सायरस मिस्त्री को हटाने के बाद टाटा ने गंवाए 17000 करोड़
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देश के दिग्गज कारोबारी समूह टाटा में जारी उठा-पठक का असर कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिल रहा है। टाटा के बोर्ड द्वारा सायरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद टाटा ग्रुप की पांच लिस्टेड कंपनियों के मार्केट वैल्यू के लिहाज से शेयर बाजार में केवल दो सत्रों के दौरान करीब 17000 करोड़ स्वाहा हो गए।
सायरस को अचानक पद से हटाए जाने से शेयर बाजार निवेशक अचंभे में हैं और इसी ऊहा-पोह के स्थिति में वह शेयरों की बिकवाली कर रहे हैं। शेयर बाजार में टाटा ग्रुप की सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में पिछले दो दिनों में जबरदस्त बिकवाली देखी जा रही है।
जानकारों की मानें तो सायरस को हटाने के कारण टाटा ग्रुप के कर्ज को कम करने और कुछ कारोबारों की रीस्ट्रक्चिंग करने के प्रयासों को झटका लगेगा। सिटी ग्रुप के अनुसार सायरस की अगुवाई में टाटा ग्रुप ने काफी बदलाव देखे थे।
उनके कार्यकाल में कैपिटल का सही प्रकार से उपयोग किया जा रहा था। उनको हटाए जाने से कंपनी की तरक्की की राह में रोड़ा आएगा। टीसीएस की मार्केट वैल्यू में 7,788 करोड़ कि गिरावट देखी गई, जबकि टाटा मोटर्स से 6100 करोड़ स्वाहा हो गए।
ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए ग्रुप के शीर्ष अधिकारियों में फेरबदल
गौरतलब है कि टाटा के बोर्ड ने रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है। इसके बाद रतन ने ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए ग्रुप के शीर्ष अधिकारियों में फेरबदल किए हैं। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, चंद्रा और स्पेथ की नियुक्ति यह इशारा करती है कि रतन टाटा, टाटा के अधिकारियों को ही ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।
बताते चलें कि उन्होंने इससे पहले सायरस मिस्त्री को बोर्ड चेयरमैन बनाया था जिन्होंन हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के डीन नितिन नोहरिया और रणनीतिकार फरीदा खंबाटा जैसे लोगों को बोर्ड में शामिल किया था। इसमें सिर्फ इशात हुसैन ही टाटा के पुराने साथी थे जो साइरस की 9 सदस्यी बोर्ड में शामिल थे।
टाटा ने वैश्विक संकट की ऊंचाई पर जेएलआर को 2.3 बिलियन डॉलर की कीमत पर वैश्विक ऑटोमोबाइल दिग्गज कंपनी फोर्ड से साल 2008 में अर्जित किया था। वहीं, सॉफ्टवेयर कंपनी टीसीएस साल 2004 में जुड़ी थी।