World News: ट्रंप चीन दौरे पर, जिनपिंग से होगी मुलाकात; एक्शन में हंगरी की नई सरकार, मंत्रियों ने पद संभाले
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को (अमेरिकी समयानुसार) चीन की यात्रा पर रवाना हो गए। वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार संबंधों को सुगम बनाना है। दोनों देशों के बीच व्यापार शुल्क को लेकर तनाव है। ट्रंप ने कहा कि वे शी जिनपिंग के साथ कई मुद्दों पर बात करेंगे। उन्होंने ईरान के मुद्दे को कम महत्व दिया। ट्रंप के अनुसार, ईरान का मामला "नियंत्रण में" है। उनके साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी है। इसमें राज्य सचिव मार्को रुबियो और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ शामिल हैं। टेस्ला के एलन मस्क और एप्पल के टिम कुक सहित शीर्ष अमेरिकी कंपनियों के प्रमुख भी बीजिंग में होंगे।
अमेरिकी सीनेट में डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे का मुद्दा उठा
अमेरिकी सीनेट की एक सुनवाई के दौरान रणनीतिक रूप से अहम डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे का मुद्दा अचानक उठाया गया। रिपब्लिकन सांसद जॉन कैनेडी ने चेतावनी दी कि चागोस द्वीप समूह विवाद के जरिये हिंद महासागर में चीन का प्रभाव बढ़ सकता है।
यह सुनवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट प्रस्ताव पर हुई। कैनेडी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की चागोस द्वीप और मॉरीशस से जुड़ी योजनाओं की आलोचना की।
कैनेडी ने कहा कि मॉरीशस के चीन से करीब संबंध हैं और यदि द्वीपों का नियंत्रण उसे मिला तो यह अमेरिकी हितों के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मॉरीशस डिएगो गार्सिया की एक अतिरिक्त चाबी चीन को दे सकता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीधे इस टिप्पणी का समर्थन नहीं किया। लेकिन उन्होंने डिएगो गार्सिया की रणनीतिक अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए बेहद अहम सैन्य स्थान है और भविष्य में भी वहां संचालन क्षमता बनाए रखना जरूरी है।
कोलंबिया में पिछले साल का सशस्त्र संघर्ष एक दशक में सबसे गंभीर: रेड क्रॉस रिपोर्ट
कोलंबिया में पिछले एक वर्ष में आम नागरिकों पर सशस्त्र संघर्ष का असर पिछले एक दशक में सबसे खराब रहा है। रेड क्रॉस की एक वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में विस्थापित लोगों की संख्या दोगुनी होकर 2,35,000 तक पहुंच गई, क्योंकि आपराधिक गिरोह और विद्रोही समूह सरकार और एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। छोटे शहरों और गांवों में विद्रोही समूहों की ओर से लगाए गए लॉकडाउन की घटनाएं भी 99 फीसदी बढ़ गईं।
दशकों से कोलंबिया में विद्रोही समूह और ड्रग तस्कर ग्रामीण इलाकों पर नियंत्रण के लिए सरकार से लड़ते रहे हैं। 2016 के शांति समझौते के बाद हिंसा में कमी आई थी। लेकिन बाद में छोटे समूहों ने खाली हुए इलाकों पर कब्जा कर लिया। रेड क्रॉस ने कहा कि 2025 की स्थिति पिछले कई वर्षों से चले आ रहे लगातार बिगड़ते हालात का नतीजा है।
अर्जेंटीना: राष्ट्रपति मिलेई के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग
अर्जेंटीना में मंगलवार को हजारों लोग देशभर के बड़े शहरों की सड़कों पर उतर आए। इन लोगों ने राष्ट्रपति जेवियर मिलेई की ओर से सरकारी विश्वविद्यालयों की फंडिंग में कटौती के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस संकटग्रस्त देश में सरकारी विश्वविद्यालय व्यवस्था लोगों के लिए गर्व का विषय मानी जाती है। राजधानी ब्यूनस आयर्स में भारी भीड़ ने सरकारी मुख्यालय तक रैली निकाली और विश्वविद्यालयों के बजट में कमी का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि फंड की कमी से देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है। अर्जेंटीना की सरकारी विश्वविद्यालय व्यवस्था देश के शिक्षित कार्यबल की मजबूत नींव मानी जाती है और मध्यम वर्ग के लिए यह गर्व की बात है। यहां 1949 से पढ़ाई मुफ्त है और इसी व्यवस्था ने पांच नोबेल पुरस्कार विजेता दिए हैं।
