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बिहार: दो शिक्षिकाओं को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार; एक ने बदली स्कूल की तस्वीर, दूसरी ने आसान की पढ़ाई
Sat, 22 Aug 2026 03:17 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां/गोपालगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां/गोपालगंज
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sat, 22 Aug 2026 03:17 PM IST
सार
Bihar News: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए बिहार की गोपालगंज की पुष्पा प्रसाद और बांका की खुशबू कुमारी का चयन हुआ है। दोनों शिक्षिकाओं ने नवाचार, गतिविधि आधारित शिक्षण और सामुदायिक सहभागिता के जरिए सरकारी स्कूलों में उल्लेखनीय बदलाव किए। पुष्पा ने टीएलएम से पढ़ाई को आसान बनाया, जबकि खुशबू ने स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने के साथ बाल सुरक्षा और नेतृत्व विकास पर विशेष काम किया।
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शिक्षिका पुष्पा प्रसाद और खुशबू कुमारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार के लिए शिक्षा के क्षेत्र से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए राज्य की दो शिक्षिकाओं का चयन हुआ है। गोपालगंज के कुचायकोट स्थित मध्य विद्यालय कुचायकोट कन्या की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद और बांका के उर्दू प्राथमिक विद्यालय बिदायदीह की प्रधान शिक्षिका खुशबू कुमारी को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलेगा। दोनों शिक्षिकाओं ने नवाचार और समर्पित प्रयासों के जरिए सरकारी स्कूलों में शिक्षा की तस्वीर बदलने की दिशा में काम किया है।
पटना में हुआ प्रेजेंटेशन, ज्यूरी ने किया चयन
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने पुरस्कार के लिए छह उत्कृष्ट शिक्षकों के नाम केंद्रीय मंत्रालय को भेजे थे। 12 अगस्त को पटना में वर्चुअल माध्यम से राष्ट्रीय स्तर की ज्यूरी के सामने शिक्षकों का प्रस्तुतीकरण हुआ। अपने शिक्षण प्रयोगों और नवाचारों के दम पर पुष्पा प्रसाद और खुशबू कुमारी ने जगह बनाई। बिहार से कुल दो शिक्षकों का चयन किया गया है।
खेल-खेल में पढ़ाई, टीएलएम से कठिन विषय हुए आसान
पुष्पा प्रसाद पारंपरिक तरीके से अलग हटकर पढ़ाने के लिए जानी जाती हैं। वह खेल-खेल में और टीचिंग लर्निंग मटीरियल (टीएलएम) के रचनात्मक इस्तेमाल से बच्चों को कठिन विषय समझाती हैं। उनके प्रयासों से स्कूल में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ी। उन्हें 2024 में बिहार सरकार के ‘प्रदेश शिक्षक सम्मान’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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‘मात्रा का ज्ञान हुआ आसान’ से मिली खुशबू को पहचान
बांका की प्रधान शिक्षक खुशबू कुमारी ने 13 वर्षों से अधिक की शिक्षकीय यात्रा में नवाचार, बाल सुरक्षा और आनंदमय शिक्षण पर काम किया। उनका चर्चित नवाचार ‘मात्रा का ज्ञान हुआ आसान’ बच्चों को कठिन अवधारणाएं सरल तरीके से समझाने पर केंद्रित है। इसे विभिन्न शैक्षणिक मंचों पर सराहना मिली।
50 से 90 प्रतिशत पहुंची स्कूल में उपस्थिति
खुशबू कुमारी ने अभिभावकों से संवाद, घर-घर संपर्क और शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठियों पर जोर दिया। इसके परिणामस्वरूप विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति करीब 50 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक हो गई। विद्यालयी वर्दी की उपलब्धता भी 30-40 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंची।
यह भी पढ़ें: संध्या आरती के बीच शक्तिपीठ मां चंडिका के गर्भगृह में घुसा गंगा का पानी, प्रवेश द्वार पर बाढ़ की दस्तक
बाल सुरक्षा से लेकर नदी पर डायवर्जन तक किया काम
खुशबू ने बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ जैसे संवेदनशील विषयों की जानकारी दी। वहीं, बरसात में नदी के उफान के कारण बच्चों के स्कूल आने-जाने में होने वाली परेशानी को उन्होंने प्रशासन के सामने उठाया। इसके बाद वहां डायवर्जन का निर्माण कराया गया, जिससे बच्चों का आवागमन सुरक्षित हुआ।
5 सितंबर को दिल्ली में मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
दोनों शिक्षिकाओं को 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। चयन की खबर के बाद गोपालगंज, बांका और पूरे बिहार के शिक्षा जगत में खुशी का माहौल है।
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पटना में हुआ प्रेजेंटेशन, ज्यूरी ने किया चयन
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने पुरस्कार के लिए छह उत्कृष्ट शिक्षकों के नाम केंद्रीय मंत्रालय को भेजे थे। 12 अगस्त को पटना में वर्चुअल माध्यम से राष्ट्रीय स्तर की ज्यूरी के सामने शिक्षकों का प्रस्तुतीकरण हुआ। अपने शिक्षण प्रयोगों और नवाचारों के दम पर पुष्पा प्रसाद और खुशबू कुमारी ने जगह बनाई। बिहार से कुल दो शिक्षकों का चयन किया गया है।
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खेल-खेल में पढ़ाई, टीएलएम से कठिन विषय हुए आसान
पुष्पा प्रसाद पारंपरिक तरीके से अलग हटकर पढ़ाने के लिए जानी जाती हैं। वह खेल-खेल में और टीचिंग लर्निंग मटीरियल (टीएलएम) के रचनात्मक इस्तेमाल से बच्चों को कठिन विषय समझाती हैं। उनके प्रयासों से स्कूल में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ी। उन्हें 2024 में बिहार सरकार के ‘प्रदेश शिक्षक सम्मान’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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‘मात्रा का ज्ञान हुआ आसान’ से मिली खुशबू को पहचान
बांका की प्रधान शिक्षक खुशबू कुमारी ने 13 वर्षों से अधिक की शिक्षकीय यात्रा में नवाचार, बाल सुरक्षा और आनंदमय शिक्षण पर काम किया। उनका चर्चित नवाचार ‘मात्रा का ज्ञान हुआ आसान’ बच्चों को कठिन अवधारणाएं सरल तरीके से समझाने पर केंद्रित है। इसे विभिन्न शैक्षणिक मंचों पर सराहना मिली।
50 से 90 प्रतिशत पहुंची स्कूल में उपस्थिति
खुशबू कुमारी ने अभिभावकों से संवाद, घर-घर संपर्क और शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठियों पर जोर दिया। इसके परिणामस्वरूप विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति करीब 50 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक हो गई। विद्यालयी वर्दी की उपलब्धता भी 30-40 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंची।
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बाल सुरक्षा से लेकर नदी पर डायवर्जन तक किया काम
खुशबू ने बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ जैसे संवेदनशील विषयों की जानकारी दी। वहीं, बरसात में नदी के उफान के कारण बच्चों के स्कूल आने-जाने में होने वाली परेशानी को उन्होंने प्रशासन के सामने उठाया। इसके बाद वहां डायवर्जन का निर्माण कराया गया, जिससे बच्चों का आवागमन सुरक्षित हुआ।
5 सितंबर को दिल्ली में मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
दोनों शिक्षिकाओं को 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। चयन की खबर के बाद गोपालगंज, बांका और पूरे बिहार के शिक्षा जगत में खुशी का माहौल है।