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ट्रंप की चीन यात्रा: अमेरिकी राष्ट्रपति की मेजबानी के लिए बीजिंग तैयार, दोनों देशों की क्या हैं उम्मीदें?
पीटीआई, बीजिंग।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 13 May 2026 12:44 PM IST
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सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को चीन पहुंचेंगे, जहां उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ व्यापार, टैरिफ, ताइवान और पश्चिम एशिया जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत होगी। चीन इस दौरे को अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्ते सुधारने का अवसर मान रहा है। वहीं, दुनिया की नजर इस यात्रा पर इसलिए भी टिकी है, क्योंकि इसमें ईरान संकट और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना है। पढ़िए रिपोर्ट-
डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग
- फोटो : रॉयटर्स/एएनआई (फाइल)
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विस्तार
चीन बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजकीय दौरे की मेजबानी के लिए तैयार है। इस दौरान वह अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिनमें खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष भी शामिल है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता सातवीं बार आमने-सामने बैठक करेंगे। इससे पहले उन्होंने अक्तूबर 2025 में दक्षिण कोरिया के बुसान में मुलाकात की थी।
चीन इस यात्रा को व्यापारिक समझौते को आगे बढ़ाने और अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद को खत्म करने के अवसर के रूप में देख रहा है। टैरिफ ने 525 अरब डॉलर से अधिक के निर्यात को प्रभावित किया था। ट्रंप इससे पहले 2017 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन गए थे। इस बार वह कई बड़े अमेरिकी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ बीजिंग पहुंचेंगे।
व्हाइट हाउस ने बताया क्या रहेगा ट्रंप का कार्यक्रम
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप बुधवार शाम बीजिंग पहुंचेंगे। इसके बाद गुरुवार को शी जिनपिंग के लिए औपचारिक स्वागत समारोह होगा और फिर द्विपक्षीय बैठक होगी। शुक्रवार को दोनों नेताओं की एक और मुलाकात होगी, जिसमें पहले चाय पर अनौपचारिक बातचीत होगी और फिर दोपहर भोज के दौरान बैठक होगी। अमेरिका ने भी जिनपिंग के लिए बाद में वाशिंगटन यात्रा का निमंत्रण देने की योजना बनाई है।
ये भी पढ़ें: मीडिया पर भड़के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ईरान को झूठी उम्मीद देने और मदद करने का आरोप लगाया
दोनों पक्षों ने रविवार को घोषणा की थी कि उप-प्रधानमंत्री ही लिफेंग व्यापार वार्ता के लिए 12 और 13 मई को दक्षिण कोरिया जाएंगे और वहां अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ बातचीत करेंगे। यह बातचीत ट्रंप की यात्रा से पहले अंतिम दौर की वार्ता होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बातचीत व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक, ताइवान और अमेरिका की ओर से ताइपे को हथियारों की बिक्री, ईरान और पश्चिम एशिया की सुरक्षा तथा रेयर अर्थ और आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहने की संभावना है।
'टेम्पल ऑफ हेवन' का करेंगे दौरा
ट्रंप के कार्यक्रम में 'टेम्पल ऑफ हेवन' (स्वर्ग का मंदिर) का दौरा भी शामिल है। यह शाही मंदिरों का एक परिसर है, जहां पुराने समय में सम्राट अच्छी फसल के लिए पूजा-अर्चना करते थे।
चीन रवाना होने से पहले ट्रंप ने क्या कहा?
बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रंप ने वाशिंगटन में मीडिया से कहा कि उनकी जिनपिंग के साथ सबसे ज्यादा चर्चा व्यापार को लेकर होगी। वह चीन के साथ ऐसे और समझौते करने की योजना बना रहे हैं, जिनके तहत चीन अमेरिका से ज्यादा खाद्य उत्पाद और विमान खरीदेगा। दोनों देश आपसी मतभेदों को सुलझाने के लिए एक व्यापार बोर्ड बनाने की भी योजना बना रहे हैं।
ट्रंप के दौरे से चीन को क्या उम्मीदें हैं?
व्यापार के नजरिये से चीन को इस यात्रा से बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ट्रंप के साथ अमेरिका की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी जा रहे हैं। इनमें टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क और एप्पल के सीईओ टिम कुक शामिल हैं, जिनका चीन में मजबूत कारोबार है। 2026 की शुरुआत में एप्पल ने चीन के प्रतिस्पर्धी स्मार्टफोन बाजार में फिर से पहला स्थान हासिल कर लिया है। इसकी वजह आईफोन की बिक्री में 28 फीसदी की बढ़ोतरी रही। अप्रैल में चीन में बनी टेस्ला गाड़ियों की बिक्री (निर्यात समेत) 79,478 तक पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 36 फीसदी अधिक है। इससे उत्पादन में फिर तेजी आने के संकेत मिले हैं।
दुनिया की नजरें इस दौरे पर क्यों टिकी हैं?
