथित तौर पर फर्जी तरीके से संचालित होने की बात सामने आई, जिसके बाद उसे सील कर दिया गया।
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दरभंगा जिले के बहेड़ी बाजार स्थित कथित रूप से फर्जी तरीके से चल रहे अवैध श्यामा सर्जिकल ट्रॉमा सेंटर में प्रसव के दौरान समस्तीपुर जिले के रोसड़ा निवासी अंजली कुमारी (28) की मौत हो गई। मौत के बाद क्लीनिक के सभी कर्मी फरार हो गए। बताया जाता है कि उक्त क्लीनिक में कोई डॉक्टर नहीं है और इसे किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा चलाया जा रहा था।
फिलहाल जांच के लिए पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्लीनिक को फर्जी करार दिया है। वहीं, जांच में पहुंचे डॉक्टर ने बताया कि प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव होने से मरीज की मौत हुई है। महिला मरीज की मौत से नाराज परिजन शव को सड़क पर रखकर हंगामा कर रहे थे। घटना के बाद पहुंची बहेड़ी थाना पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर सड़क जाम खुलवाया, तब जाकर मामला शांत हो सका।
नाराज लोगों ने सड़क जाम की
मृतका की मां ममता देवी ने बताया कि वह अपनी बेटी को डॉक्टर को दिखाने के लिए लेकर आई थीं। इस दौरान महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद डॉक्टर ने बताया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। इसके थोड़ी देर बाद ही महिला मरीज की भी मौत हो गई। महिला मरीज की मौत होते ही क्लीनिक छोड़कर सभी कर्मी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद नाराज लोगों ने सड़क जाम कर दिया और डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग करने लगे।
इधर, सामाजिक कार्यकर्ता रविंद्रनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें भी परिजनों ने घटना की जानकारी दी थी। बहेड़ी थाना क्षेत्र में करीब आधा दर्जन फर्जी नर्सिंग होम का संचालन पीएचसी और थाना से महज 500 मीटर की दूरी पर किया जा रहा है। जब कोई बड़ी घटना होती है तो स्वास्थ्य विभाग फर्जी करार देकर कार्रवाई की बात कहकर निकल जाता है। इस इलाके में यह कोई पहली मरीज की मौत नहीं हुई है।
'कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था'
घटना की सूचना पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच के बाद चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. बी.डी. महतो ने बताया कि यह नर्सिंग होम फर्जी तरीके से चलाया जा रहा था। इसमें कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था। बताया जा रहा है कि प्रसव के दौरान ही बच्चे और मां की मौत हो गई। नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई के लिए सिविल सर्जन कार्यालय को लिखा जा रहा है।
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जांच में निकला फर्जी
चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. बी.डी. महतो की जांच में क्लीनिक फर्जी पाए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद उसे सील कर दिया गया। क्लीनिक से सरकारी अस्पताल के कुछ पुर्जे मिलने का भी दावा किया गया है। स्थानीय लोगों ने आशा कार्यकर्ताओं और सरकारी अस्पताल के कुछ कर्मियों पर मरीजों को कथित रूप से निजी क्लीनिक में भेजने का आरोप लगाया है। महिला की मौत और क्लीनिक के संचालन समेत पूरे मामले की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात अधिकारियों ने कही है।