खर्च पर सवाल: एक्सपर्ट्स का दावा- ईरान युद्ध में ₹95 लाख करोड़ फूंक चुके ट्रंप, बताया सिर्फ ₹2.77 लाख करोड़
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी जारी है। पेंटागन के एक वरिष्ठ बजट अधिकारी ने बताया कि युद्ध में अमेरिका अबतक ₹2.77 लाख करोड़ किए हैं। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध में अनुमान से ज्यादा करीब ₹95 लाख करोड़ खर्च हो चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर
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विस्तार
पिछले दो महीने से अमेरिका और ईरान में तनाव जारी है। इस युद्ध में अमेरिका के अब तक ₹ 2,77 लाख करोड़ खर्च हो चुके हैं। मंगलवार को पेंटागन के एक वरिष्ठ बजट अधिकारी अमेरिकी सांसदों को यह जानकारी दी। हालांकि यह आंकड़े पेंटागन की ओर से अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष प्रस्तुत किए अनुमानित बजट से 2.39 लाख करोड़ रुपये से कहीं अधिक है।
विशेषज्ञों ने क्या दावा किया?
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ये अनुमान अमेरिकी युद्ध विभाग की ओर से खर्च को कम करके आंका गया अनुमान मात्र हैं। वहीं, कुल खर्च संभावित रूप से 95.67 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है। हार्वर्ड कैनेडी स्कूल द्वारा पिछले सप्ताह जारी एक शोध के अनुसार, युद्ध बजट विशेषज्ञ लिंडा बिल्मेस का कहना है कि उन्हें पूरा विश्वास है कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अनुमानित लागत 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है। उन्होंने बताया कि अल्पकालिक, अग्रिम लागतों में प्रतिदिन लगभग 19,134 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जो उनके अनुसार हिमशैल का एक छोटा सा हिस्सा मात्र है।
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मंगलवार को पेंटागन के नियंत्रक के कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे जे हर्स्ट ने हाउस विनियोग समिति की सुनवाई में सूचित किया कि इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान पर अब तक लगभग 2,77,450 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। जो कि दो सप्ताह पहले अमेरिकी कांग्रेस को दिए गए 2.39 लाख करोड़ रुपये के पूर्व अनुमान को संशोधित करके अधिक है।
नए खर्चें कहां हुए हैं?
सीएनएन के अनुसार, नया आकलन में परिचालन और उपकरण संबंधी खर्चों को दर्शाया गया है। हर्स्ट ने कहा, 'हाउस आर्ड सर्विसेज कमेटी की गवाही के समय यह आंकड़ा 2.39 लाख करोड़ रुपये था, लेकिन संयुक्त स्टाफ टीम और नियंत्रक टीम लगातार इस अनुमान की समीक्षा कर रही हैं। अब हमें लगता है कि यह 2.77 लाख करोड़ रुपये के करीब है। ऐसा उपकरणों की मरम्मत और प्रतिस्थापन की अद्यतन लागतों के साथ-साथ युद्ध क्षेत्र में लोगों को बनाए रखने की सामान्य परिचालन लागतों के कारण है।'
बुनियादी ढांचे की मरम्मत में खर्च
हर्स्ट ने बाद में सीनेट विनियोग उपसमिति की सुनवाई में बताया कि 2.77 लाख करोड़ रुपये के अनुमान में अभी भी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान की लागत शामिल नहीं है।
हर्स्ट ने आगे कहा, 'हमारे पास इस समय कोई सटीक अनुमान नहीं है।' वहीं, सीएनएन के अनुसार, पिछले आंतरिक आकलन से पता चलता है कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और सैन्य संपत्तियों के प्रतिस्थापन को पूरी तरह से ध्यान में रखने के बाद संघर्ष की वास्तविक वित्तीय लागत काफी अधिक हो सकती है।
सीएनएन के एक सूत्र के अनुसार, कुल लागत 40 अरब अमेरिकी डॉलर से 50 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच बढ़ सकती है। बिल्मेस ने कहा कि अगर दीर्घकालिक सैन्य, पूर्व सैनिकों की देखभाल और रक्षा विस्तार की लागत को शामिल किया जाए, तो कुल लागत 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है।
शुरुआती दिनों में कितने खर्च हुए?
