Gold Silver Price: आयात शुल्क बढ़ने से सोना 8550 रुपये और चांदी 20500 रुपये महंगी, बाजार में अफरातफरी
आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी के बाद 13 मई को सोने की कीमतें 8,550 रुपये और चांदी 20,500 रुपये उछली। सरकार ने गैर-जरूरी आयात कम करने के लिए शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% किया। जानें बाजार पर इसका असर, निवेशकों की राय और आगे की चुनौतियां।
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सरकार ने कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाया, जिसके बाद बुधवार, 13 मई को स्थानीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया। सोने का दाम 8,550 रुपये बढ़कर 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक हो गया। वहीं, चांदी की कीमतों में भी 20,500 रुपये प्रति किलोग्राम की जबरदस्त वृद्धि हुई। यह बढ़ोतरी सरकार के गैर-जरूरी आयात को कम करने के फैसले का सीधा परिणाम है।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, दिल्ली के बाजारों में चांदी का दाम 2,77,000 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2,97,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत 8,550 रुपये बढ़कर 1,65,350 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई, जो पिछली बंद कीमत 1,56,800 रुपये प्रति 10 ग्राम से 5 फीसदी से अधिक है। सरकार ने बुधवार को सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया। प्लेटिनम पर भी आयात शुल्क 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 15.4 फीसदी किया गया है। ये नई दरें बुधवार से ही प्रभावी हो गई हैं। यह कदम पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ते आयात बिल को नियंत्रित करने और गैर-जरूरी खरीद को हतोत्साहित करने के लिए उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विदेशी मुद्रा व्यय को कम करने के लिए सोने की खरीद पर अंकुश लगाने का आह्वान किया था।
शुल्क बढ़ोतरी का बाजार पर असर
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस उच्च शुल्क का वास्तविक प्रभाव आने वाले दिनों में खरीद बिलों में दिखाई देगा। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के कमोडिटी अनुसंधान प्रमुख हरीश वी ने बताया कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी से स्थानीय कीमतें बढ़ेंगी और भौतिक मांग अस्थायी रूप से कम होगी। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को घबराने की सलाह नहीं दी, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू मुद्रा दबाव के समय में सोना एक सुरक्षित निवेश बना हुआ है। विश्लेषकों ने यह भी बताया कि कमजोर रुपये ने भी कीमती धातुओं की कीमतों को बढ़ाया है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.80 के निचले स्तर पर आ गया, जिससे विदेशी मुद्रा बहिर्वाह और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।
भारत में सोने की मांग और चुनौतियां
भारत दुनिया में कीमती धातुओं का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। हाल के महीनों में निवेश सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए मांग में लगातार वृद्धि के कारण कीमतें बढ़ी हैं। कच्चा तेल के बाद सोना भारत का दूसरा सबसे बड़ा वस्तु आयात है। सोने की बढ़ती खरीद से विदेशी मुद्रा बहिर्वाह में वृद्धि हुई है, जिससे रुपये पर रिकॉर्ड निचले स्तर तक दबाव पड़ा है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ने चेतावनी दी है कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने से आयात पर अंकुश नहीं लगता, बल्कि कीमतें बढ़ती हैं।
वैकल्पिक उपाय और वैश्विक स्थिति
आभूषण खुदरा विक्रेताओं ने सुझाव दिया है कि आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय सोने और चांदी के आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाना देश के चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने का अधिक प्रभावी तरीका होगा। वैश्विक बाजारों में बुधवार को ब्रेंट कच्चा तेल 107 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था। हालांकि, विदेशी बाजारों में हाजिर सोना 0.3 फीसदी गिरकर 4,700.86 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी 1 फीसदी बढ़कर 87.45 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस हो गई।