Gold Silver Price: सोने की सात सत्रों की तेजी टूटी, मुनाफावसूली से कीमतों में भारी गिरावट; जानिए आज क्या भाव
राजधानी दिल्ली में सोने की सात सत्रों की तेजी मुनाफावसूली के कारण टूटी। 10 ग्राम सोने का भाव 2,800 रुपये घटकर 1,57,000 रुपये हुआ। चांदी भी 6,000 रुपये गिरी। अमेरिकी मुद्रास्फीति और पीपीआई आंकड़े बाजार को प्रभावित कर रहे हैं।
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देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को सोने की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सात सत्रों की लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली के कारण यह गिरावट आई। 10 ग्राम सोने का भाव 2,800 रुपये घटकर 1,57,000 रुपये हो गया। बुधवार को यह 1,59,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी की कीमतों पर भी बिकवाली का असर दिखा। चांदी 6,000 रुपये टूटकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर आ गई। पिछले सत्र में सफेद धातु 2,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। एलकेपी सिक्योरिटीज के रिसर्च विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने बताया कि निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
अमेरिका में नरम मुद्रास्फीति के परिणाम पहले ही सर्राफा बाजार में शामिल हो चुके थे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी यह गिरावट देखी गई। स्पॉट गोल्ड 0.43 फीसदी की गिरावट के साथ 4,389.67 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। स्पॉट सिल्वर भी मामूली गिरावट के साथ 65.03 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर था।
कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
मीराए एसेट शेयरखान के जिंसों प्रमुख प्रवीण सिंह ने बताया कि विदेशी बाजारों में भी स्पॉट गोल्ड गिरा। यह गिरावट मुनाफावसूली के कारण हुई। बहुप्रतीक्षित अमेरिकी जुलाई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति आंकड़े पूर्वानुमान के अनुरूप आया। इसी कारण व्यापारियों ने मुनाफावसूली की। कच्चे तेल की कीमतों में भी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर परस्पर विरोधी दावों के बीच गिरावट दर्ज की गई। डॉलर सूचकांक स्थिर बना रहा।
अब निवेशकों का ध्यान किस पर है?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा कि सीपीआई का असर अब बाजार से पीछे है। निवेशकों का ध्यान अब अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) पर केंद्रित हो गया है। यह मुद्रास्फीति और फेडरल रिजर्व की नीतिगत राह पर आगे के संकेत देगा। पीपीआई के आंकड़े बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
पीपीआई के आंकड़ों का क्या असर होगा?
गांधी ने बताया कि पीपीआई का कम आंकड़ा फेडरल रिजर्व के लचीले रुख की उम्मीद बढ़ा सकता है। इससे कीमती धातुओं की कीमतों को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं, उम्मीद से अधिक परिणाम से जारी मुद्रास्फीति के बारे में चिंताएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।