शोध के अनुसार, अकेले संघर्ष के शुरुआती दिनों में ही अमेरिका को कम से कम 16 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ, जो पेंटागन के शुरुआती अनुमानों से कहीं अधिक है, क्योंकि महंगी मिसाइल प्रणालियों का तेजी से क्षय हो रहा था और परिचालन खर्च बहुत अधिक था। बिलमेस ने कहा, 'हम असाधारण रूप से तेज गति से गोला-बारूद खर्च कर रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने ईरान संघर्ष के पहले चार दिनों में यूक्रेन को पिछले चार वर्षों में आपूर्ति की गई पैट्रियट मिसाइलों की तुलना में अधिक मिसाइलें दागीं।
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परिचालन खर्च में प्रतिदिन 2 अरब अमेरिकी डॉलर का खर्च
उन्होंने कहा कि अल्पकालिक परिचालन खर्च में प्रतिदिन लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर शामिल हैं, जिसमें मिसाइलें अवरोधक प्रणाली, विमानवाहक पोत स्ट्राइक समूहों की तैनाती, युद्ध वेतन, क्षतिग्रस्त सैन्य संपत्तियों का रखरखाव और प्रतिस्थापन शामिल है। इस बात पर प्रकाश डाला कि वास्तविक प्रतिस्थापन लागत पेंटागन के इन्वेंट्री अनुमानों में दर्शाए गए मूल्यों से काफी अधिक है।
उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए, वर्तमान में उपयोग में लाई जा रही टोमाहॉक मिसाइलों की कीमत स्टॉक में लगभग 20 लाख अमेरिकी डॉलर प्रति मिसाइल है, लेकिन आज इन्हें बदलने में 3 से 35 लाख अमेरिकी डॉलर का खर्च आता है।
स्टॉक में मौजूद पैट्रियट मिसाइलों की कीमत 1 से 20 लाख अमेरिकी डॉलर थी, लेकिन नए संस्करणों की कीमत 4 से 50 लाख अमेरिकी डॉलर प्रति मिसाइल है। ईंधन और अन्य आपूर्ति के मामले में भी यही स्थिति है, जहां हम कम कीमतों पर खरीदे गए स्टॉक का उपयोग कर रहे हैं। उसकी जगह बहुत अधिक वर्तमान कीमतों पर नए स्टॉक ला रहे हैं।' बिलमेस ने आगे क्षेत्र में क्षतिग्रस्त अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मरम्मत और मिसाइल और इंटरसेप्टर उत्पादन को बढ़ाने के लिए लॉकहीड मार्टिन और बोइंग जैसी कंपनियों के साथ बड़े पैमाने पर रक्षा विनिर्माण अनुबंधों सहित व्यापक मध्यम अवधि की लागतों की ओर इशारा किया।
कर्ज बढ़ने का अनुमान
विशेषज्ञ ने कहा कि पैक्ट अधिनियम के तहत पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य देखभाल और विकलांगता संबंधी दायित्वों के कारण दीर्घकालिक वित्तीय बोझ और भी अधिक हो सकता है, खासकर इस क्षेत्र में तैनात हजारों अमेरिकी सैनिकों के साथ। बिल्मेस ने कहा 'मुझे पूरा यकीन है कि हम ईरान युद्ध पर एक ट्रिलियन डॉलर खर्च करेंगे। शायद हम पहले ही इतनी रकम खर्च कर चुके हैं।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि रक्षा खर्च में वृद्धि और उधार लेने की लागत में बढ़ोतरी से अमेरिका के राष्ट्रीय कर्ज में काफी वृद्धि हो सकती है, जो वर्तमान में लगभग 31 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।