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Niti Aayog: भारत को 2047 तक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए केंद्रित रणनीति जरूरी, नीति आयोग ने की वकालत
Thu, 13 Aug 2026 07:17 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Thu, 13 Aug 2026 07:17 PM IST
सार
नीति आयोग ने 2047 तक भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए एक केंद्रित रणनीति की आवश्यकता बताई है। रिपोर्ट में रसायन, वस्त्र, दूरसंचार और सौर पीवी जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया गया है, साथ ही चुनौतियों और समाधानों पर भी प्रकाश डाला गया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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भारतीय अर्थव्यवस्था।
- फोटो : amarujala
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विस्तार
नीति आयोग ने 2047 तक भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की भारत की आकांक्षा पर जोर दिया है। आयोग ने कहा कि इसके लिए एक केंद्रित रणनीति की आवश्यकता होगी। इस रणनीति में पैमाना, प्रतिस्पर्धात्मकता, नवाचार और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकरण शामिल होना चाहिए। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिरी ने कहा कि भारत अपनी आर्थिक और औद्योगिक यात्रा के एक निर्णायक क्षण में खड़ा है।
नीति आयोग ने 13 अगस्त, 2026 को 'भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रमुख क्षेत्र' नामक अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें रसायन, वस्त्र, दूरसंचार और नेटवर्क उपकरण, तथा सौर पीवी विनिर्माण शामिल हैं। ये क्षेत्र औद्योगिक वृद्धि को तेज करने में सहायक होंगे। इनसे रोजगार पैदा होगा और तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि होगी। ये भारत की आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेंगे। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की उपस्थिति का विस्तार करेंगे। लाहिरी ने बताया कि हर प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्था का अनुभव यही दर्शाता है।
निरंतर आर्थिक परिवर्तन एक मजबूत और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण आधार पर निर्मित होता है। विनिर्माण केवल निवेश, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा नहीं देता। यह गुणवत्तापूर्ण रोजगार भी पैदा करता है और उत्पादकता बढ़ाता है। यह अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में संबंधों को भी मजबूत करता है।
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नीति आयोग ने 13 अगस्त, 2026 को 'भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रमुख क्षेत्र' नामक अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें रसायन, वस्त्र, दूरसंचार और नेटवर्क उपकरण, तथा सौर पीवी विनिर्माण शामिल हैं। ये क्षेत्र औद्योगिक वृद्धि को तेज करने में सहायक होंगे। इनसे रोजगार पैदा होगा और तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि होगी। ये भारत की आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेंगे। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की उपस्थिति का विस्तार करेंगे। लाहिरी ने बताया कि हर प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्था का अनुभव यही दर्शाता है।
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निरंतर आर्थिक परिवर्तन एक मजबूत और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण आधार पर निर्मित होता है। विनिर्माण केवल निवेश, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा नहीं देता। यह गुणवत्तापूर्ण रोजगार भी पैदा करता है और उत्पादकता बढ़ाता है। यह अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में संबंधों को भी मजबूत करता है।
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