चार्टर विमानों और हेलीकॉप्टरों की उड़ान सुरक्षा पर सवाल: पांच साल में 17 हादसे, सरकार ने संसद में बताए आंकड़े
क्या भारत में चार्टर प्लेन और हेलीकॉप्टर का सफर सुरक्षित है? पिछले पांच वर्षों में हुए 17 हादसों, 116 सुरक्षा उल्लंघनों के सरकारी आंकड़ों और डीजीसीए की सख्त कार्रवाई से जुड़ी हमारी विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें।
विस्तार
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सोमवार को राज्यसभा में बताया कि पिछले पांच वर्षों में गैर-निर्धारित विमानन ऑपरेटरों के विमानों और हेलीकॉप्टरों से सत्रह दुर्घटनाएं हुईं। इनमें से पांच दुर्घटनाएं अकेले 2025 में दर्ज की गईं। नॉन-शिड्यूल एयरलाइन्स मांग के अनुसार संचालित होने वाली विमान सेवाएं हैं। ये इंडिगो या एयर इंडिया जैसी नियमित एयरलाइन्स की तरह निश्चित समय-सारणी या पूर्व-निर्धारित रूट पर नहीं चलती हैं। इन्हें मुख्य रूप से चार्टर उड़ानें, निजी जेट, या एयर एम्बुलेंस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
सरकार ने राज्यसभा में क्या बताया?
कुल 17 दुर्घटनाओं में से 12 हेलीकॉप्टर से संबंधित थीं। शेष पांच दुर्घटनाएं फिक्स्ड-विंग विमानों से जुड़ी थीं। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2025 में चार्टर ऑपरेटरों से जुड़े छियालीस सुरक्षा उल्लंघन सामने आए। पिछले पांच वर्षों में ऐसे उल्लंघनों की कुल संख्या एक सौ सोलह रही। मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में चार्टर ऑपरेटरों से जुड़ी आठ घटनाएं रिपोर्ट की गईं। इनमें से दो घटनाएं पिछले साल यानी 2025 में हुईं। यह आंकड़े हवाई सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ाते हैं और नियामक एजेंसियों के लिए चुनौती पेश करते हैं।
डीजीसीए की निगरानी प्रक्रिया के बारे में क्या बताया गया?
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) अपनी सुरक्षा निगरानी प्रक्रिया को सख्ती से लागू करता है। इस प्रक्रिया में नियामक ऑडिट, रात की निगरानी और रैंप निरीक्षण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, स्पॉट चेक और विशेष ऑडिट भी किए जाते हैं। ये सभी कदम हवाई संचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाते हैं।
सरकार हवाई सुरक्षा को लेकर गंभीर: मोहोल
मोहोल ने एक अन्य लिखित जवाब में बताया कि डीजीसीए ने विशेष ऑडिट किए हैं। वार्षिक निगरानी योजना 2026 के अलावा, फरवरी और मार्च 2026 में यह ऑडिट हुए। उनतीस गैर-निर्धारित ऑपरेटरों का विशेष ऑडिट किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य उनके सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करना था। सरकार हवाई सुरक्षा को लेकर गंभीर है और लगातार कदम उठा रही है।