पिछले साल संसद ने विश्वविद्यालयों के खर्च और शिक्षकों के वेतन को बढ़ती महंगाई के हिसाब से बढ़ाने के लिए कानून पारित किया था। लेकिन सरकार ने अभी तक इसे लागू नहीं किया और अदालत में इस कानून को चुनौती दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरह मिलेई भी अक्सर विश्वविद्यालय परिसरों को 'वोक विचारधारा' फैलाने वाली जगह बताते हैं। मिलेई ने सरकारी खर्च में भारी कटौती की अपनी योजना के तहत शिक्षा क्षेत्र की फंडिंग कम कर दी है। उनका कहना है कि पिछली वामपंथी सरकारों ने लापरवाही से खर्च किया, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ा। मंगलवार के प्रदर्शन में हर उम्र और अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा के लोग शामिल हुए। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब आर्थिक गतिविधियों में गिरावट, कम होती तनख्वाह और बढ़ती बेरोजगारी के कारण मिलेई की लोकप्रियता घट रही है।
हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के कई मामलों ने भी सरकार को घेरा है। खास तौर पर कैबिनेट प्रमुख मैनुअल अडोर्नी के कथित खर्चों की जांच चर्चा में है। आरोप है कि उनका खर्च उनकी सरकारी तनख्वाह और घोषित संपत्ति से मेल नहीं खाता। एक छात्र के पोस्टर पर लिखा था, अडोर्नी पर हमारा कितना पैसा खर्च हो रहा है? विश्वविद्यालय मामलों के उप सचिव अलेजांद्रो अल्वारेज ने मंगलवार के प्रदर्शन को 'पूरी तरह राजनीतिक' बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने विश्वविद्यालयों के बढ़े हुए खर्च के लिए अतिरिक्त पैसा दिया है। लेकिन शिक्षक संगठनों ने इसे अपर्याप्त बताया है।
सरकार का कहना है कि जिस कानून को चुनौती दी गई है, उसमें यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि आर्थिक सख्ती के दौर में अतिरिक्त फंड कहां से आएगा।अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होने की संभावना है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने देश की सर्वोच्च अदालत से 'जनता की आवाज सुनने' की अपील की। मुख्य शिक्षक संघ के अनुसार, 2023 के आखिर में मिलेई के सत्ता में आने के बाद महंगाई को देखते हुए विश्वविद्यालय शिक्षकों की वास्तविक आय में करीब 33 फीसदी की गिरावट आई है।
ब्यूनस आयर्स विश्वविद्यालय के कुलपति रिकार्डो गेल्पी ने कहा कि खरीदने की क्षमता घटने के कारण इंजीनियरिंग और विज्ञान विभाग के कम से कम 580 शोध प्रोफेसरों ने सरकारी संस्थान छोड़ दिए हैं और निजी विश्वविद्यालयों या बेहतर वेतन वाली नौकरियों में चले गए हैं। रैली में शामिल 24 वर्षीय कानून की छात्रा सोल मुनिज ने कहा, यह स्पष्ट है कि सरकार सरकारी शिक्षा की फंडिंग खत्म करना चाहती है। विश्वविद्यालय हमारे लिए गर्व की बात है। यह हमारे पास सबसे अच्छी चीज है।
हंगरी में 16 साल बाद नई सरकार, मंत्रियों ने संभाले पदभार
यूरोपीय देश हंगरी में 16 साल के बाद व्यवस्था बदल गई है। मंत्रियों ने पदभार संभाल लिए हैं। हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में मंगलवार को प्रधानमंत्री पीटर मैग्यार के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल मंत्रियो को शपथ दिलाई गई। सत्ता हस्तांतरण से पहले मैग्यार की प्रो-यूरोपीय तिस्ज़ा पार्टी ने पिछले महीने ओर्बन की फ़िडेज़ पार्टी को हराकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। इसी के साथ 16 साल से चला आ रहा ओर्बन के राजनीतिक सिस्टम का पटाक्षेप हो गया है। पीटर मैग्यार ने अपनी नीतियों का संकेत देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व वाली नई सरकार सभी हंगरीवासियों की होगी और मंत्री राष्ट्र सेवा की भावना के साथ काम करेंगे। मैग्यार ने भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, सार्वजनिक धन की वसूली, लोकतांत्रिक संस्थाओं को बहाल करने जैसे लुभावने वादे भी किए। नई सरकार में 16 मंत्रालय हैं, जिनमें स्वास्थ्य, पर्यावरण और शिक्षा के लिए अलग विभाग हैं। इसका लक्ष्य यूरोपीय संघ के जमे हुए करीब 17 अरब यूरो के फंड को वापस लाना है, जिस पर विदेश मंत्री अनीता ओर्बन ने भी जोर दिया।