दुनिया की नजर इस यात्रा पर इसलिए भी है, क्योंकि इसमें खाड़ी क्षेत्र के संकट और ईरान युद्ध के समाधान की उम्मीद की जा रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में बीजिंग का दौरा किया, जिस पर अमेरिका ने भी करीब से नजर रखी, क्योंकि चीन ईरान से तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।
चीन ने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की अपील की है। जबकि अमेरिका के विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान की नीतियां उसे वैश्विक रूप से अलग-थलग कर रही हैं। विश्लेषकों के अनुसार, चीन खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता चाहता है क्योंकि उसके सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे कई देशों के साथ गहरे संबंध हैं।
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि दोनों नेताओं की बातचीत से संबंधों में स्थिरता आई है और भविष्य में सहयोग को और मजबूत किया जाना चाहिए। चीन का कहना है कि ताइवान मुद्दा भी इस बैठक में अहम रहेगा, जबकि अमेरिका ने पहले ही चीन से ताइवान पर 'सही निर्णय' लेने की बात कही है।
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व्हाइट हाउस ने बताया क्या रहेगा ट्रंप का कार्यक्रम
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप बुधवार शाम बीजिंग पहुंचेंगे। इसके बाद गुरुवार को शी जिनपिंग के लिए औपचारिक स्वागत समारोह होगा और फिर द्विपक्षीय बैठक होगी। शुक्रवार को दोनों नेताओं की एक और मुलाकात होगी, जिसमें पहले चाय पर अनौपचारिक बातचीत होगी और फिर दोपहर भोज के दौरान बैठक होगी। अमेरिका ने भी जिनपिंग के लिए बाद में वाशिंगटन यात्रा का निमंत्रण देने की योजना बनाई है।
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दोनों पक्षों ने रविवार को घोषणा की थी कि उप-प्रधानमंत्री ही लिफेंग व्यापार वार्ता के लिए 12 और 13 मई को दक्षिण कोरिया जाएंगे और वहां अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ बातचीत करेंगे। यह बातचीत ट्रंप की यात्रा से पहले अंतिम दौर की वार्ता होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बातचीत व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक, ताइवान और अमेरिका की ओर से ताइपे को हथियारों की बिक्री, ईरान और पश्चिम एशिया की सुरक्षा तथा रेयर अर्थ और आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहने की संभावना है।
'टेम्पल ऑफ हेवन' का करेंगे दौरा
ट्रंप के कार्यक्रम में 'टेम्पल ऑफ हेवन' (स्वर्ग का मंदिर) का दौरा भी शामिल है। यह शाही मंदिरों का एक परिसर है, जहां पुराने समय में सम्राट अच्छी फसल के लिए पूजा-अर्चना करते थे।
चीन रवाना होने से पहले ट्रंप ने क्या कहा?
बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रंप ने वाशिंगटन में मीडिया से कहा कि उनकी जिनपिंग के साथ सबसे ज्यादा चर्चा व्यापार को लेकर होगी। वह चीन के साथ ऐसे और समझौते करने की योजना बना रहे हैं, जिनके तहत चीन अमेरिका से ज्यादा खाद्य उत्पाद और विमान खरीदेगा। दोनों देश आपसी मतभेदों को सुलझाने के लिए एक व्यापार बोर्ड बनाने की भी योजना बना रहे हैं।
ट्रंप के दौरे से चीन को क्या उम्मीदें हैं?
व्यापार के नजरिये से चीन को इस यात्रा से बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ट्रंप के साथ अमेरिका की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी जा रहे हैं। इनमें टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क और एप्पल के सीईओ टिम कुक शामिल हैं, जिनका चीन में मजबूत कारोबार है। 2026 की शुरुआत में एप्पल ने चीन के प्रतिस्पर्धी स्मार्टफोन बाजार में फिर से पहला स्थान हासिल कर लिया है। इसकी वजह आईफोन की बिक्री में 28 फीसदी की बढ़ोतरी रही। अप्रैल में चीन में बनी टेस्ला गाड़ियों की बिक्री (निर्यात समेत) 79,478 तक पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 36 फीसदी अधिक है। इससे उत्पादन में फिर तेजी आने के संकेत मिले हैं।
दुनिया की नजरें इस दौरे पर क्यों टिकी हैं?
दुनिया की नजर इस यात्रा पर इसलिए भी है, क्योंकि इसमें खाड़ी क्षेत्र के संकट और ईरान युद्ध के समाधान की उम्मीद की जा रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में बीजिंग का दौरा किया, जिस पर अमेरिका ने भी करीब से नजर रखी, क्योंकि चीन ईरान से तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।
चीन ने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की अपील की है। जबकि अमेरिका के विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान की नीतियां उसे वैश्विक रूप से अलग-थलग कर रही हैं। विश्लेषकों के अनुसार, चीन खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता चाहता है क्योंकि उसके सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे कई देशों के साथ गहरे संबंध हैं।
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि दोनों नेताओं की बातचीत से संबंधों में स्थिरता आई है और भविष्य में सहयोग को और मजबूत किया जाना चाहिए। चीन का कहना है कि ताइवान मुद्दा भी इस बैठक में अहम रहेगा, जबकि अमेरिका ने पहले ही चीन से ताइवान पर 'सही निर्णय' लेने की बात कही है।